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Delhi: मरीज से बात करते हुए डॉक्टरों ने किया किडनी ट्रांसप्लांट, मां ने दान की किडनी, पूछता रहा हाल
Tue, 10 Feb 2026 05:46 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 10 Feb 2026 05:46 AM IST
सार
इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में पहली बार अवेक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। ट्रांसप्लांट के दौरान मरीज होश में रहा, डॉक्टर उससे बात करते रहे। उसने मां का हालचाल पूछा।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में पहली बार अवेक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। ट्रांसप्लांट के दौरान मरीज होश में रहा, डॉक्टर उससे बात करते रहे। उसने मां का हालचाल पूछा। डॉ अभियुत्थान सिंह ने बताया कि ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में जनरल एनेस्थीसिया की जगह एपिड्यूरल एनेस्थीसिया दिया गया। इसमें मरीज के नाभि से नीचे वाले हिस्से को सुन्न कर दिया जाता है। सुन्न करने के लिए एक कैथेटर (पतली ट्यूब) के माध्यम से रीढ़ की हड्डी के पास एपिड्यूरल स्पेस में दवा दी जाती है। इसमें एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ गौरव सिंधवानी ने सहयोग किया।
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मरीज मां का पूछता रहा हाल
मरीज को उसकी मां ने किडनी दान की है। ट्रांसप्लांट के दौरान मरीज ने अपनी मां की सेहत के बारे में भी पूछा। मां से किडनी निकालने में करीब ढाई घंटे का समय लगा और उसके बाद मरीज को किडनी लगाने में लगभग तीन घंटे का समय लगा। किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद मरीज ने यूरिन आने की जानकारी खुद से दी। ट्रांसप्लांट के अगले ही दिन मरीज ने खाना शुरू कर दिया और चलने-फिरने लगा।
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एम्स ने एक साल में दस हजार सर्जरी का बनाया रिकॉर्ड
नई दिल्ली। एम्स ने एक साल में दस हजार सर्जरी का रिकॉर्ड बनाया है। सर्जिकल डिसिप्लिन्स विभाग ने इसमें अलग-अलग तरह की सर्जरी की है। अस्पताल मंगलवार को इस बारे में प्रेस वार्ता करेगा। बता दें कि ओपन सर्जरी, लेप्रोस्कॉपी और रोबोट की मदद से मरीजों की हर प्रकार की सर्जरी की गई। इससे पहले एम्स ने 13 महीने में एक हजार रोबोटिक सर्जरी करने का रिकॉर्ड बनाया था, जिसमें सबसे अधिक गॉल ब्लैडर की सर्जरी हुई थी।
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