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एम्स से 13.80 करोड़ धोखाधड़ी में फर्म की मालकिन गिरफ्तार
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नई दिल्ली। एम्स के नेत्र चिकित्सा केंद्र में सामान की फर्जी आपूर्ति दिखाकर अपने खाते में 13.80 करोड़ रुपये मंगाने वाली फर्म की मालकिन पीतमपुरा निवासी स्नेह रानी गुप्ता (59) को आर्थिक अपराध शाखा ने शुक्रवार को गिरफ्तार किया है।
शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि मामले की शिकायत एम्स के राजेंद्र प्रसाद नेत्र चिकित्सा केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अनूप डागा ने सितंबर माह में दी शिकायत में कहा था कि चिकित्सा सामान की फर्जी आपूर्ति दिखाकर एम्स के खाते से पांच करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यह रकम मैसर्स स्नेह इंटरप्राइजेज के बैंक खाते में गई है। रिपोर्ट दर्ज कर जांच में पुलिस को घपला पांच करोड़ की बजाय 13.80 करोड़ रुपये का होने की जानकारी मिली।
पता चला कि कंपनी को उस सामान का भुगतान किया गया, जिसकी अस्पताल में आपूर्ति ही नहीं की गई है। हालांकि कंपनी ने गाड़ियों के जरिये सामान की एम्स में आपूर्ति करना दिखाया था। जांच में पता चला कि जिन गाड़ियों से सामान की आपूर्ति दिखाई गई, वे कभी एम्स में आई ही नहीं। जीपीएस जांच में भी उस तिथि में गाड़ी की लोकेशन दिल्ली से बाहर मिली। कंपनी कई साल से एम्स में सामान की सप्लाई कर रही है और उसने कर्मियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया।
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जांच में पता चला कि कंपनी ने सप्लाई ऑर्डर के बदले बिना सामान आपूर्ति किए बिल जारी किए। एम्स के कर्मचारियों ने बिना अधिकृत अधिकारियों को जानकारी दिए इसे मंजूरी दी। कंपनी के फर्जी बिलों के आधार पर मैसर्स स्नेह इंटरप्राइजेज के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए।
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शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि मामले की शिकायत एम्स के राजेंद्र प्रसाद नेत्र चिकित्सा केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अनूप डागा ने सितंबर माह में दी शिकायत में कहा था कि चिकित्सा सामान की फर्जी आपूर्ति दिखाकर एम्स के खाते से पांच करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यह रकम मैसर्स स्नेह इंटरप्राइजेज के बैंक खाते में गई है। रिपोर्ट दर्ज कर जांच में पुलिस को घपला पांच करोड़ की बजाय 13.80 करोड़ रुपये का होने की जानकारी मिली।
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पता चला कि कंपनी को उस सामान का भुगतान किया गया, जिसकी अस्पताल में आपूर्ति ही नहीं की गई है। हालांकि कंपनी ने गाड़ियों के जरिये सामान की एम्स में आपूर्ति करना दिखाया था। जांच में पता चला कि जिन गाड़ियों से सामान की आपूर्ति दिखाई गई, वे कभी एम्स में आई ही नहीं। जीपीएस जांच में भी उस तिथि में गाड़ी की लोकेशन दिल्ली से बाहर मिली। कंपनी कई साल से एम्स में सामान की सप्लाई कर रही है और उसने कर्मियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया।
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जांच में पता चला कि कंपनी ने सप्लाई ऑर्डर के बदले बिना सामान आपूर्ति किए बिल जारी किए। एम्स के कर्मचारियों ने बिना अधिकृत अधिकारियों को जानकारी दिए इसे मंजूरी दी। कंपनी के फर्जी बिलों के आधार पर मैसर्स स्नेह इंटरप्राइजेज के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए।