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बचाव: 'गैस रिसाव हो या बढ़ जाए प्रेशर' विशेषज्ञ ने बताए ऑक्सीजन सिलेंडर प्रयोग करने के तरीके
Fri, 07 May 2021 08:07 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 07 May 2021 08:07 AM IST
सार
विशेषज्ञों का कहना है कि कभी भी क्षतिग्रस्त ऑक्सीजन सिलिंडर न लें। साथ ही अगर रिफिल करते समय सिलिंडर में गैस का रिसाव हो रहा है तो तुरंत उसका प्रयोग बंद कर दें।
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच ऑक्सीजन की मांग भी लगातर बढ़ रही है। होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे कई लोगों ने इस समय अपने घरों में ऑक्सीजन के सिलिंडर रखे हुए हैं। इसके खत्म होने पर दिन-रात कतारों में खडे होकर लोग इन्हें भरवा रहे हैं।
ऐसे में सिलेंडर लाते-ले जाते और उसे भरवाते वक्त कई सावधानियों को बरतने की जरूरत है। थोड़ी से लापरवाही भी घातक साबित हो सकती है। ऑक्सीजन खत्म होने पर इसे बार-बार भरवाने के लिए रिफिल करना जरूरी होता है। यही वजह है कि इसमें रिसाव की संभावना होती है और किसी अनहोनी के चलते इसमें आग भी लग सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कभी भी क्षतिग्रस्त ऑक्सीजन सिलिंडर न लें। साथ ही अगर रिफिल करते समय सिलिंडर में गैस का रिसाव हो रहा है तो तुरंत उसका प्रयोग बंद कर दें। ध्यान दें कि जहां ऑक्सीजन का सिलिंडर रखा है, वहां कोई भी ज्वलनशील वस्तु न रखी हो। साथ ही सिलिंडर को लाते-ले जाते समय उसको जमीन पर न पटकें।
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एम्स के डॉक्टर विक्रम बताते हैं कि कभी भी ऑक्सीजन का स्तर 100% न होने दें, इसे हमेशा 92 और 94 तक ही सीमित रखें। ऑक्सीजन का स्तर इससे ऊपर रखने से भी कोई लाभ नहीं होगा। क्योंकि जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन देने पर मरीज बीमार भी हो सकते हैं। वहीं, जिन मरीजों का ऑक्सीजन स्तर 92 या 94 के बीच है, उन्हें इससे ज्यादा ऑक्सीजन लेने की आवश्यकता नहीं है। जब रक्त में ऑक्सीजन का स्तर 94% से कम हो गया हो, तभी ऑक्सीजन की जरूरत है।
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ऐसे में सिलेंडर लाते-ले जाते और उसे भरवाते वक्त कई सावधानियों को बरतने की जरूरत है। थोड़ी से लापरवाही भी घातक साबित हो सकती है। ऑक्सीजन खत्म होने पर इसे बार-बार भरवाने के लिए रिफिल करना जरूरी होता है। यही वजह है कि इसमें रिसाव की संभावना होती है और किसी अनहोनी के चलते इसमें आग भी लग सकती है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि कभी भी क्षतिग्रस्त ऑक्सीजन सिलिंडर न लें। साथ ही अगर रिफिल करते समय सिलिंडर में गैस का रिसाव हो रहा है तो तुरंत उसका प्रयोग बंद कर दें। ध्यान दें कि जहां ऑक्सीजन का सिलिंडर रखा है, वहां कोई भी ज्वलनशील वस्तु न रखी हो। साथ ही सिलिंडर को लाते-ले जाते समय उसको जमीन पर न पटकें।
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एम्स के डॉक्टर विक्रम बताते हैं कि कभी भी ऑक्सीजन का स्तर 100% न होने दें, इसे हमेशा 92 और 94 तक ही सीमित रखें। ऑक्सीजन का स्तर इससे ऊपर रखने से भी कोई लाभ नहीं होगा। क्योंकि जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन देने पर मरीज बीमार भी हो सकते हैं। वहीं, जिन मरीजों का ऑक्सीजन स्तर 92 या 94 के बीच है, उन्हें इससे ज्यादा ऑक्सीजन लेने की आवश्यकता नहीं है। जब रक्त में ऑक्सीजन का स्तर 94% से कम हो गया हो, तभी ऑक्सीजन की जरूरत है।
