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जानवरों पर क्रूरता के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट ने केन्द्र से मांगा जवाब
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने भारत में पशुपालन के कथित अमानवीय तरीकों पर रोक लगाने के लिए दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को केंद्र तथा भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) से जवाब मांगा। इस याचिका में जानवरों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ कदम उठाने की मांग की गई है। जानवरों की अवैध रूप से हत्या पर भी रोक लगाने की मांग याचिका में की गई है।
मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने पीपल्स फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) की ओर से दायर याचिका पर केंद्र, एडब्ल्यूबीआई, सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के पशुपालन विभागों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। पीठ ने अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है।
याचिका में भारत में पशुओं को दया मृत्यु देने के कथित क्रूर तरीकों पर भी रोक लगाने की मांग की गई। इसके साथ ही केंद्र को निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता रोकथाम अधिनियम के तहत मवेशी के नथुनों में छेद करना, दागना, बधिया करना तथा सींग निकालने जैसे पशुपालन के तरीकों को परिभाषित एवं नियमित किया जाए तथा बेहतर बनाया जाए।
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मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने पीपल्स फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) की ओर से दायर याचिका पर केंद्र, एडब्ल्यूबीआई, सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के पशुपालन विभागों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। पीठ ने अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है।
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याचिका में भारत में पशुओं को दया मृत्यु देने के कथित क्रूर तरीकों पर भी रोक लगाने की मांग की गई। इसके साथ ही केंद्र को निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता रोकथाम अधिनियम के तहत मवेशी के नथुनों में छेद करना, दागना, बधिया करना तथा सींग निकालने जैसे पशुपालन के तरीकों को परिभाषित एवं नियमित किया जाए तथा बेहतर बनाया जाए।
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