फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   delimitation of wards in delhi will not be an easy task

Delhi News : मुश्किल है डगर...आसान नहीं होगा वार्डों का परिसीमन, चार महीने में देनी है रिपोर्ट

Mon, 11 Jul 2022 04:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली  
विनोद डबास, नई दिल्ली   Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 11 Jul 2022 04:44 AM IST
सार

सभी वार्डों में मतदाताओं की संख्या एक समान करना कमेटी के लिए होगा चुनौतीपूर्ण, चार माह में पेश करनी है रिपोर्ट।

विज्ञापन
delimitation of wards in delhi will not be an easy task
mcd - फोटो : amar ujala

विस्तार

केंद्र सरकार की ओर से एमसीडी के वार्डों का परिसीमन करने के लिए गठित की कमेटी की राह आसान नहीं है। कमेटी को चार माह में वार्डों का परिसीमन कर रिपोर्ट पेश करनी है। अभी तक किसी भी कमेटी ने इतने कम समय में परिसीमन का कार्य पूरा नहीं किया है। कमेटी के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर वार्डों का परिसीमन करने के दौरान उनमें जनसंख्या व मतदाताओं की संख्या समान रखना चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि एमसीडी के अधिकार क्षेत्र में आने 68 विधानसभा क्षेत्रों में जनसंख्या एवं मतदाताओं की संख्या एक समान नहीं है। 

विज्ञापन


एमसीडी के वार्डों का परिसीमन जनसंख्या के आधार पर होगा। वर्ष 2021 की जनगणना नहीं होने के कारण वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर वार्डों का परिसीमन करने का निर्णय लिया गया है। दिल्ली के अधिकतर विधानसभा क्षेत्रों में वर्ष 2011 की जनसंख्या एवं वर्तमान में मतदाताओं की संख्या में अधिक अंतर नहीं रहा है। नौ विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2011 की जनसंख्या से वर्तमान में मतदाताओं की संख्या अधिक हो चुकी है, जबकि 7 विधानसभा क्षेत्रों में जनसंख्या और मतदाताओं की संख्या में मामूली सा अंतर है। 
विज्ञापन


वर्तमान में दिल्ली की करीब दो करोड़ जनसंख्या के करीब है, जबकि दिल्ली निर्वाचन कार्यालय के अनुसार 5 जनवरी को दिल्ली में मतदाताओं की संख्या करीब डेढ़ करोड़ है। वर्ष 2011 की जनसंख्या और वर्तमान में मतदाताओं की संख्या के मामले में यह अनुपात एक भी विधानसभा क्षेत्र में नहीं है। एमसीडी एक्ट के तहत अधिकतम 250 वार्ड बनाने के दौरान वर्ष 2011 की जनसंख्या के अनुसार एक वार्ड में करीब 65 हजार जनसंख्या होनी चाहिए और दिल्ली में जनसंख्या एवं मतदाताओं के अनुपात के अनुसार एक वार्ड में करीब 49 हजार मतदाता होने चाहिए, मगर वर्तमान में मतदाताओं की संख्या देखे तो एक वार्ड में करीब 58 हजार वोटर होने चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर दिल्ली में बुराड़ी, नांगलोई जाट, विकासपुरी, उत्तम नगर, द्वारका, मटियाला, महरौली, ओखला और पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्रों में वर्ष 2011 की जनसंख्या की तुलना में अब मतदाताओं की संख्या अधिक है। इसके अलावा पालम, जंगपुरा, मालवीय नगर, ग्रेटर कैलाश, कालकाजी, तुगलकाबाद व बदरपुर विधानसभा क्षेत्रों में जनसंख्या एवं मतदाताओं की संख्या में एक से सात हजार का ही अंतर है।

परिसीमन का फार्मूला तय करने में होगी मुश्किल
केंद्र सरकार ने एमसीडी के वार्डों का परिसीमन करने के लिए केवल कमेटी का गठन किया है। इस तरह वार्डों का परिसीमन करने के नियम एवं दिशानिर्देश कमेटी को ही तय करने हैं। अभी तक  वार्डों का परिसीमन करने का फार्मूला तय नहीं हुआ है। हालांकि वर्ष 2011 की जनगणना और वर्तमान में मतदाताओं की संख्या को देखते हुए उसके लिए वार्डों का परिसीमन करने का फार्मूला तय करना आसान नहीं दिख रहा है।

80 हजार जनसंख्या पर एक वार्ड बनाने का था लक्ष्य
तीनों नगर निगम का विलय करके एमसीडी बनाने के प्रस्ताव पर संसद में चर्चा के दौरान वार्ड की संख्या 272 से कम करके 250 वार्ड करने पर विपक्ष के सदस्यों से केंद्र सरकार को घेरा था। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि उन्होंने दिल्ली की जनसंख्या करीब दो करोड़ मानी गई है। लगभग 80 हजार की आबादी पर एक वार्ड बनाने का लक्ष्य तय किया है, मगर वर्ष 2021 की जनगणना नहीं होने के कारण दिल्ली की जनसंख्या दो करोड़ होने के संबंध में सरकारी तौर पर आंकड़े नहीं आ सके। इस कारण वर्तमान स्थिति के गांवों एवं कालोनियों की जनसंख्या के बारे में पुख्ता आंकड़े नहीं है।

