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दिल्ली : राष्ट्रीय रोजगार नीति बनाने की मांग को लेकर जंतर मंतर पर रोजगार संसद, कई संगठनों ने तैयार किया मसौदा, पीएम को सौपेंगे

Sun, 19 Dec 2021 10:17 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Sun, 19 Dec 2021 10:17 PM IST
सार

रोजगार संसद का आयोजन देश की बात फाउंडेशन की पहल पर संयुक्त आयोजन समिति के बैनर तले आयोजित किया गया। रोजगार संसद को दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री और देश की बात फाउंडेशन के संस्थापक गोपाल राय ने संबोधित किया।

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Employment Parliament held at Jantar Mantar for demand for making National Employment Policy many organizations prepared draft
पीएम मोदी वैश्विक नेता - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राष्ट्रीय रोजगार नीति बनाने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर रोजगार संसद का आयोजन किया है। इस कार्यक्रम में ढाई दर्जन से अधिक छोटे-बड़े संगठन ने हिस्सा लिया। रोजगार संसद में यह तय किया गया कि 20 दिसंबर को प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय रोजगार नीति का मसौदा दिया जाएगा। गणतंत्र दिवस तक सभी राजनीतिक दलों के सांसदों को यह मसौदा सौंपा जाएगा। इस मांग को लेकर अगले साल 23 से 25 मार्च तक देश भर के संगठनों के साथ दिल्ली में राष्ट्रीय रोजगार सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

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रोजगार संसद का आयोजन देश की बात फाउंडेशन की पहल पर संयुक्त आयोजन समिति के बैनर तले आयोजित किया गया। रोजगार संसद को दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री और देश की बात फाउंडेशन के संस्थापक गोपाल राय ने संबोधित किया। राय ने कहा आज देश बेरोजगारी के भयावह संकट से जूझ रहा है। डिग्रियां लेकर भी युवा दर-दर भटक रहे हैं। रोजगार का नया सृजन करना तो दूर देशभर में लाखों खाली पड़ी सरकारी वेकैंसी पर भी भर्ती नहीं की जा रही है, जहां भर्ती हो भी रही है, ठेकेदारी व्यवस्था के तहत हो रही है, जिससे काम करने के बावजूद लोगों को सम्मान पूर्वक जीवन जीना मुश्किल हो रहा है। प्राइवेट सेक्टर में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होने की जगह छटनी की तलवार लोगों के सर मंडरा रही है। पहले से ही बेरोजगारी की मार झेल रही हमारी अर्थव्यवस्था को कोरोना ने और अधिक चिंताजनक स्थिति में पहुंचा दिया। बेरोजगारी की समस्या न सिर्फ गांव के लोगो की है बल्कि जो लोग बड़े-बड़े शहरों में रहते हैं, उनकी समस्या भी है।
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आज तक नहीं बनी राष्ट्रीय रोजगार नीति : गोपाल राय
गोपाल राय ने कहा बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए अभी तक नीतियां नहीं बनाई गईं। आजादी के सात दशक से अधिक समय बीतने पर भी देश में राष्ट्रीय रोजगार नीति नहीं बन पाई है। यही वजह है कि देश की बात फाउंडेशन ने बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए देश के सामने राष्ट्रीय रोजगार नीति बनाने की पहल की है। अर्थशास्त्र के प्रोफेसरों, अनुसंधान विद्वानों और विशेषज्ञों की शोध टीम ने राष्ट्रीय रोजगार नीति का मसौदा तैयार किया।
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रोजगार संसद की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा यादव ने कहा कि 30 से अधिक प्रमुख छात्र, युवा संगठन, शिक्षक संगठन, ट्रेड यूनियन, किसान यूनियन, गैर सरकारी संगठनों द्वारा हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन 20 दिसंबर को प्रतिनिधि मंडल के जरिये प्रधानमंत्री कार्यालय को दिया जाएगा और राष्ट्रीय रोजगार नीति बनाकर लागू करने की अपील की जाएगी। रोजगार संसद को सामाजिक चिंतक गौहर रजा, आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साई बालाजी, छात्र युवा संघर्ष समिति दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष रवि पांडेय, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के संयुक्त सचिव मोहम्मद दानिश, डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्व छात्र संघ सह सचिव शुभांशु सिंह, रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव फरहान, आप यूथ विंग प्रभारी रोहित लकड़ा, जन अधिकार छात्र परिषद के दिल्ली प्रदेश प्रवक्ता शौकत अली, यूपीएससी प्रतिपूरक प्रयास मंच के संयोजक सोहन, सेंटर फॉर ट्रेड यूनियन के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अनुराग सक्सेना, हिन्द मजदूर सभा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष नारायण समेत कई संगठनों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया।

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