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नर्सों को पीपीई किट्स और मास्क न मिलने पर सरकारी अधिकारी तलब
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में नर्सों को पर्याप्त पीपीई किट्स और मास्क न दिए जाने के विरोध में दायर जनहित याचिका पर केन्द्र और दिल्ली सरकार के संबंधित अधिकारियों को तलब किया है। वहीं, पीठ ने कोरोना वायरस के रोगियों के इलाज के कारण मृत्यु होने पर कर्मियों को अनुग्रह राशि देने के सुझाव पर विचार करने के लिए कहा है। मामले में अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए याचिका पर संज्ञान लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने केन्द्र और दिल्ली सरकार के संबंधित अधिकारियों को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। पीठ ने दिल्ली सरकार से इस सुझाव पर भी जवाब मांगा कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को नर्सों को निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट, एन-95 मास्क प्रदान करने के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष एक हलफनामा दायर करना चाहिए।
यह जनहित याचिका एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) डिस्ट्रेस मैनेजमेंट कलेक्टिव के वकील मनोज वी जॉर्ज की ओर से दायर की गई। याचिका में छह बिंदुओं पर सुझाव दिए गए और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में नर्सों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए पीपीई किट तथा मास्क मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं।
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याचिका के आधार पर दिल्ली सरकार को हेल्पलाइन, अनुग्रह राशि और हलफनामा के अलावा इन सुझावों पर भी जवाब देना है कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में काम करने वाली नर्सों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (पीएमजीकेपी) बीमा सुरक्षा का लाभ दिया जाए तथा कोविड-19 महामारी की स्थिति के दौरान बीमा प्रीमियम का भुगतान अधिकारियों द्वारा किया जाए।
इसके साथ ही याचिका में सुझाव दिया कि नर्सों को पृथकवास सुविधा प्रदान की जानी चाहिए और एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए ताकि नर्सें उनसे अपनी शिकायतें कर सकें और अधिकारी उन मुद्दों को सरकार के सामने उठा सकें।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए याचिका पर संज्ञान लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने केन्द्र और दिल्ली सरकार के संबंधित अधिकारियों को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। पीठ ने दिल्ली सरकार से इस सुझाव पर भी जवाब मांगा कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को नर्सों को निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट, एन-95 मास्क प्रदान करने के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष एक हलफनामा दायर करना चाहिए।
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यह जनहित याचिका एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) डिस्ट्रेस मैनेजमेंट कलेक्टिव के वकील मनोज वी जॉर्ज की ओर से दायर की गई। याचिका में छह बिंदुओं पर सुझाव दिए गए और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में नर्सों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए पीपीई किट तथा मास्क मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं।
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याचिका के आधार पर दिल्ली सरकार को हेल्पलाइन, अनुग्रह राशि और हलफनामा के अलावा इन सुझावों पर भी जवाब देना है कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में काम करने वाली नर्सों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (पीएमजीकेपी) बीमा सुरक्षा का लाभ दिया जाए तथा कोविड-19 महामारी की स्थिति के दौरान बीमा प्रीमियम का भुगतान अधिकारियों द्वारा किया जाए।
इसके साथ ही याचिका में सुझाव दिया कि नर्सों को पृथकवास सुविधा प्रदान की जानी चाहिए और एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए ताकि नर्सें उनसे अपनी शिकायतें कर सकें और अधिकारी उन मुद्दों को सरकार के सामने उठा सकें।