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डीएसएसएसबी को प्रस्ताव न भेजने पर एसडीएमसी पर 25 हजार रुपये जुर्माना
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नई दिल्ली। विशेष बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए विशेष शिक्षकों की भर्ती करने के लिए दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को प्रस्ताव न भेजने पर हाईकोर्ट ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा यह गंभीर मामला है। अदालत ने निगम के रवैये पर नाराजगी जताते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने साउथ एमसीडी को दो सप्ताह में विशेष शिक्षकों की भर्ती के लिए डीएसएसएसबी को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि इस आदेश का पालन न हुआ तो अगली सुनवाई पर निगमायुक्त को पेश होना होगा। अदालत ने यह निर्देश इस मुद्दे पर दायर अवमानना याचिका दायर पर सुनवाई करते हुए दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 10 फरवरी तय की है।
अदालत ने कहा यह गंभीर मामला है कि शिक्षकों की भर्ती करने के लिए अदालत के 10 वर्ष पहले दिए आदेश के बावजूद एमसीडी ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। अदालत ने कहा कि विशेष वर्ग (विकलांग वर्ग) के बच्चों को भी शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है और वे शिक्षा से वंचित हैं। लगता है कि ये बच्चे आपके लिए कोई अहमियत नहीं रखते।
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सोशल ज्यूरिस्ट की ओर से यह याचिका अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने दायर की है। उन्होंने कहा अदालत के आदेश के चार सप्ताह से अधिक समय बीतने के बावजूद न तो एमसीडी आयुक्त ने कोई अंतिम निर्णय लिया और न ही विशेष शिक्षक (प्राथमिक) के 1132 रिक्त पदों की मांग शिक्षकों के चयन के लिए विज्ञापन जारी करने के लिए डीएसएसएसबी को आग्रह किया गया।
उन्होंने कहा यह पद 10 साल से ज्यादा समय से खाली पड़े हैं लेकिन एमसीडी इसे नहीं भर पाई है। उन्होंने कहा अदालत ने कई बार आदेश जारी किए हैं। बावजूद एमसीडी ने डीएसएसएसबी को पदों के भरने के लिए नहीं कहा। विशेष शिक्षक (प्राथमिक) की नियुक्ति में देरी से दिव्यांग छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में अदालत के 20 दिसंबर के आदेश का पालन न करने पर अवमानना कार्रवाई की जाए।
इस मामले में हाईकोर्ट ने 2001 में एमसीडी को बच्चों की पढ़ाई के ध्यानार्थ 2003 तक रिक्त पदों को भरने का निर्देश दिया था और उसके बाद समय-समय पर शिक्षकों की भर्तियां करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। याचिका के अनुसार दिल्ली सरकार के स्कूलों में 35,000 से अधिक व तीनों एमसीडी में 5,000 से अधिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
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न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने साउथ एमसीडी को दो सप्ताह में विशेष शिक्षकों की भर्ती के लिए डीएसएसएसबी को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि इस आदेश का पालन न हुआ तो अगली सुनवाई पर निगमायुक्त को पेश होना होगा। अदालत ने यह निर्देश इस मुद्दे पर दायर अवमानना याचिका दायर पर सुनवाई करते हुए दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 10 फरवरी तय की है।
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अदालत ने कहा यह गंभीर मामला है कि शिक्षकों की भर्ती करने के लिए अदालत के 10 वर्ष पहले दिए आदेश के बावजूद एमसीडी ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। अदालत ने कहा कि विशेष वर्ग (विकलांग वर्ग) के बच्चों को भी शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है और वे शिक्षा से वंचित हैं। लगता है कि ये बच्चे आपके लिए कोई अहमियत नहीं रखते।
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सोशल ज्यूरिस्ट की ओर से यह याचिका अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने दायर की है। उन्होंने कहा अदालत के आदेश के चार सप्ताह से अधिक समय बीतने के बावजूद न तो एमसीडी आयुक्त ने कोई अंतिम निर्णय लिया और न ही विशेष शिक्षक (प्राथमिक) के 1132 रिक्त पदों की मांग शिक्षकों के चयन के लिए विज्ञापन जारी करने के लिए डीएसएसएसबी को आग्रह किया गया।
उन्होंने कहा यह पद 10 साल से ज्यादा समय से खाली पड़े हैं लेकिन एमसीडी इसे नहीं भर पाई है। उन्होंने कहा अदालत ने कई बार आदेश जारी किए हैं। बावजूद एमसीडी ने डीएसएसएसबी को पदों के भरने के लिए नहीं कहा। विशेष शिक्षक (प्राथमिक) की नियुक्ति में देरी से दिव्यांग छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में अदालत के 20 दिसंबर के आदेश का पालन न करने पर अवमानना कार्रवाई की जाए।
इस मामले में हाईकोर्ट ने 2001 में एमसीडी को बच्चों की पढ़ाई के ध्यानार्थ 2003 तक रिक्त पदों को भरने का निर्देश दिया था और उसके बाद समय-समय पर शिक्षकों की भर्तियां करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। याचिका के अनुसार दिल्ली सरकार के स्कूलों में 35,000 से अधिक व तीनों एमसीडी में 5,000 से अधिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।