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टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान
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नई दिल्ली। राजधानी में प्रवेश की अनुमति मिलने के बावजूद शनिवार को हजारों किसान टिकरी और सिंघु बॅार्डर डटे रहे और यहीं से आंदोलन जारी रखने का एलान किया। किसान रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की जिद पर अड़े हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने बुराड़ी के निरंकारी मैदान के अलावा कहीं भी जाने की इजाजत देने के इंकार किया है। शुक्रवार को पुलिस ने किसानों को निरंकारी मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी थी। इसके बाद कुछ किसान वहां पहुंच भी गए, लेकिन आंदोलन को कमजोर करने की साजिश करार देकर बाकी किसानों ने बॉर्डर पर ही डटे रहने का फैसला किया। उधर, अलग-अलग राज्यों से भी किसानों के जत्थे दिल्ली पहुंच रहे हैं। इसके मद्देनजर राजधानी के सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया। बिना जांच के किसी भी वाहन को दिल्ली की सीमा में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। दोपहर बाद गाजियाबाद सहित यूपी के अन्य जिलों से किसान एनएच-9 पुल के नीचे गाजीपुर बॉर्डर पर यूपी की ओर धरने पर बैठ गए। किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में ‘दिल्ली चलो’ मार्च का आह्वान किया है।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोरोना की वजह से किसानों को राजधानी में प्रदर्शन करने से रोका जा रहा था। वे रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की जिद पर अड़े हैं। ऐसे में यह फैसला लिया कि निरंकारी मैदान में शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को दिनभर मनाते रहे, लेकिन वे नहीं माने। निरंकारी मैदान में किसानों की सुविधा के लिए प्रशासन-पुलिस ने पूरे इंतजाम किए हैं। पुलिस के अलावा अतिरिक्त सुरक्षा बलों की कई कंपनियों को वहां तैनात किया गया है। टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर किसान हरियाणा की ओर बैठे हैं। एहतियात के तौर पर दोनों बॉर्डर पर पुलिस फोर्स व अतिरिक्त सुरक्षा बलों का भारी बंदोबस्त किया गया है।
किसी कीमत पर नहीं जाएंगे बुराड़ी
भाकियू (राजेवाला) के अध्यक्ष बलबीर सिंह ने कहा कि अभी हमने बुराड़ी जाने का फैसला नहीं किया है। सभी संगठनों से बैठक कर सहमति बनने पर ही आगे का फैसला लेंगे। पंजाब के किसानों के सबसे बड़े संगठन भाकियू (एकता-उग्रहण) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठुके ने भी कहा है कि किसान किसी कीमत पर बुराड़ी नहीं जाएंगे। हमने केंद्र सरकार से मांग की है कि उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जगह दी जाए। उन्होंने कहा हम दिल्ली के नजदीक हैं और ट्रैफिक की वजह से अटके हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं सहित एक लाख से अधिक किसान मार्च में शामिल हैं।
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संसद घेराव की चेतावनी
किसानों का कहना है कि उनकी मांगों को नहीं मना गया तो वह संसद का घेराव करेंगे। इसके अलावा पूरी दिल्ली को ब्लॉक कर दिया जाएगा। पुलिस उनको ऐसा नहीं करने देगी तो वह तब बॉर्डर पर डेरा डाले रखेंगे जब तक सरकार किसान विरोधी बिलों को वापस नहीं लेती। किसानों का कहना था कि वह छह माह का राशन अपने साथ ट्रैक्टर ट्रॅाली में लेकर चले हैं। जरूरत पड़ेगी तो और राशन को मंगवा लेंगे।
करीब 700 किसान पहुंचे बुराड़ी
निरंकार मैदान में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, यूपी और महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों के करीब 600 किसान डटे हुए हैं। पुलिस सभी से मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की गुजारिश कर रही है। सूत्रों का कहना है कि टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों से दिल्ली व हरियाणा पुलिस मिलकर उन्हें मनाने की कोशिश कर रही है। वहीं, गाजीपुर में देर शाम तक 100 से 150 किसान पुल के नीचे बैठे थे।
