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स्कूल के लिए निशुल्क जमीन मिलने के बावजूद निर्णय न लेने पर हाईकोर्ट हैरान
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय स्कूल बनने के लिए सरकार को निशुल्क भूमि प्रदान करने का आग्रह करने वाली ‘अद्वितीय’ याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने निशुल्क भूमि मिलने के बावजूद निर्णय न लेने पर सरकार के रवैये पर हैरानी जताई है। याची का आरोप है कि उसने करीब एक वर्ष पहले इस मुद्दे पर सरकार को पत्र लिखा था। बावजूद अभी तक सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता एक अनोखी प्रार्थना के साथ आए हैं। वे एक निजी भूमि पर सरकार को अपना अधिकार देना चाहते हैं। इसलिए अधिकारी इस याचिका पर शीघ्रता से विचार करेंगे। अदालत ने सरकार को 30 अप्रैल से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मंसाराम नामक एक व्यक्ति के दो पुत्र एवं एक पुत्री ने दायर अपनी याचिका में कहा है कि वे उत्तर पूर्वी दिल्ली के करावल नगर में 5000 वर्ग गज भूखंड का स्वामित्व विद्यालय के निर्माण के लिए दिल्ली सरकार को देना चाहते हैं। याची के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किलों ने जमीन का स्वामित्व देने के लिए जून 2019 में ही सरकार के पास अनुरोध पत्र भेजा था लेकिन अधिकारियों ने उनके अनुरोध पत्र पर कोई निर्णय नहीं किया।
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उन्होंने कहा कि मंसाराम की 2009 में मृत्यु हो गई थी और उनकी तीनों संतानें उनकी कानूनी उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बिना शर्त उस जमीन को सरकार को माध्यमिक विद्यालय के निर्माण के लिए देना चाहते हैं ताकि इलाके के बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा वर्तमान में यह जमीन खाली पड़ी है और इलाके के असामाजिक तत्व उसका बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को जमीन लेकर स्कूल का निर्माण करवाने का निर्देश दिया जाए।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता एक अनोखी प्रार्थना के साथ आए हैं। वे एक निजी भूमि पर सरकार को अपना अधिकार देना चाहते हैं। इसलिए अधिकारी इस याचिका पर शीघ्रता से विचार करेंगे। अदालत ने सरकार को 30 अप्रैल से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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मंसाराम नामक एक व्यक्ति के दो पुत्र एवं एक पुत्री ने दायर अपनी याचिका में कहा है कि वे उत्तर पूर्वी दिल्ली के करावल नगर में 5000 वर्ग गज भूखंड का स्वामित्व विद्यालय के निर्माण के लिए दिल्ली सरकार को देना चाहते हैं। याची के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किलों ने जमीन का स्वामित्व देने के लिए जून 2019 में ही सरकार के पास अनुरोध पत्र भेजा था लेकिन अधिकारियों ने उनके अनुरोध पत्र पर कोई निर्णय नहीं किया।
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उन्होंने कहा कि मंसाराम की 2009 में मृत्यु हो गई थी और उनकी तीनों संतानें उनकी कानूनी उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बिना शर्त उस जमीन को सरकार को माध्यमिक विद्यालय के निर्माण के लिए देना चाहते हैं ताकि इलाके के बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा वर्तमान में यह जमीन खाली पड़ी है और इलाके के असामाजिक तत्व उसका बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को जमीन लेकर स्कूल का निर्माण करवाने का निर्देश दिया जाए।