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सीबीएसई: 12वीं की परीक्षा रद्द होने से बच्चों-अभिभावकों में खुशी, बोले- दूर हुआ मानसिक तनाव 

Tue, 01 Jun 2021 11:51 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 01 Jun 2021 11:51 PM IST
सार

बारहवीं के छात्र जय वर्मा कहते हैं कि परीक्षा रद्द होने के फैसले से वह काफी खुश हैं। यह समझ नहीं आ रहा था कि परीक्षा होगी या नहीं। इसको लेकर अलग तनाव था। फिर आगे की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी नहीं हो पा रही थी।

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Happiness among children and parents due to cancellation of CBSE class 12 examination
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा रद्द होने से बच्चे व अभिभावक काफी राहत महसूस कर रहे हैं। परीक्षाओं पर बनी असमंजसता के कारण बीते काफी दिनों से बच्चे व अभिभावक काफी तनाव में थे। परीक्षाएं रद्द करने को लेकर बीते अप्रैल से ट्विटर पर अभियान भी चलाया जा रहा था। अब परीक्षाएं रद्द होने पर बच्चों व अभिभावकों का कहना है कि उनका मानसिक तनाव दूर हो गया है। बच्चों को यह समझ ही नहीं आ रहा था कि वह पढ़ाई करें या नहीं।

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बारहवीं के छात्र अखिल प्रताप कहते हैं कि परीक्षा रद्द होने से वह काफी राहत महसूस कर रहे हैं। दरअसल मई के मध्य में उनके पड़ोस में कुछ लोगों को कोरोना हो गया था। तब से उनमें डर बैठ गया था और वह पढ़ाई पर ध्यान भी नहीं लगा पा रहे थे। उनके परिजन भी चाहते थे कि किसी तरह से परीक्षा रद्द हो जाएं, क्योंकि वह इन दिनों काफी मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। हालांकि, अब उनकी चिंता इस बात को लेकर भी है कि बोर्ड मूल्यांकन के लिए क्या और कब तक फॉर्मूला बनाएगा।
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बारहवीं के छात्र जय वर्मा कहते हैं कि परीक्षा रद्द होने के फैसले से वह काफी खुश हैं। यह समझ नहीं आ रहा था कि परीक्षा होगी या नहीं। इसको लेकर अलग तनाव था। फिर आगे की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी नहीं हो पा रही थी। दिसंबर-जनवरी के बाद से तो ठीक से पढ़ाई हो ही नहीं रही थी फिर कोरोना के मामले बढने लगे थे। मार्च से थोड़ी पढ़ाई शुरू की फिर अप्रैल में परीक्षा स्थगित होने की घोषणा हो गई। तब से समझ नहीं आ रहा था कि परीक्षा की तैयारी करनी है या नहीं। 
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अभिभावक रजनी छिब्बर ने भी परीक्षा रद्द करने के फैसले का स्वागत किया है। वह कहती हैं कि जिंदगी से ज्यादा जरूरी स्कोर नहीं हो सकते हैं। हम महामारी के इस दौर में परीक्षा देने के लिए भेजकर बच्चों की जिंदगी को खतरे में नहीं डाल सकते थे। अब कम से कम बच्चों का ध्यान एक तरफ केंद्रित हो पाएगा। अब वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए फोकस कर पाएंगे।


पटेल नगर स्थित एसडी पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल मिनाक्षी गुप्ता ने कहा कि इस फैसले से बच्चे काफी राहत महसूस कर रहे हैं। अभिभावक इस बात को लेकर भी चिंतित थे कि यदि परीक्षा हुई तो वह बच्चों को कैसे भेज पाएंगे। यह फैसला बिल्कुल बच्चों के हित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालांकि जिन बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए विदेशों में जाना है वह थोड़े तनाव में आ गए हैं कि मूल्यांकन कब और कैसे होगा।

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