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हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिए निर्देश, कहा- बिना अंतिम संस्कार के किसी भी हाल में लौटाए ना जाएं शव

Fri, 29 May 2020 11:09 PM IST
Jeet Kumar अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 29 May 2020 11:09 PM IST
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high court directs delhi government to not return dead body in any situation without funeral
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : ANI

हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण से मौत के बाद शवों के निपटान संबंधी सुविधाओं के अभाव संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि शवों को किसी भी हाल में बिना अंतिम संस्कार न लौटाया जाए।

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हाईकोर्ट ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका शुरू की थी। हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमों से जवाब मांगा था। मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन जनहित याचिका पर सुनवाई की।
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दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया कि बृहस्पतिवार को 28 शवों का अंतिम संस्कार किया गया और बाकी 35 शवों का अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा। सरकार ने कहा कि उन शवों का ही अंतिम संस्कार अभी नहीं किया जाएगा, जिनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आनी अभी बाकी है और जांच जारी है। 
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दिल्ली सरकार ने कहा कि एलएनजेपी अस्पताल के शवों को पंचकुइयां और पंजाबी बाग शवगृह भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने अब बिजली और सीएनजी भट्टियों के अलावा लकड़ी के पारंपरिक दाह संस्कारों को अधिकृत कर दिया है, श्मशान और निकायों में सभी श्रमिकों के लिए निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई) दिए गए हैं।

वहीं शवदाह गृहों में कार्य अवधि सुबह सात बजे से रात 10 बजे कर दी गई है। पीठ ने इसके बाद दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगम को विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 2 जून को तय कर दी।

हाईकोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान

न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति आशा मेनन की पीठ ने खबरों का संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को कहा था कि एलएनजेपी अस्पताल में कोविड-19 के शवगृह में 108 शव हैं, जिनमें से 28 फर्श पर एक-दूसरे के ऊपर ही पड़े हैं क्योंकि केवल 80 शव रखे जाने की ही व्यवस्था है। अगर हालात ऐसे हैं तो यह बेहद असंतोषजनक और मृतक के अधिकारों का उल्लंघन है।  

पीठ ने पाया कि कोविड-19 के मरीजों के लिए यह शहर का सबसे बड़ा अस्पताल है और इसके शवगृह में कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों अथवा संक्रमण के संदिग्ध मरीजों के शव रखे गए हैं। पीठ ने इस पर भी गौर किया कि 26 मई को निगम बोध घाट से आठ शवों को लौटा दिया गया था क्योंकि वहां आठ सीएनजी शवदाह गृहों में से दो ही काम कर रहे थे।

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