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दिल्ली: हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को दी जमानत, पॉक्सो कानून के बढ़ते दुरुपयोग पर जताई चिंता

Thu, 14 Oct 2021 04:49 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Thu, 14 Oct 2021 04:49 PM IST
सार

अदालत ने कहा सहमति से सेक्स कानूनी ग्रे क्षेत्र में रहा है, क्योंकि नाबालिग द्वारा दी गई सहमति को कानून की नजर में वैध सहमति नहीं कहा जा सकता। 

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High Court grants bail to accused of raping a minor expresses concern over misuse of POCSO Act
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

उच्च न्यायालय ने पॉक्सो कानून के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इसे गलत तरीके से लागू किया जा रहा है। अदालत ने एक मामले में दुष्कर्म के आरोपी को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा वह दोनों के बीच दोस्ती को नजरअंदाज नहीं कर सकती और यह जोड़ा प्रतीत होता है।

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न्यायमूर्ति सुब्रामण्यम प्रसाद ने कहा तथ्यों से स्पष्ट है कि लड़की के परिवार के आग्रह पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जो यह जानने पर उनके लिए शर्मिंदगी थी कि वह गर्भवती है और इससे पड़ोस में सामाजिक प्रतिक्रिया होगी। अदालत ने कहा सहमति से सेक्स कानूनी ग्रे क्षेत्र में रहा है, क्योंकि नाबालिग द्वारा दी गई सहमति को कानून की नजर में वैध सहमति नहीं कहा जा सकता। 
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कानून की कठोरता को गलत तरीके से लागू किया जा रहा
सवाल उठता है कि याचिकाकर्ता (पुरुष) को जमानत दी जानी चाहिए या नहीं। अदालत ने कहा यह एक ट्रिट और दुर्भाग्यपूर्ण प्रथा बन गई है कि पुलिस लड़की के परिवार के इशारे पर पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर रही है जो उसकी दोस्ती और एक युवा लड़के के साथ रोमांटिक जुड़ाव पर आपत्ति जताते हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि कानून की कठोरता को गलत तरीके से लागू किया जा रहा है और बाद में इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।
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दिया गया यौन शोषण का रंग 
अदालत ने कहा कि आरोपी और लड़की की उम्र, तस्वीरों से स्पष्ट रूप से दोनों के बीच एक रिश्ते की ओर इशारा किया और मेडिकल रिपोर्ट, एफआईआर और मजिस्ट्रेट के सामने की रिकॉर्डिंग के समय दिए गए बयानों में विसंगतियों है। यह तथ्य आरोपी को जमानत देने की दिशा में संतुलन झुकाव है। अदालत ने कहा सामाजिक शर्मिंदगी से बचने और गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने के लिए यह एफआईआर दर्ज की गई है, जिससे इसे यौन शोषण का रंग दिया गया है। इसे यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के दायरे में लाया गया है जिसमें बाल दुर्व्यवहार को समाप्त करने की परिकल्पना की गई है। अदालत ने कहा लड़की को उस आरोपी को जमानत देने में कोई आपत्ति नहीं है। 

50 हजार के निजी मुचलके पर दी जमानत
उन्होंने कहा कि वे दोनों कमोबेश एक ही उम्र के हैं और इस तथ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती कि आरोपी केवल 21 साल का है, उसके आगे पूरी जिंदगी है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी युवक उत्तर प्रदेश के हरदोई में अपने माता-पिता के साथ रहेगा और इस पते का सत्यापन अभियोजन पक्ष द्वारा किया गया है। अदालत ने आरोपी की जमानत 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार की है। अदालत ने उसे साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने व अदालती कार्यवाही में पेश होने तक हरदोई जिले को नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है। 

नशीला पदार्थ खिलाकर किया था दुष्कर्म
एफआईआर के मुताबिक, लड़की ने शिकायत की थी कि उसकी उम्र 16 साल है और वह 12वीं क्लास की छात्रा है और पिछले साल जनवरी में यह शख्स स्कूल जाते समय उसका पीछा करता था। आरोपी ने उससे दोस्ती करने का इरादा जाहिर किया था लेकिन उसने विरोध किया। पिछले वर्ष कोविड के चलते लॉकडाउन के दौरान जब वह एक दोस्त की जगह से लौट रही थी तो उस शख्स ने उसे रोक लिया और एक घर में ले जाकर उसे कुछ स्नैक्स दिए जिसके बाद वह बेहोश हो गई व आरोपी ने उससे दुष्कर्म किया। उसने अपने घर इसकी सूचना नहीं दी और उल्लटियां होने पर घर में उसके गर्भवती होने का पता चला। पुलिस ने शिकायत पर यह मामला दर्ज किया और परिवार के सदस्यों ने उसका गर्भपात करवा दिया।

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