{"_id":"6089bcf68ebc3e8dc456993e","slug":"doctor-urges-to-high-court-to-open-his-hospital-for-corona-patients-ashram-news-noi5794702105","type":"story","status":"publish","title_hn":"150 बिस्तर वाले अस्पताल को कोविड मरीजों के लिए खोलने का आग्रह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
150 बिस्तर वाले अस्पताल को कोविड मरीजों के लिए खोलने का आग्रह
विज्ञापन
नई दिल्ली। एक डॉक्टर ने अपनी मूल कंपनी के खिलाफ दिवालिया समाधान प्रक्रिया के कारण बंद किए गए 150 बिस्तर वाले मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल को कोविड-19 के लिए खोलने की इजाजत देने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अदालत ने स्वास्थ्य मंत्रालय, दिल्ली सरकार और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष याची ने जनहित याचिका में तर्क रखा कि वह और डॉक्टरों तथा पैरा मेडिकल स्टाफ की उनकी टीम अस्पताल के ऑपरेशन में सहयोग करने के लिए तैयार है। अदालत ने मामले की सुनवाई 7 मई तय की है।
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील संतोष के त्रिपाठी ने जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिकाकर्ता द्वारा चल रही समाधान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का प्रयास है।
विज्ञापन
दुर्हा विट्रैक प्राइवेट लिमिटेड के तहत फेब्रिस मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना करने वाले याची डॉ. राकेश सक्सेना ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 संक्रमण और बिस्तरों, ऑक्सीजन और दवाओं की कमी से लोग जूझ रहे हैं। ऐसे में गंभीर स्थिति को देखते हुए उनके अस्पताल का इस्तेमाल लोगों की मदद के लिए किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा है कि केंद्र या दिल्ली सरकार 2019 के बाद से बंद अस्पताल को अपने कब्जे में ले सकती है। कोविड-19 रोगियों के लिए वहां की सुविधाओं का उपयोग कर सकती है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मौजूदा आपात स्थिति को देखते हुए अस्पताल के लाइसेंस का नवीनीकरण किया जा सकता है।
कंपनी के लेनदार एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड द्वारा नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के समक्ष दायर आवेदन पर कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरू की गई थी।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष याची ने जनहित याचिका में तर्क रखा कि वह और डॉक्टरों तथा पैरा मेडिकल स्टाफ की उनकी टीम अस्पताल के ऑपरेशन में सहयोग करने के लिए तैयार है। अदालत ने मामले की सुनवाई 7 मई तय की है।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील संतोष के त्रिपाठी ने जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिकाकर्ता द्वारा चल रही समाधान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का प्रयास है।
विज्ञापन
दुर्हा विट्रैक प्राइवेट लिमिटेड के तहत फेब्रिस मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना करने वाले याची डॉ. राकेश सक्सेना ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 संक्रमण और बिस्तरों, ऑक्सीजन और दवाओं की कमी से लोग जूझ रहे हैं। ऐसे में गंभीर स्थिति को देखते हुए उनके अस्पताल का इस्तेमाल लोगों की मदद के लिए किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा है कि केंद्र या दिल्ली सरकार 2019 के बाद से बंद अस्पताल को अपने कब्जे में ले सकती है। कोविड-19 रोगियों के लिए वहां की सुविधाओं का उपयोग कर सकती है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मौजूदा आपात स्थिति को देखते हुए अस्पताल के लाइसेंस का नवीनीकरण किया जा सकता है।
कंपनी के लेनदार एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड द्वारा नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के समक्ष दायर आवेदन पर कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरू की गई थी।