अप्रैल में हो सकते हैं चुनाव, चल रही हैं तैयारियां
कमेटी ने वार्डों के परिसीमन का कार्य इस वर्ष के अंत तक पूरा होने पर एमसीडी के चुनाव अगले वर्ष अप्रैल में हो सकते है। वार्डों के परिसीमन के बाद  चुनाव कराने में अड़चन नहीं रहेगी। वार्ड महिलाओं एवं अनुसूचित के लिए आरक्षित करने का कार्य दिल्ली राज्य चुनाव आयोग को करना है। एमसीडी में 50 प्रतिशत वार्ड सामान्य एवं अनुसूचित जाति वर्ग में महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। दिल्ली में अनुसूचित जाति की जनसंख्या करीब 17 प्रतिशत है। करीब 17 प्रतिशत वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होंगे।

पहले जनसंख्या व मतदाता एक समान करने का रहा था प्रयास
वार्डों का परिसीमन करने के दौरान  जनसंख्या एवं मतदाताओं की संख्या बराबर-बराबर तय करने की कोशिश की गई है। वर्ष 2007 में मतदाताओं की संख्या के मद्देनजर एमसीडी के वार्डों की संख्या 134 से बढ़ाकर 272 की गई थी। उस समय मतदाताओं के आधार पर एक वार्ड को दो हिस्सों में बांटा गया था, जबकि वर्ष 2016 में परिसीमन करने के दौरान 50 से 60 हजार की जनसंख्या में पर एक वार्ड बनाया गया था। इस बार विधानसभा क्षेत्रों में वार्डों की संख्या एक समान रहने की परंपरा खत्म कर दी गई थी।




 

परिसीमन के बाद बड़ी हो जाएंगी वार्डों की सीमाएं

दिल्ली नगर निगम के वार्डों के परिसीमन के लिए केंद्र सरकार ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी चार महीने के भीतर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। परिसीमन की रिपोर्ट मिलने के बाद एमसीडी चुनाव की तारीख जल्द तय हो जाएगी। 

अहम बात यह है कि परिसीमन के बाद एमसीडी के वार्डों की सीमाएं बड़ी हो जाएंगी। एमसीडी एक्ट में किए गए संशोधन के मुताबिक राजधानी में अधिकतम 250 वार्ड होंगे। जबकि मौजूदा वार्डों की संख्या 272 है। जाहिर है कि 22 वार्ड घटेंगे। जिन्हें 250 वार्डों में ही समायोजित किया जाएगा। यही वजह है वार्डों के क्षेत्रफल बढ़ना तय माना जा रहा है। 

ऐसे समझें...
दिल्ली में 7 संसदीय क्षेत्र और 70 विधानसभा क्षेत्र हैं। एक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में 10 विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें से दो विधानसभा क्षेत्र नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली कैंट क्षेत्र में आते हैं। शेष 68 विधानसभा क्षेत्र दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

इन 68 विधानसभा क्षेत्रों को 250 वार्डों में समान रूप से विभाजित नहीं किया जा सकता। इस तरह केवल 204 की संख्या ही ऐसी है, जिसे 68 से भाग करने पर भागफल पूरा तीन आता है। ऐसे में संभव है कि समान रूप से सभी विधानसभाओं में वार्डों की संख्या रखने के लिए परिसीमन समिति एमसीडी के 204 वार्ड तय करें।

2007 के परिसीमन में ऐसे ही हुआ था : वर्ष 2007 में एमसीडी का परिसीमन हुआ था। तब अधिकतम 300 वार्डों पर सहमती बनी थी। लेकिन 68 विधानसभाओं में समान रूप से चार वार्ड की संरचना को ध्यान में रखते हुए 272 वार्ड बनाने पर मुहर लगाई गई। पार्षदों को चुनावों के लिए वार्ड बुलाने की अधिसूचना 10 मार्च 2007 को जारी की गई थी।  

2017 में फिर से हुआ परिसीमन : इस बार वार्डों की सीमाएं जरूर घटाई-बढ़ाई गईं। इसके कारण कई विधानसभाओं में तीन तो कई में पांच वार्ड भी आए। हालंाकि मौजूदा परिसीमन में फिर से प्रत्येक विधानसभा में समान वार्ड रखे जाने की संभावना जताई जा रही है।

जोन की संख्या भी हो सकता है बदलाव :  परिसिमन में जोन की संख्या बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। मौजूदा समय एमसीडी के कुल 12 जोन हैं। यमुना पार के दो जोन जनसंख्या के लिहाज से काफी बड़े हैं। संभव है इन दो जोनों से तीन जोन बनाए जाएं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed