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Delhi: दिन-रात मेहनत कर कराया मां का इलाज, अचानक बुझ गया रोशनी देने वाला चिराग, अधूरा रह गया रोहित का ये सपना
Sun, 22 Feb 2026 06:35 AM IST
Digvijay Singh
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Sun, 22 Feb 2026 06:35 AM IST
सार
सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन के पास रात के सन्नाटे में एक और मासूम का सपना चूर-चूर हो गया। मात्र 25 साल का हेम शंकर, जिसे घरवाले प्यार से रोहित कहते थे। जेप्टो की डिलीवरी कर परिवार का भरण-पोषण की जद्दोजहद में लगा था।
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Zepto
- फोटो : Zepto
विस्तार
रात में अपने बेटे का घर आने का इंतजार करते-करते कब आंख लग गई थी, पता ही नहीं चला। देर रात दरवाजे पर दस्तक होती है और मैं हड़बड़ाकर उठती हूं, जैसे-जैसे कदम दरवाजे की ओर बढ़ रहे थे, तो अपने बेटे की आस लगी हुई थी। इसी बीच दरवाजा खोलते ही तीन लोग बाहर खड़े दिखे और हिचकिचाते हुए बोले, अंटी रोहित अस्पताल में भर्ती है। इतना सुनते ही मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई और बेसुध सी हो गई...इतना कहकर तिलक नगर हादसे में अपनी जान गंवाने वाले हेम शंकर की मां रुक्मणी फफक-फफकर रोने लगी। लेकिन जब उन्हें अपने बेटे के साथ हुए वारदात के बारे में पता चला तो, यह रात उनके जीवन की सबसे भयानक रात बन गई।
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सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन के पास रात के सन्नाटे में एक और मासूम का सपना चूर-चूर हो गया। मात्र 25 साल का हेम शंकर, जिसे घरवाले प्यार से रोहित कहते थे। जेप्टो की डिलीवरी कर परिवार का भरण-पोषण की जद्दोजहद में लगा था। रात करीब 2:30 बजे ऑर्डर डिलीवर कर सड़क किनारे लोकेशन चेक कर रहा था कि अचानक तेज रफ्तार वाहन ने उसे कुचल दिया। मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं। शनिवार को गली में सन्नाटा पसरा हुआ साफ दिखाई दे रहा था। हर चेहरे पर उदासी साफ झलकती दिखी।
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बड़े भाई ने की न्याय की मांग
हेम शंकर के बड़े भाई देवेंद्र ने न्याय की मांग की है। उन्होंने बताया कि वह शुक्रवार को एक परिचित की शादी में गए थे, जहां हेम शंकर के मोबाइल से फोन आया। फोन करने वाले राहुल ने बताया कि हेम शंकर की तबीयत खराब है और वह डीडीयू अस्पताल में भर्ती है। वह तुरंत अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि भाई की मौत हो चुकी है। हेम के जीजा सुरेंद्र कुमार ने बताया कि हेम शंकर ही परिवार का पालन पोषण कर रहा था। वह छोटे भाई समर को कम्प्यूटर इंजीनियर बनाने की बात कहता था।
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मां अब तू दुनिया देख...यह लफ्ज हमेशा के लिए चले गए
रुक्मणी बताती है कि उन्हें आंखों से दिखाई नहीं देता था, तो ऐसे में उनके जिगर के टुकड़े को बहुत दुख पहुंचता था। रोहित ने अपनी मां से वादा किया था कि एक दिन अपनी मां का जरूर इलाज करवाएगा। ऐसे में दिन-रात मेहनत और कड़ी मशक्कत के बाद उसने मेरा इलाज करवाया और उसका पहला शब्द था कि मां अब तू दुनिया देख। अब वही मां अपने बेटे के बिना जिंदगी के अंधेरे से जूझ रही हैं। रोहित की चचेरी बहन ने बताया कि चाचा के निधन के बाद चाची ने अकेले तीन बच्चों को बर्तन धोकर पाला है।
सड़क पर काम करना अब डरावना हो गया है...
इस घटना के बाद सड़क पर डर का माहौल बन गया है और कई डिलीवरी बॉय अपने काम पर जाने से डर रहे हैं। डिलीवरी बॉय शुभम ने बताया कि वह रोजाना सड़कों पर अपना काम करते हैं, लेकिन अब डर लगा रहता है कि कब कोई तेज गाड़ी हमारी जिंदगी छीन लेगी। हर गली, हर क्रॉसिंग पर सावधान रहना पड़ता है। आज एक साथी की जान चली गई और हमें भी यही डर सताने लगा है। हम सुरक्षित काम करना चाहते हैं, लेकिन सड़क पर सुरक्षा का इंतजाम नहीं है। सरकार और पुलिस से बस यही अपील है कि हमारी जान भी मायने रखती है।