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कालकाजी मंदिर : अतिक्रमण हटाने में पुलिस के सहयोग न करने पर नाराजगी जताई

Sun, 07 Nov 2021 12:15 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 07 Nov 2021 12:15 AM IST
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Expressed displeasure over non-cooperation of police in removing encroachment
नई दिल्ली। कालकाजी मंदिर परिसर में अतिक्रमण हटाने और श्रद्धालुओं के प्रबंधन में पुलिस द्वारा सहयोग न करने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 15 नवंबर तय की है।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने हाल ही में कालकाजी मंदिर व उसके आसपास के सभी अवैध निर्माण को हटाने व श्रद्धालुओं के दर्शनों की उचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुलिस अतिक्रमण हटाने और श्रद्धालुओं के प्रबंधन के संबंध में पूरा सहयोग प्रदान नहीं कर रही।
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अदालत ने दिल्ली सरकार के अधिवक्ता संजय लॉ को निर्देश दिया कि वे सरकार से निर्देश लेकर सुनवाई की अगली तारीख पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें। अदालत ने अधिवक्ता लॉ को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया है।
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अदालत ने सितंबर में कालकाजी मंदिर के प्रशासन और रखरखाव के साथ-साथ बारीदारों के बीच अधिकारों से संबंधित विवादों के समाधान के लिए भी कई निर्देश जारी किए थे ताकि मंदिर का कामकाज सुचारु रूप से सुनिश्चित किया जा सके। अदालत ने माना था कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में प्रसाद और दान किए जाने के तरीके को दुरुस्त करने की जरूरत है। अदालत ने निर्देश दिया था कि मंदिर परिसर, परिसर और उसके क्षेत्रों से सभी अतिक्रमण हटाए जाएं।
प्रशासक ने अतिरिक्त खाते की बताई जरूरत
सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक ने पेश अंतरिम रिपोर्ट में कहा कि चढ़ावे के पैसे को ठीक ढंग से रखने के लिए अतिरिक्त बैंक खाता खोलने की जरूरत है। वहीं विभिन्न पक्षों ने अतिरिक्त बैंक खाता खोलने के उक्त आदेश को चुनौती दी है। अदालत के चुनौती को देखते हुए इस मुद्दे पर अगली सुनवाई में विचार करने का निर्णय किया है।

अदालत महंत सुरेंद्र नाथ की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर भी सुनवाई कर रही है। महंत सुरेंद्र नाथ ने मंदिर की जमीन के मालिकाना हक पर उनके निवेदन के संबंध में सितंबर के आदेश की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि यह अधूरा और गलत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने परिसर के सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार और पुनर्विकास के किसी तंत्र का समर्थन नहीं किया बल्कि केवल अतिक्रमण हटाने, मंदिर की सफाई और सफाई और सीवेज बिछाने के लिए सहमति दी है। इसके अलावा उन्होंने कभी भी स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति के लिए सहमति नहीं दी।
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