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परिवार ने तीनों के नेत्रदान का किया फैसला

Tue, 11 Feb 2020 01:45 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 11 Feb 2020 01:45 AM IST
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eye donation
नई दिल्ली। शालीमार बाग में दो बच्चों की गला घोंटकर हत्या के बाद पिता के खुदकुशी करने की दिल दहला देने वाली घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बाबू जगजीवन राम अस्पताल में सोमवार को उस समय सभी की आंखें नम हो र्गईं, जब दो मासूमों और उनके पिता के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिवार को सौंपा गया। पोस्टमार्टम से पहले परिवार वालों ने तीनों के नेत्रदान का फैसला किया।
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बीजी ब्लॉक में रहने वाले मधुर मलानी ने रविवार को हैदरपुर मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन के सामने छलांग लगाकर जान दे दी थी। वहीं, उनके छह साल के बेटे श्रेयांश और चौदह साल की बेटी समीक्षा का शव घर में बिस्तर पर पड़ा मिला था। मधुर के पिता दिनेश मलानी ने कहा कि अब उन तीनों की आंखों से दूसरे लोग दुनिया को देख पाएंगे। परिजनों ने बताया कि मधुर हमेशा से ही दूसरों की मदद करने वाला व्यक्ति था। वह सामाजिक कार्यों में आगे रहता था। परिजनों ने तीनों के नेत्रदान करने का फैसला किया।
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अस्पताल में मासूमों के शव देखकर मां रुपाली अपने को रोक नहीं पाईं। बेटा-बेटी और पति को खोने के बाद रुपाली का रो-रोकर बुरा हाल था और वह बार बार कह रही थीं कि उन्हें बच्चों से दूर मत करो। परिवार वाले उनको संभालने में लगे थे। दिनेश मलानी ने बताया कि कारोबार में घाटे की वजह से मधुर डिप्रेशन में था। उनका इलाज भी चल रहा था, लेकिन उन्हें यह विश्वास नहीं हो पा रहा है कि मधुर इतना खौफनाक कदम उठाएगा।
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मोबाइल फोन की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच रिपोर्ट में साफ हो गया है कि बच्चों की हत्या गला घोंटकर की गई, लेकिन पुलिस को मधुर के पास से या फिर घर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। खुदकुशी के दौरान मधुर का फोन टूट गया, लेकिन पुलिस फोन को अपने कब्जे में लेकर जांच में जुटी है। पुलिस फोन की लोकेशन खंगाल रही है। मधुर सोशल मीडिया पर भी सक्रिय थे। पुलिस को अंदेशा है कि अपने रहन सहन को बरकरार नहीं रख पाने की वजह से मधुर मिलानी ने इतना बड़ा कदम उठाया। उनके बच्चे नामी स्कूल में पढ़ते थे। कारोबार में घाटा होने की वजह से वह फीस नहीं दे पा रहे थे, जिसकी वजह से काफी तनाव में आ गए थे।

मोटिवेशनल स्पीच भी सुनते थे
परिवार से पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि मधुर करीब दो साल से बीमार थे और इलाज चल रहा था। उनका रेगमाल का कारोबार था। साथ ही वह ऑनलाइन सेलिंग कंपनी से जुड़े थे। कारोबार में घाटा होने के बाद से वह डिप्रेशन में चले गए थे। इलाज के साथ साथ वह मोटिवेशनल स्पीच भी सुनते थे।
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