दिल्ली में प्रवेश की हर सीमा पर कड़ी सुरक्षा
अन्य राज्यों से किसानों के राजधानी पहुंचने की सूचना मिलने के बाद, टिकरी व सिंघु बॉर्डर के अलावा दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर, दिल्ली-फरीदाबाद बॉर्डर, कापसहेड़ा बॉर्डर, ढांसा बॉर्डर, कालिंदी कुंज, मयूर विहार-चिल्ला बॉर्डर, डीएनडी, आनंद विहार, नोएडा-मयूर विहार बॉर्डर, सीमापुरी, भोपुरा, लोनी समेत अन्य सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं जंतर-मंतर और रामलीला मैदान समेत अन्य जगहों पर स्थानीय पुलिस के साथ अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है।
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इतिहास में किसानों की सबसे बड़ी गोलबंदी : एआईकेएससीसी
नई दिल्ली। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने दावा किया है कि इतिहास में किसानों की अब तक की सबसे बड़ी गोलबंदी है। एआईकेएससीसी, आरकेएमएस, भाकियू (राजेवाल), भाकियू (चढ़ूनी) व अन्य किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह किसानों की समस्याओं का समाधान करे। सभी संघर्षरत किसान संगठनों ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा है कि लाखों किसान पुलिस द्वारा दमन करने व रास्ते में भारी बाधाएं डालने के बावजूद दिल्ली की ओर बढ़ते जा रहे हैं। किसानों की टोलियां दिल्ली की सीमाओं से 80 किमी दूर तक खड़ी हैं। केंद्र सरकार किसानों से बातचीत का महज दिखावा कर रही है। किसान तब तक दिल्ली में रुकने के लिए प्रतिबद्ध हैं जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जातीं।
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जाम से परेशान हुए लोग, मेट्रो ने दी राहत
सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर किसानों के डटे रहने से आवागमन पूरी तरह ठप रहा। मुकरबा चौक से जीटी करनाल रोड की तरफ जाने वाले वाहनों को रिंग रोड और आजादपुर की तरफ डायवर्ट किया गया था। इससे दूसरे रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ा और लोगों को जगह-जगह जाम का सामना करना पड़ा। झाड़ौदा, ढांसा, दौराला, झटीकरा, बडोसराय, कापसहेड़ा, राजोकरी एनएच-8, बिजवासन और पालम विहार के लोगों को हरियाणा जाने में परेशानी हुई। हालांकि दो दिन बाद शनिवार को एनसीआर के शहरों को जोड़ने वाली मेट्रो सेवाएं सामान्य रहीं। सबसे ज्यादा सहूलियत बहादुरगढ़ मेट्रो के यात्रियों को मिली। किसान आंदोलन की वजह से टिकरी बॉर्डर बंद होने से मुसाफिर मेट्रो की तरफ डायवर्ट हुए। इससे लोगों को जाम में नहीं फंसना पड़ा।
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दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोरोना की वजह से किसानों को राजधानी में प्रदर्शन करने से रोका जा रहा था। वे रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की जिद पर अड़े हैं। ऐसे में यह फैसला लिया कि निरंकारी मैदान में शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को दिनभर मनाते रहे, लेकिन वे नहीं माने। निरंकारी मैदान में किसानों की सुविधा के लिए प्रशासन-पुलिस ने पूरे इंतजाम किए हैं। पुलिस के अलावा अतिरिक्त सुरक्षा बलों की कई कंपनियों को वहां तैनात किया गया है। टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर किसान हरियाणा की ओर बैठे हैं। एहतियात के तौर पर दोनों बॉर्डर पर पुलिस फोर्स व अतिरिक्त सुरक्षा बलों का भारी बंदोबस्त किया गया है।
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किसी कीमत पर नहीं जाएंगे बुराड़ी
भाकियू (राजेवाला) के अध्यक्ष बलबीर सिंह ने कहा कि अभी हमने बुराड़ी जाने का फैसला नहीं किया है। सभी संगठनों से बैठक कर सहमति बनने पर ही आगे का फैसला लेंगे। पंजाब के किसानों के सबसे बड़े संगठन भाकियू (एकता-उग्रहण) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठुके ने भी कहा है कि किसान किसी कीमत पर बुराड़ी नहीं जाएंगे। हमने केंद्र सरकार से मांग की है कि उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जगह दी जाए। उन्होंने कहा हम दिल्ली के नजदीक हैं और ट्रैफिक की वजह से अटके हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं सहित एक लाख से अधिक किसान मार्च में शामिल हैं।
