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Environment Conservation : सूखती धरती पर दिखा उम्मीदों का झरना, पर्यावरण संरक्षण से ही होगा सुधार

Sat, 04 Jun 2022 05:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Jun 2022 05:12 AM IST
सार

कल विश्व पर्यावरण दिवस है। राजधानी में हरियाली का दायरा सिमटने के साथ ही पानी का संकट भी गहराने लगा है। लोगों की जरूरत से अधिक मांग और पानी की बर्बादी के कारण साल-दर-साल धरती की कोख सूख रही है, लेकिन विशेषज्ञों की राय सूखती धरती पर उम्मीद का झरना जैसी नजर आई है। उनका मानना है कि यदि वर्षा जल संचयन और तालाबों को पुनर्जीवित कर दिया जाए तो दिल्ली का जल बजट सुधर सकता है... 

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Environment Conservation: A waterfall of hope on drying earth, only environmental protection will improve
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राजधानी में हर साल औसतन 611.8 मिमी बारिश दर्ज की जाती है। इसमें जुलाई सितंबर तक मानसून के दौरान 533.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड होती है। हालांकि, इसमें पानी का कुछ हिस्सा वाष्प के माध्यम से तो कुछ हिस्सा नालों में बहकर बर्बाद हो जाता है। आपूर्ति के संबंध में केवल 10 फीसदी ही वर्षा जल उपयोग में लाया जाता है। ऐसे में दिल्ली में वर्षा जल संचयन को लेकर काम करने की अधिक आवश्यकता है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय में भूगर्भ शास्त्र के प्रोफेसर शशांक शेखर कहते हैं, दिल्ली में पानी की आपूर्ति को बेहतर किया जा सकता है। इसके लिए वर्षा जल संचयन के साथ तालाबों को पुनर्जीवित करना होगा। वर्तमान में दिल्ली में करीब एक हजार छोटे-बड़े तालाब हैं। लगभग 200 ऐसे तालाब हैं, जो चिह्नित नहीं किए गए हैं। यदि कुछ और तालाबों का निर्माण किया जाए तो भूजल को बढ़ाया जा सकता है।
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अब वरदान साबित हो सकते हैं तालाब
दिल्ली विश्वविद्यालय के एक अन्य प्रोफेसर ने बताया कि यदि दिल्ली में करीब एक हजार तालाबों को बनाया जाए तो इससे पानी के संकट को कम किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर इसे इस प्रकार समझ सकते हैं, यदि एक तालाब से दिल्ली को आधा मिलियन गैलन पर डे (एमजीडी) पानी मिलता है तो दिल्ली को 500 एमजीडी तक पानी की आपूर्ति हो सकती है। इससे आने वाले समय में पड़ोसी राज्यों पर दिल्ली की पानी की निर्भरता को कम किया जा सकता है। 
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साथ ही, गर्मी के दिनों में पानी का संकट भी खत्म हो सकता है। हालांकि, इसके लिए सरकार को ऐसे तालाबों को विकसित करना होगा, जिनका तल में पत्थरों के बजाय सिर्फ मिट्टी हो।

एक नजर में...

  • इस गर्मी आपूर्ति का लक्ष्य : 998 एमजीडी
  • जून 2023 तक जल आपूर्ति का लक्ष्य : 1180 एमजीडी
  • यमुना और गंगा से पानी की आपूर्ति : 90 फीसदी
  • वर्षा जल संचयन से आपूर्ति : 10 फीसदी
  • हरियाणा से दिल्ली को मिलने वाला पानी : 610 एमजीडी
  • दिल्ली में औसत बारिश : 611.8 मिमी
  • मानसून में होने वाली बारिश : 533.1 मिमी

गर्मी शुरू होते ही फिर गहराया जल संकट
राजधानी में गर्मी शुरू होते ही फिर जल संकट गहरा गया है। बीती 12 मई से ही दिल्ली में जल संकट बना हुआ है। इसकी प्रमुख वजह यमुना में पानी की कमी के कारण वजीराबाद बैराज में पानी सूख गया था। साथ ही, मुनक नहर से पानी की आपूर्ति भी कम हो  रही थी। इस संबंध में बीते दिनों दिल्ली सरकार ने हरियाणा को पत्र लिखकर पानी की आपूर्ति करने के लिए कहा था। हालांकि, इस मसले में अभी तक कोई हल नहीं निकला है और पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। 

दक्षिणी दिल्ली में भूजल सुधारने की अधिक आवश्यकता
डीयू के प्रोफेसर शशांक शेखर ने कहा कि दिल्ली में भूजल को अधिक सुधारने की आवश्यकता दक्षिणी दिल्ली में है। यहां के घिटोरीनी, रजोकरी, कापसहेड़ा व छतरपुर जैसे इलाकों में भूजल का स्तर काफी कम है। वहीं, द्वारका में जमीन के अंदर ताजा पानी खत्म हो चुका है। वहीं, यमुना जिये अभियान के संयोजक मनोज मिश्रा कहते हैं कि भूजल के कम होने का बड़ा कारण दिल्ली की संरचना है। यमुना के पश्चिमी इलाकों में भूजल को कम पाया जाता है तो पूर्वी इलाकों में भूजल स्तर बेहतर है। पूर्वी और पश्चिमी भाग में करीब चार से पांच मीटर तक का अंतर है। पश्चिमी इलाकों में रिज, पहाड़ी व बनावट ठीक न होने के कारण यहां का अधिकांश पानी नालों के माध्यम से बहा जाता है। वहीं, पूर्वी भाग में पानी को धरती की कोख में पहुंचने की गुंजाइश मिल जाती है, क्योंकि यहां की जैव विविधता, जमीन की बनावट व मिट्टी पश्चिमी भाग से अलग है। 

