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बुजुर्ग वकीलों के फिजिकल रूप से पेश न होने पर प्रतिकूल आदेश पारित न करने का निर्देश
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने जिला अदालतों को सुनवाई के दौरान वकीलों के फिजिकल रूप से पेश न होने पर कोई प्रतिकूल आदेश पारित न करने का निर्देश दिया है। कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए फिजिकल रूप से पेशी की अपेक्षा निचली अदालतों में हाइब्रिड सुनवाई की मांग वाली याचिका पर कोर्ट ने दिया है। याचिका निचली अदालत में प्रैक्टिस करने वाले बुजुर्ग वकीलों ने दायर की है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा फिजिकल रूप से जिला अदालतों में पेश होने में असमर्थता व्यक्त करने वाले वकीलों के मामले में संबंधित अदालत कोई भी प्रतिकूल आदेश पारित न करे। कोर्ट को बताया गया कि वकीलों के पेश न होने की स्थिति में प्रतिकूल आदेश पारित किए जा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक श्रेणी में आने वाले वकीलों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए जा रहे हैं।
अदालत ने कहा अधीनस्थ अदालतों के कामकाज के मौजूदा तरीके और हाइब्रिड सुनवाई कराने के लिए उनके पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर के संबंध में पेश रिपोर्ट विस्तृत है। ऐसे में वे रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद मामले की सुनवाई 4 मार्च को करेंगी। याची ने तर्क रखा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस आयु में उनका व्यक्तिगत रुप से पेश होना संभव नहीं है और तय नियमों में वृद्धों को पेशी से छूट मिलनी चाहिए।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा फिजिकल रूप से जिला अदालतों में पेश होने में असमर्थता व्यक्त करने वाले वकीलों के मामले में संबंधित अदालत कोई भी प्रतिकूल आदेश पारित न करे। कोर्ट को बताया गया कि वकीलों के पेश न होने की स्थिति में प्रतिकूल आदेश पारित किए जा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक श्रेणी में आने वाले वकीलों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए जा रहे हैं।
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अदालत ने कहा अधीनस्थ अदालतों के कामकाज के मौजूदा तरीके और हाइब्रिड सुनवाई कराने के लिए उनके पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर के संबंध में पेश रिपोर्ट विस्तृत है। ऐसे में वे रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद मामले की सुनवाई 4 मार्च को करेंगी। याची ने तर्क रखा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस आयु में उनका व्यक्तिगत रुप से पेश होना संभव नहीं है और तय नियमों में वृद्धों को पेशी से छूट मिलनी चाहिए।
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