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संसद घेराव की चेतावनी
किसानों का कहना है कि उनकी मांगों को नहीं मना गया तो वह संसद का घेराव करेंगे। इसके अलावा पूरी दिल्ली को ब्लॉक कर दिया जाएगा। पुलिस उनको ऐसा नहीं करने देगी तो वह तब बॉर्डर पर डेरा डाले रखेंगे जब तक सरकार किसान विरोधी बिलों को वापस नहीं लेती। किसानों का कहना था कि वह छह माह का राशन अपने साथ ट्रैक्टर ट्रॅाली में लेकर चले हैं। जरूरत पड़ेगी तो और राशन को मंगवा लेंगे।
करीब 700 किसान पहुंचे बुराड़ी
निरंकार मैदान में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, यूपी और महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों के करीब 600 किसान डटे हुए हैं। पुलिस सभी से मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की गुजारिश कर रही है। सूत्रों का कहना है कि टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों से दिल्ली व हरियाणा पुलिस मिलकर उन्हें मनाने की कोशिश कर रही है। वहीं, गाजीपुर में देर शाम तक 100 से 150 किसान पुल के नीचे बैठे थे।
दिल्ली में प्रवेश की हर सीमा पर कड़ी सुरक्षा
अन्य राज्यों से किसानों के राजधानी पहुंचने की सूचना मिलने के बाद, टिकरी व सिंघु बॉर्डर के अलावा दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर, दिल्ली-फरीदाबाद बॉर्डर, कापसहेड़ा बॉर्डर, ढांसा बॉर्डर, कालिंदी कुंज, मयूर विहार-चिल्ला बॉर्डर, डीएनडी, आनंद विहार, नोएडा-मयूर विहार बॉर्डर, सीमापुरी, भोपुरा, लोनी समेत अन्य सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं जंतर-मंतर और रामलीला मैदान समेत अन्य जगहों पर स्थानीय पुलिस के साथ अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है।
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इतिहास में किसानों की सबसे बड़ी गोलबंदी : एआईकेएससीसी
नई दिल्ली। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने दावा किया है कि इतिहास में किसानों की अब तक की सबसे बड़ी गोलबंदी है। एआईकेएससीसी, आरकेएमएस, भाकियू (राजेवाल), भाकियू (चढ़ूनी) व अन्य किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह किसानों की समस्याओं का समाधान करे। सभी संघर्षरत किसान संगठनों ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा है कि लाखों किसान पुलिस द्वारा दमन करने व रास्ते में भारी बाधाएं डालने के बावजूद दिल्ली की ओर बढ़ते जा रहे हैं। किसानों की टोलियां दिल्ली की सीमाओं से 80 किमी दूर तक खड़ी हैं। केंद्र सरकार किसानों से बातचीत का महज दिखावा कर रही है। किसान तब तक दिल्ली में रुकने के लिए प्रतिबद्ध हैं जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जातीं।
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जाम से परेशान हुए लोग, मेट्रो ने दी राहत
सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर किसानों के डटे रहने से आवागमन पूरी तरह ठप रहा। मुकरबा चौक से जीटी करनाल रोड की तरफ जाने वाले वाहनों को रिंग रोड और आजादपुर की तरफ डायवर्ट किया गया था। इससे दूसरे रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ा और लोगों को जगह-जगह जाम का सामना करना पड़ा। झाड़ौदा, ढांसा, दौराला, झटीकरा, बडोसराय, कापसहेड़ा, राजोकरी एनएच-8, बिजवासन और पालम विहार के लोगों को हरियाणा जाने में परेशानी हुई। हालांकि दो दिन बाद शनिवार को एनसीआर के शहरों को जोड़ने वाली मेट्रो सेवाएं सामान्य रहीं। सबसे ज्यादा सहूलियत बहादुरगढ़ मेट्रो के यात्रियों को मिली। किसान आंदोलन की वजह से टिकरी बॉर्डर बंद होने से मुसाफिर मेट्रो की तरफ डायवर्ट हुए। इससे लोगों को जाम में नहीं फंसना पड़ा।