राजधानी में क्या है पानी की स्थिति
दिल्ली को अपने स्रोतों के साथ पड़ोसी राज्यों पर भी निर्भर रहना पड़ता है। विशेषज्ञ इसकी बड़ी वजह दिल्ली का लैंडलॉक्ड होना बताते हैं। दिल्ली चारों तरफ से उत्तर प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान से घिरी हुई है। ऐसे में पानी की आपूर्ति के लिए इसे यमुना के साथ-साथ अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। दिल्ली में पानी की 90 फीसदी आपूर्ति यमुना और गंगा व 10 फीसदी भूजल के माध्यम से की जाती है। केवल हरियाणा से ही दिल्ली को 610 एमजीडी पानी की आपूर्ति होती है। इसके तहत कैरियल लिंक्ड कैनाल (सीएलसी) व दिल्ली सब-ब्रांच (डीएसबी) के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुरादनगर से पाइप लाइन के माध्यम से पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार व भागीरीथी जल शोधन संयंत्रों में गंगा के पानी की आपूर्ति की जाती है। बता दें कि पानी के आपूर्ति के लिए दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच में 1994 में जल समझौता किया गया था। इसके तहत ब्यास नदी का पानी भी कुछ हिस्से के रूप में पहुंचता है। 

पर्यावरण सुरक्षा में बच्चों  की भागीदारी, एक पेड़ बचाने की सबकी जिम्मेदारी 

पर्यावरण को सुरक्षित रखने में बच्चों की बराबर भागीदारी हो, दिल्ली नगर निगम ने कुछ ऐसा विधान बनाया है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर निगम के सभी विद्यालयों में पौधरोपण और अन्य कार्यक्रम होंगे। इस दौरान विद्यालय के प्रत्येक बच्चे के नाम पर स्कूल परिसर में एक पौधा लगाया जाएगा, जिसकी देखरेख व सुरक्षा की जिम्मेदारी उसी बच्चे की होगी। 

 निगम के शिक्षा निदेशक कार्यालय ने अपने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को यह निर्देश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि विद्यालय प्रधानाचार्य व इंचार्ज निगम के उद्यान विभाग की नर्सरी व विभिन्न एनजीओ की नर्सरी से अपनी जरूरत भर का पौधा ले सकते हैं। उन्हें बाकी शिक्षकों और बच्चों के साथ मिलकर पौधरोपण कार्यक्रम और साथ-साथ पर्यावरण विषय पर आधारित निबंध प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, चित्रकला प्रतियोगिता व क्विज प्रतियोगिता का आयोजन कराना है। 

निगम के विद्यालयों में करीब साढ़े सात लाख बच्चे पढ़ते हैं। इस प्रकार प्रत्येक बच्चे के नाम से विद्यालय में पौधा लगाया जाएगा। इन बच्चों को पौधों को सुरक्षित रखने का संकल्प दिलाया जाएगा। जब तक ये बच्चे इन विद्यालयों में पढ़ेंगे तब तक वह इनकी देखभाल करेंगे।

अदालत के निर्देशों का उल्लंघन..

उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता सहित तीन अधिकारियों और दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी को पेड़ों के संरक्षण और इससे संबंधित न्यायिक आदेशों के उल्लंघन के लिए अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने यह आदेश पूर्वी दिल्ली में विकास मार्ग क्षेत्र के संबंध में नीरज शर्मा द्वारा एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची ने कहा कि पीडब्ल्यूडी द्वारा चल रहे सिविल कार्यों से वहां के पेड़ों को व्यापक नुकसान हुआ था जो न्यायिक आदेश का उल्लंघन था। 

अदालत ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता,  इंजीनियर-इन-चीफ व कार्यकारी अभियंता व संबंधित एसएचओ भी कानून के तहत पेड़ों को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए उत्तरदायी है। अदालत ने कहा इन अधिकारियों के क्षेत्राधिकार में ही तय नियमों का उल्लंघन हुआ। अदालत ने कहा , नामित प्रत्येक अधिकारी किसी न किसी रूप में अदालत के निर्देशों का उल्लंघन करने में संलिप्त हैं। ऐसे में उन्हें अदालत की अवमानना के लिए दोषी ठहराया जाता है। अदालत ने चारों की सजा का निर्धारण के लिए सुनवाई 7 जुलाई तय करते हुए चारों अधिकारियों को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। 

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