ये सावधानियां बरतना जरूरी
-क्षतिग्रस्त ऑक्सीजन सिलेंडर का प्रयोग बिल्कुल न करें
-नोजल खोलते समय बेहद सावधानी बरतें
-भरा सिलेंडर उठाते-रखते समय पटके नहीं
-सिलेंडर प्रयोग करते समय लीकेज की जांच जरूर करें
होम आइसोलेशन मे लापरवाही बरतने पर अन्य लोग भी हो सकते हैं संक्रमित
राजधानी में कोरोना से संक्रमित करीब 50 हजार मरीज इस समय होम आइसोलेशन में हैं। बीते कुछ दिनों में कई हजार मरीज घर पर ही इलाज से स्वस्थ हो चुके हैं, हालांकि कुछ लोगों द्वारा कोविड गाइडलाइन का पालन न किए जाने से पूरे परिवार के संक्रमित होने के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि होम आइसोलेशन में बरती गई लापरवाही पूरे परिवार के लिए घातक साबित हो सकती है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय कुमार का कहना है कि ऐसे संक्रमित व्यक्ति जो आइसोलेशन में रह रहे हैं, लेकिन उनके घर में अलग से शौंचालय व अलग कमरे की व्यवस्था होनी चाहिए। यह लोग 14 दिन तक बाहर आना-जाना न करें।जरूरत की सभी चीजों को कमरे में ही मंगवा लें, और इस दौरान कोरोना के सभी नियमों का पालन करें।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग होम आइसोलेशन में लापरवाही बरत रहें हैं। उन्हें लग रहा है कि उनमें संक्रमण खत्म हो गया है और वह परिवार के अन्य सदस्यों से मिल रहे हैं। इससे पूरा परिवार ही संक्रमण की चपेट में आ रहा है। डॉ. के मुताबिक, ऐसे सभी व्यक्ति जिनके घर में पृथक कमरा, शौचालय आदि नहीं है उन्हें कोविड केंद्रों में क्ववारंटीन होना चाहिए।
-नोजल खोलते समय बेहद सावधानी बरतें
-भरा सिलेंडर उठाते-रखते समय पटके नहीं
-सिलेंडर प्रयोग करते समय लीकेज की जांच जरूर करें
होम आइसोलेशन मे लापरवाही बरतने पर अन्य लोग भी हो सकते हैं संक्रमित
राजधानी में कोरोना से संक्रमित करीब 50 हजार मरीज इस समय होम आइसोलेशन में हैं। बीते कुछ दिनों में कई हजार मरीज घर पर ही इलाज से स्वस्थ हो चुके हैं, हालांकि कुछ लोगों द्वारा कोविड गाइडलाइन का पालन न किए जाने से पूरे परिवार के संक्रमित होने के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि होम आइसोलेशन में बरती गई लापरवाही पूरे परिवार के लिए घातक साबित हो सकती है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय कुमार का कहना है कि ऐसे संक्रमित व्यक्ति जो आइसोलेशन में रह रहे हैं, लेकिन उनके घर में अलग से शौंचालय व अलग कमरे की व्यवस्था होनी चाहिए। यह लोग 14 दिन तक बाहर आना-जाना न करें।जरूरत की सभी चीजों को कमरे में ही मंगवा लें, और इस दौरान कोरोना के सभी नियमों का पालन करें।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग होम आइसोलेशन में लापरवाही बरत रहें हैं। उन्हें लग रहा है कि उनमें संक्रमण खत्म हो गया है और वह परिवार के अन्य सदस्यों से मिल रहे हैं। इससे पूरा परिवार ही संक्रमण की चपेट में आ रहा है। डॉ. के मुताबिक, ऐसे सभी व्यक्ति जिनके घर में पृथक कमरा, शौचालय आदि नहीं है उन्हें कोविड केंद्रों में क्ववारंटीन होना चाहिए।