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दिल्ली : फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, दो मालिकों समेत 15 गिरफ्तार
Sun, 10 Oct 2021 06:40 AM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, नवी दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नवी दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 06:40 AM IST
सार
इनमें नौ महिलाएं शामिल हैं। आरोपी बजाज फिनसर्व के नाम से लोन देने का झांसा देकर ठगी करते थे और अब तक हजारों लोगों को शिकार बना चुके हैं।
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गिरफ्त में आरोपी...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दक्षिण पश्चिम जिला की वाहन चोरी निरोधक शाखा ने सागरपुर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा करते हुए दो मालिकों समेत 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें नौ महिलाएं शामिल हैं। आरोपी बजाज फिनसर्व के नाम से लोन देने का झांसा देकर ठगी करते थे और अब तक हजारों लोगों को शिकार बना चुके हैं।
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जिला पुलिस उपायुक्त गौरव शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार मालिकों की पहचान सागरपुर निवासी प्रिंस और कुतुब विहार निवासी राहुल के रूप में हुई है। तीन पाटर्नर इस फर्जी कॉल सेंटर को चलाते थे। एक मालिक फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। सात अक्तूबर को पुलिस को सागरपुर में आरवीके टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से फर्जी कॉल सेंटर के चलने की जानकारी मिली थी, जिसमें लोगों को बजाज फिनसर्व के नाम पर सात फीसदी ब्याज पर व्यक्तिगत लोन देने का झांसा दिया जाता था। सूचना को पुख्ता करने के बाद पुलिस ने छापा मारकर 15 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मौके से 14 मोबाइल फोन, मैसेज के लिए इस्तेमाल एक मोबाइल फोन, एक नोट पैड जिस पर पीड़ितों का विवरण रखते थे, एक डेस्कटॉप, लोन स्वीकृति के फर्जी कागजात और एक रजिस्टर बरामद किया है।
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दसवीं और बारहवीं पास चला रहे थे कॉल सेंटर
कॉल सेंटर के मालिक प्रिंस ने बताया कि वह 10वीं तक पढ़ा है। वर्ष 2016 में जनकपुरी स्थित एक कॉल सेंटर में काम करता था। उसका एक टीम लीडर था जो लोन देने के नाम पर ठगी करता था। हैदराबाद पुलिस ने कॉल सेंटर पर छापा मारा और मालिक अमरचंद केसरी को गिरफ्तार कर लिया। इस वजह से सेंटर बंद हो गया। फिर 2020 में एकांत, राहुल और सन्नी के खोले गए एक कॉल सेंटर मे वह कॉलिंग एजेंट के रूप में काम करने लगा। पांच महीने तक काम करने के बाद सन्नी से उसकी लड़ाई हो गई और उसने काम छोड़ दिया।
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लोन और बीमा प्रक्रिया के सारे गुर सीखने के बाद उन लोगों ने मार्च 2021 में सागरपुर में कॉल सेंटर खोला। राहुल ने 12वीं तक पढ़ाई की है। 2011 में उसने द्वारका कोर्ट में मुंशी का काम शुरू किया। कम वेतन के कारण तीन महीने में नौकरी छोड़ दी। इसके बाद मायापुरी में एक कॉल सेंटर में तीन साल तक टेली कॉलर का काम किया। वर्ष 2020 में वह स्कूल के दोस्त एकांत के संपर्क में आया और उसके कॉल सेंटर में काम करने लगा। बाद में उसने राहुल, प्रिंस और एक अन्य सहयोगी के साथ अपना फर्जी कॉल सेंटर खोला।
ऐसे करते थे ठगी
टेलीकॉलर किसी भी नंबर पर लोन का मैसेज भेजते थे। इच्छुक ग्राहकों के बात करने पर उनके सभी विवरण जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड, बीते 6 महीने की वेतन की जानकारी, बैंक स्टेटमेंट व अन्य सूचनाएं मांगते थे। फिर आरोपी पीड़ितों को बजाज फिनसर्व के नाम ने नकली लोन समझौता भेजते थे। पीड़ितों को लोन के सफलतापूर्वक स्वीकृति का एक मैसेज भी भेजते थे। इस दौरान स्वीकृत लोन की बीमा राशि के लिए दो से तीन फीसदी जमा करने के लिए कहते थे।