फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   high Court expresses concern over excessive loan recovery by digital platforms ask RBI to take concrete steps

दिल्ली: डिजिटल प्लेटफार्मों द्वारा अत्याधिक ऋण वसूली पर अदालत ने जताई चिंता, आरबीआई से तुरंत ठोस कदम उठाने को कहा 

Tue, 27 Jul 2021 07:05 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 27 Jul 2021 07:05 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह आरबीआई के साथ बैठकर ब्याज की दर तय करें और रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करे।

विज्ञापन
high Court expresses concern over excessive loan recovery by digital platforms ask RBI to take concrete steps
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हाईकोर्ट ने ऋण देकर आम लोगों से सलाना पांच सौ फीसदी ब्याज एवं 30 फीसदी तक प्रोसेस फीस वसूल कर आमलोगों को कथित रूप से आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले डिजिटल प्लेटफार्म पर शिकंजा कसने को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से तुरंत ठोस कदम उठाने को कहा है। अदालत ने आरबीआई के जवाब पर असंतुष्टी जताते हुए कहा कि आप अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह आरबीआई के साथ बैठकर ब्याज की दर तय करें और रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करे। पीठ ने दोनों से कहा कि आप ऋण देने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए ब्याज दर तय करें और देखते हैं कि वे लोग क्या करते हैं।
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि वैसे ही हाईकोर्ट में गई गैर वाजिब जनहित याचिका दाखिल की जा रही है और उसे उस पर हर्जाना लगाकर उसे निरस्त किया जा रहा है, लेकिन यह आम लोगों से जुड़ी है और ठोस कदम उठाने जरूरी है। यह वाकई में जनहित से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि आरबीआई के पास अधिकार हैं और वह इस तरह के कर्ज देने वाले ऐप पर शिकंजा कस सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने आरबीआई कानून की धारा 45 व एक अधिसूचना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसको लेकर कमेटी गठित की गई थी जिसका अप्रैल महीने में ही समय समाप्त हो गया था। लेकिन उस कमेटी ने क्या रिपोर्ट दी उसके बारे में आरबीआई स्पष्ट नहीं कर रही है। आरबीआई के अधिवक्ता ने कहा कि आरबीआई बैंक और एनबीएफसी पर अपनी निगरानी रखती है, लेकिन कर्ज देने वाला ऐप पर उसका अधिकार नहीं है।

याची धरणीधर कनिमोझी ने याचिका में कहा है कि वर्तमान में इस तरह के लगभग तीन सौ प्लेटफार्म व एप है जो लोगों को पंद्रह सौ से लेकर 50 हजार रुपए तक का कर्ज देते हैं। यह कर्ज सात दिनों से लेकर 15 दिनों तक के लिए होता है। इस पर वे फॉर्म फीस, सर्विस चार्ज, प्रोसेसिंग फीस आदि के नाम पर 35 से 45 फीसदी तक कर्ज की राशि पहले ही ले लेते हैं। इसके अलावा भी इनके कई हिडेन चार्ज होते हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि इसमें से ज्यादातर ऑनलाइन डिजिटल बिजनेस मोबाइल ऐप के जरिए किए जा रहे हैं। जिसमें मनमाने तरीके से बेहद ज्यादा दरों पर ब्याज वसूल किया जाता है। एक बार लोन लेने के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स लोगों से पैसे की रिकवरी के लिए ब्याज दाताओं को रिकवरी एजेंट के माध्यम से प्रताड़ित करवाते हैं।


याचिका में मांग की गई है कि एप्स के माध्यम से ऑनलाइन लोन देने वाले प्लेटफॉर्म्स पर ब्याज का प्रतिशत निर्धारित किया जाना चाहिए, जिससे ब्याज लेने वाले लोगों के उत्पीड़न को रोका जा सके। इसके अलावा इस याचिका में ब्याज लेने वाले लोगों की परेशानियों को सुनने और हल करने के लिए हर राज्य में एक शिकायत सुनने वाला कमेटी बनाई जानी चाहिए। जहां ब्याज देने वाले लोगों का अगर उत्पीड़न हो रहा है तो वह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ शिकायत कर सकें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed