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Rajendra Nagar by-election : उपचुनाव में नहीं है दिल्लीवालों की दिलचस्पी, राजेंद्र नगर में भी साबित हुई यही बात

सर्वेश कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 25 Jun 2022 05:29 AM IST
सार

13 साल बाद फिर गिरा ग्राफ, हमेशा 50 फीसदी से कम हुआ मतदान। जानकारों को मानना है कि बड़ी संख्या में कामकाजी आबादी, दिल्ली की सांविधानिक स्थिति व बहु एजेंसी सिस्टम इसके लिए जिम्मेदार है। इन वजहों से लोग आम चुनावों की तरह लोग उपचुनाव में हिस्सेदारी नहीं निभाते।

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file pic..... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव ही नहीं, बीते 13 साल के किसी भी उपचुनाव में दिल्लीवालों ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। सभी उपचुनाव का मत प्रतिशत 50 फीसदी से नीचे रहा है। 



इस दौरान हुए पांच उपचुनावों में दूसरी बार सबसे कम वोटिंग बृहस्पतिवार को हुई है। जानकारों को मानना है कि बड़ी संख्या में कामकाजी आबादी, दिल्ली की सांविधानिक स्थिति व बहु एजेंसी सिस्टम इसके लिए जिम्मेदार है। इन वजहों से लोग आम चुनावों की तरह लोग उपचुनाव में हिस्सेदारी नहीं निभाते हैं।


आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली चुनाव अधिकारी कार्यालय के एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बावजूद बृहस्पतिवार को राजेंद्र नगर विधानसभा उपचुनाव में महज 43.75 फीसदी मतदान हुआ। इससे पहले के उपचुनावों की हालत भी ज्यादा बेहतर नहीं है। 2009 में ओखला विधानसभा उपचुनाव में 36 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। वहीं, बाकी तीन अन्य उपचुनावों में भी वोटिंग प्रतिशत 50 फीसदी से नीचे रहा है, जबकि आम चुनावों में यह 60 फीसदी से ऊपर रहता है।

राजनीतिक विशेषज्ञ प्रो. राजेश झा का कहना है कि कम मतदान के कई कारण हो सकते हैं। सरकारी दफ्तरों में काम करने वालों को तो मतदान के लिए अवकाश का प्रावधान है। एनसीआर के शहरों की फैक्टरियों में हजारों की संख्या में कर्मी रोजाना आते जाते हैं, छुट्टी न मिलने की वजह से मतदान में शामिल नहीं हो सके। अलग-अलग वर्ग के मतदाताओं में भी मतदान के प्रति रुझान कम या अधिक है। कुछ मतदाता ऐसे भी हैं, जो मौजूदा हालात को देखते हुए मतदान के प्रति उदासीन हो गए हैं। मतदान कम होने को मौजूदा व्यवस्था को समर्थन के तौर पर भी कई बार देखा जाता है।

जानकारों की मानें तो दिल्ली की सांविधानिक स्थिति और बहु एजेंसी सिस्टम भी इसके लिए जिम्मेदार है। पूर्ण राज्य न होने से दिल्ली के विधायकों के अधिकार सीमित हैं। वहीं, डीडीए व एमसीडी के पास कई सारे अधिकार हैं। लोगों को अपने अलग-अलग तरह के कामों के लिए तीनों एजेंसियों के पास जाना पड़ता है। इसमें किसी एजेंसी का जन प्रतिनिधि दूसरे में काम करवाने के लिए मददगार नहीं हो पाता। इससे आम चुनावों के विपरीत दिल्लीवाले उपचुनावों में अपने निजी कामों को मतदान करने से ज्यादा प्राथमिकता देते हैं।

ट्रांसजेंडर ने महिलाओं-पुरुषों को वोटिंग में पछाड़ा
राजेंद्र नगर विधानसभा उपचुनाव में महिला और पुरुष मतदाताओं से ट्रांसजेंडर आगे हैं। 43.67 फीसदी पुरुष, 43.86 फीसदी महिलाओं समेत उपचुनाव में 50 फीसदी ट्रांसजेंडर ने मतदान किया। मुख्य निर्वाचन कार्यालय की तरफ से उपचुनाव में मतदाताओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया करने की हरसंभव कोशिश की गई।

आप और भाजपा नेता कर रहे जीत के दावे
राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए बृहस्पतिवार को मतदान होने के बाद मुख्य तौर पर जीत के मामले में आम आदमी पार्टी व भाजपा जमा-घटा में जुटी हुई है। दोनों दलों के नेता अपने-अपने गढ़ में अपने पक्ष में मतदान होने की आस में अपनी जीत की उम्मीद जता रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञ आप और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर करार दे रहे हैं। उपचुनाव में मतदान से पहले की तरह बाद में भी आप व भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। 

यह क्षेत्र नारायणा, इंद्रपुरी एवं राजेंद्र नगर वार्ड में बंटा हुआ है। नारायणा वार्ड में आप व भाजपा ही राजनीतिक विशेषज्ञ भी उनके बीच बराबर का मुकाबला मान रहे हैं, जबकि इंद्रपुरी वार्ड में आप का पलड़ा भारी माना जा रहा है। यहां भाजपा भी आप को मजबूत मान रही है। वहीं, राजेंद्र नगर वार्ड में भाजपा को काफी मजबूत माना रहा है। आप भी उसे मजबूत मान रही है।

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