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Delhi News: डीयू में तीस फीसदी अतिरिक्त सीटें भरने का पड़ा असर, कम ही सीटें खाली
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दो सीट आवंटन राउंड के बाद आरक्षित श्रेणी की कम ही सीटें बचीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक की सीटों को भरने के लिए पहले राउंड में अतिरिक्त सीटें भरने का नियम इस बार भी कॉलेजों के लिए बेहतर रहा है। इस नियम के कारण दो राउंड के बाद भी सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी में कम ही सीटें खाली हैं। जबकि कई कॉलेजों में सामान्य व ओबीसी की सीटें शेष नहीं हैं। दो साल पहले कटऑफ आने पर सीटें भरने के लिए प्रशासन को आरक्षित श्रेणी की सीटें भरने के लिए दस कटऑफ तक निकालनी पड़ती थीं।
डीयू ने बीते साल से सामान्य व ओबीसी की सीटों पर बीस फीसदी सीटें अतिरिक्त भरने व एससी, एसटी व पीडब्ल्यूडी की 30 फीसदी सीटें अधिक भरने का प्रावधान किया था। बीते साल से सबक लेते हुए डीयू ने इस साल भी इस फॉर्मूले को अपनाया। इसका असर यह रहा कि सीटें कम ही खाली हैं। दो सीट आवंटन राउंड के बाद जारी की गई खाली सीटों पर नजर डालें तो साइंस व बीकॉम ऑनर्स जैसे ही कोर्सेज में कुछ जगह खाली हैं।
आरक्षित श्रेणी के लिए किन कॉलेजों में कितनी सीटें
इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज में इकोनॉमिक्स ऑनर्स की ओबीसी के लिए एक सीट, एसटी की एक व पीडब्ल्यूडी की पांच सीटें खाली हैं। अंग्रेजी ऑनर्स में पीडब्ल्यूडी की एक सीट खाली है। दौलत राम कॉलेज में अंग्रेजी ऑनर्स की ओबीसी श्रेणी के लिए एक, ईडब्ल्यूएस की एक व पीडब्ल्यूडी की तीन सीटें खाली हैं। हंसराज कॉलेज में हिंदी ऑनर्स के लिए एससी, एसटी, व ईडब्ल्यूएस की एक-एक सीट खाली है।
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सीटें खाली रहने की गुंजाइश कम : प्रिंसिपल
श्री अरबिंदो कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विपिन अग्रवाल ने कहा कि सामान्य व ओबीसी की 20 फीसदी सीटें अतिरिक्त व एससी, एसटी व पीडब्ल्यूडी के लिए 30 फीसदी अतिरिक्त सीटें भरने के नियम का इस बार भी असर दिखा है। दो सीट आवंटन सूची में ही काफी सीटें भर गई हैं। अभी जो थोड़ी खाली हैं वह बीकॉम ऑनर्स व एसटी की साइंस कोर्सेज में खाली हैं। अब कोर्स आधारित ही खाली हैं। दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) छात्र आसान कोर्स चाहते हैं, इसलिए वह साइंस व बीकॉम ऑनर्स कोर्स में कम आते हैं।
डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आर.एन दुबे ने कहा कि आरक्षित श्रेणी की सीटें भी काफी हद तक भर गई हैं। थोड़ी बहुत ही खालीं हैं वो भी 22 अगस्त से शुरू होने वाले तीसरे राउंड तक भर जाएंगी। इस नियम के कारण सीटें खाली रहने की गुंजाइश कम हो रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक की सीटों को भरने के लिए पहले राउंड में अतिरिक्त सीटें भरने का नियम इस बार भी कॉलेजों के लिए बेहतर रहा है। इस नियम के कारण दो राउंड के बाद भी सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी में कम ही सीटें खाली हैं। जबकि कई कॉलेजों में सामान्य व ओबीसी की सीटें शेष नहीं हैं। दो साल पहले कटऑफ आने पर सीटें भरने के लिए प्रशासन को आरक्षित श्रेणी की सीटें भरने के लिए दस कटऑफ तक निकालनी पड़ती थीं।
डीयू ने बीते साल से सामान्य व ओबीसी की सीटों पर बीस फीसदी सीटें अतिरिक्त भरने व एससी, एसटी व पीडब्ल्यूडी की 30 फीसदी सीटें अधिक भरने का प्रावधान किया था। बीते साल से सबक लेते हुए डीयू ने इस साल भी इस फॉर्मूले को अपनाया। इसका असर यह रहा कि सीटें कम ही खाली हैं। दो सीट आवंटन राउंड के बाद जारी की गई खाली सीटों पर नजर डालें तो साइंस व बीकॉम ऑनर्स जैसे ही कोर्सेज में कुछ जगह खाली हैं।
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आरक्षित श्रेणी के लिए किन कॉलेजों में कितनी सीटें
इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज में इकोनॉमिक्स ऑनर्स की ओबीसी के लिए एक सीट, एसटी की एक व पीडब्ल्यूडी की पांच सीटें खाली हैं। अंग्रेजी ऑनर्स में पीडब्ल्यूडी की एक सीट खाली है। दौलत राम कॉलेज में अंग्रेजी ऑनर्स की ओबीसी श्रेणी के लिए एक, ईडब्ल्यूएस की एक व पीडब्ल्यूडी की तीन सीटें खाली हैं। हंसराज कॉलेज में हिंदी ऑनर्स के लिए एससी, एसटी, व ईडब्ल्यूएस की एक-एक सीट खाली है।
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सीटें खाली रहने की गुंजाइश कम : प्रिंसिपल
श्री अरबिंदो कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विपिन अग्रवाल ने कहा कि सामान्य व ओबीसी की 20 फीसदी सीटें अतिरिक्त व एससी, एसटी व पीडब्ल्यूडी के लिए 30 फीसदी अतिरिक्त सीटें भरने के नियम का इस बार भी असर दिखा है। दो सीट आवंटन सूची में ही काफी सीटें भर गई हैं। अभी जो थोड़ी खाली हैं वह बीकॉम ऑनर्स व एसटी की साइंस कोर्सेज में खाली हैं। अब कोर्स आधारित ही खाली हैं। दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) छात्र आसान कोर्स चाहते हैं, इसलिए वह साइंस व बीकॉम ऑनर्स कोर्स में कम आते हैं।
डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आर.एन दुबे ने कहा कि आरक्षित श्रेणी की सीटें भी काफी हद तक भर गई हैं। थोड़ी बहुत ही खालीं हैं वो भी 22 अगस्त से शुरू होने वाले तीसरे राउंड तक भर जाएंगी। इस नियम के कारण सीटें खाली रहने की गुंजाइश कम हो रही है।