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महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ पंजाबी बाग थाने में मामला हुआ दर्ज
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नई दिल्ली। पंजाबी बाग स्थित महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कोरोना मरीज को लेकर लापरवाही बरतने के आरोप में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामला रोहतक हरियाणा निवासी एक महिला के इलाज में लापरवाही तथा उससे दूसरे मरीज को हुए संक्रमण के बाद मौत से जुड़ा है। इतना ही नहीं, अस्पताल ने मरीज की मौत के बाद उसका शव परिजनों को सौंप दिया जिससे उसका बेटा भी कोरोना पॉजिटिव हो गया। अस्पताल प्रशासन ने प्रशासन को सूचना दिए शव परिवार को सौंपा था। इन बातों का खुलासा होने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर सरकारी आदेश का उल्लंघन, महामारी अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के मुताबिक 10 मार्च को अस्पताल में रोहतक निवासी 72 वर्षीय महिला को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। बाद में उसे गंगाराम अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां यह महिला कोरोना पॉजिटिव निकली। इसके बाद सीडीएमओ वेस्ट के आदेश पर महिला मरीज के संपर्क में आए अस्पताल के 82 कर्मचारियों का टेस्ट करवाया गया तो उनमें से छह पॉजिटिव मिले। इसके अलावा उसी वार्ड में भर्ती एक मरीज खिलाराम भी कोरोना पाजिटिव हो गया। चार अप्रैल को उसकी मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बिना हेल्थ डिपार्टमेंट को सूचना दिए खिलाराम का शव उसके परिवार को सौंप दिया। परिवार ने उसके शव का गांव ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जब प्रशासन को इसकी जानकारी हुई तो मामले की जांच के आदेश दिए गए। जांच के बाद अस्पताल प्रशासन की भारी लापरवाही पाई गई।
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पुलिस के मुताबिक 10 मार्च को अस्पताल में रोहतक निवासी 72 वर्षीय महिला को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। बाद में उसे गंगाराम अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां यह महिला कोरोना पॉजिटिव निकली। इसके बाद सीडीएमओ वेस्ट के आदेश पर महिला मरीज के संपर्क में आए अस्पताल के 82 कर्मचारियों का टेस्ट करवाया गया तो उनमें से छह पॉजिटिव मिले। इसके अलावा उसी वार्ड में भर्ती एक मरीज खिलाराम भी कोरोना पाजिटिव हो गया। चार अप्रैल को उसकी मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बिना हेल्थ डिपार्टमेंट को सूचना दिए खिलाराम का शव उसके परिवार को सौंप दिया। परिवार ने उसके शव का गांव ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जब प्रशासन को इसकी जानकारी हुई तो मामले की जांच के आदेश दिए गए। जांच के बाद अस्पताल प्रशासन की भारी लापरवाही पाई गई।
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