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इंजीनियरिंग की छात्राएं 9वीं से 12वीं की छात्राओं की मेंटर बनकर करेंगी मदद
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नई दिल्ली। इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय (आईजीडीटीयूडब्ल्यू) की छात्राएं अब दिल्ली के सरकारी स्कूलों की छात्राओं की मेंटर बनकर पढ़ाई में मदद करेंगी। आईजीडीटीयूडब्ल्यू की दो सौ छात्राएं 9वीं से 12वीं कक्षा की 1000 छात्राओं को साइंस, टेक्नोलॉजी, मैथ्स, इंजीनियरिंग की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करवाएंगी।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को आईजीडीटीयूडब्ल्यू में दिल्ली सरकार के यूथ फॉर एजुकेशन प्रोग्राम के तहत एजुकेशन मेंटरशिप प्रोग्राम की शुरुआत की। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में पूरा विश्व अब नॉलेज इकॉनमी बन रहा है। इस इकॉनमी में ग्रोथ के लिए रिसर्च और नवाचार की एक अहम भूमिका है। लेकिन इस क्षेत्र में महिलाओं की संख्या बेहद सीमित है।
उन्होंने कहा इस योजना में छात्राओं को सही मार्गदर्शन मिलेगा। इससे बेटियां इन क्षेत्रों में भी अपना परचम लहरा सकेंगी। इस योजना से बेटे और बेटियों की इन क्षेत्रों में जो दूरी है, उसमें कमी आएगी। देशभर में हर साल प्री-प्राइमरी और प्राइमरी स्तर पर 21 लाख बच्चों का दाखिला होता है लेकिन विडंबना है कि आगे जाकर इनमें से केवल 10 हजार लड़कियां ही उच्च शिक्षा में अपने अध्ययन के लिए तकनीकी विषयों को चुनती हैं। इस अंतर को पाटने में आप सभी मेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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सिसोदिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का सपना है कि बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले। पहले स्कूलों की जो कमियां थीं, उन्हें दूर किया। अब शिक्षा की बुनियाद पर काम करना है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कारण ही आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों का बोर्ड कक्षाओं का रिजल्ट 98 फीसदी से भी अधिक है। हमारे विद्यार्थी बिना कोई कोचिंग लिए मेडिकल और आईआईटी जैसे संस्थानों में दाखिला ले रहे हैं।
बीटेक, एमटेक, पीएचडी व एमबीए की छात्राएं बनेंगी मेंटर
आईजीडीटीयूडब्ल्यू की बीटेक, एमटेक, पीएचडी और एमबीए प्रोग्राम की 200 छात्राओं को मेंटरशिप प्रोग्राम के लिए चुना गया है। योजना का मकसद बेटियों को तकनीकी क्षेत्र में भविष्य बनाने के मौके उपलब्ध करवाना है। दरअसल इंजीनियरिंग और मेडिकल में उच्च शिक्षा में दाखिला प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग जरूरी होती है। कोचिंग महंगी होने के कारण परिजन नहीं दिलवा पाते और बेटियां अक्सर पिछड़ जाती हैं।
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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को आईजीडीटीयूडब्ल्यू में दिल्ली सरकार के यूथ फॉर एजुकेशन प्रोग्राम के तहत एजुकेशन मेंटरशिप प्रोग्राम की शुरुआत की। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में पूरा विश्व अब नॉलेज इकॉनमी बन रहा है। इस इकॉनमी में ग्रोथ के लिए रिसर्च और नवाचार की एक अहम भूमिका है। लेकिन इस क्षेत्र में महिलाओं की संख्या बेहद सीमित है।
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उन्होंने कहा इस योजना में छात्राओं को सही मार्गदर्शन मिलेगा। इससे बेटियां इन क्षेत्रों में भी अपना परचम लहरा सकेंगी। इस योजना से बेटे और बेटियों की इन क्षेत्रों में जो दूरी है, उसमें कमी आएगी। देशभर में हर साल प्री-प्राइमरी और प्राइमरी स्तर पर 21 लाख बच्चों का दाखिला होता है लेकिन विडंबना है कि आगे जाकर इनमें से केवल 10 हजार लड़कियां ही उच्च शिक्षा में अपने अध्ययन के लिए तकनीकी विषयों को चुनती हैं। इस अंतर को पाटने में आप सभी मेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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सिसोदिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का सपना है कि बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले। पहले स्कूलों की जो कमियां थीं, उन्हें दूर किया। अब शिक्षा की बुनियाद पर काम करना है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कारण ही आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों का बोर्ड कक्षाओं का रिजल्ट 98 फीसदी से भी अधिक है। हमारे विद्यार्थी बिना कोई कोचिंग लिए मेडिकल और आईआईटी जैसे संस्थानों में दाखिला ले रहे हैं।
बीटेक, एमटेक, पीएचडी व एमबीए की छात्राएं बनेंगी मेंटर
आईजीडीटीयूडब्ल्यू की बीटेक, एमटेक, पीएचडी और एमबीए प्रोग्राम की 200 छात्राओं को मेंटरशिप प्रोग्राम के लिए चुना गया है। योजना का मकसद बेटियों को तकनीकी क्षेत्र में भविष्य बनाने के मौके उपलब्ध करवाना है। दरअसल इंजीनियरिंग और मेडिकल में उच्च शिक्षा में दाखिला प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग जरूरी होती है। कोचिंग महंगी होने के कारण परिजन नहीं दिलवा पाते और बेटियां अक्सर पिछड़ जाती हैं।