{"_id":"6343693b7038ea5521498997","slug":"delhi-uttam-pacharane-said-efforts-are-being-made-to-suppress-fine-arts-for-own-benefit","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi News : उत्तम पचारणे बोले- अपने फायदे के लिए ललित कला को दबाने की कोशिश की जा रही है...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi News : उत्तम पचारणे बोले- अपने फायदे के लिए ललित कला को दबाने की कोशिश की जा रही है...
Mon, 10 Oct 2022 07:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अतुल सिन्हा, नई दिल्ली
अतुल सिन्हा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 10 Oct 2022 07:33 AM IST
सार
ललित कला अकादमी में कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर बेशक उमा नंदूरी को ज़िम्मेदारी दे दी गई हो, लेकिन अपना कार्यकाल खत्म कर चुके पूर्व अध्यक्ष उत्तम पचारणे अब भी खुद को वहां का प्रोटेम चेयरमैन मानते हैं।
विज्ञापन
ललित कला अकादमी
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
ललित कला अकादमी में कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर बेशक उमा नंदूरी को ज़िम्मेदारी दे दी गई हो, लेकिन अपना कार्यकाल खत्म कर चुके पूर्व अध्यक्ष उत्तम पचारणे अब भी खुद को वहां का प्रोटेम चेयरमैन मानते हैं। उनका कहना है कि मुझे तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आदेश से प्रोटेम अध्यक्ष बनाया गया था, मेरा कसूर सिर्फ यह है कि मैंने मंत्रालय से ज्यादा फंड मांगा था, अकादमी के कामकाज को दूसरी संस्थाओं द्वारा किए जाने पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि सभी संस्थाओं का अपन-अपना दायित्व है, वह अकादमी के कामकाज न करें, हमें करने दें। इसके बाद मेरा कार्यकाल खत्म कर दिया गया।
विज्ञापन
पचारणे कहते हैं कि मैंने अभी इस्तीफा नहीं दिया है लेकिन नवंबर 2021 से कामकाज से किनारे कर दिया गया हूं। वह आरोप लगाते हैं कि नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) पर मंत्रालय मेहरबान रहता है लेकिन जो ईमानदारी से काम करता है उसके साथ ऐसा होता है। हमेशा के लिए ललित कला को दबाया जाता है और संस्कृति का नाम बढ़ाया जाता है, जो संस्कृति के क्रिएटर हैं उनको ही किनारे किया जाता है।
विज्ञापन
उत्तम पचारणे ने अमर उजाला में खबर छपने के बाद संवाददाता को फोन पर अपने मन की पीड़ा बताई। उनका कहना है कि सिर्फ जी हुजूरी करने से और कलाकार जैसा दिखने भर से कोई कलाकार नहीं हो जाता। उनका दावा है कि उन्होंने साढ़े तीन साल में जितना काम किया उसे रिकॉर्ड में देखा जा सकता है। मैंने एनजीएमए के लिए सिर्फ इतना कहा कि यह जगह क्या है, किसके लिए है, म्युजियम के लिए है या गैलरी के लिए है..आज हमारी अकादमी में 20 हजार चित्र है, उसे मैं कहां लगाऊं, न हमें सेंट्रल विस्टा में जगह दी, न कहीं और। क्या आप 75 साल की कलाकृतियों को नकार सकते हैं, इन्हें दुनिया के सामने आने का कोई रास्ता तो हो, मेरी तड़प ये थी कि मैं लोगों को बताऊं कि हमारे पास इतने महान कलाकारों की कलाकृतियां हैं, ललित कलाएं हैं। कितना बड़ा भंडार है, लेकिन उसपर किताबें भी नहीं छापने देते।
विज्ञापन
दूसरी तरफ ललित कला अकादमी के अफसर पचारणे के दावे को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि हर संस्थान का संविधान अलग होता है, नियम कानून अलग होते हैं। ललित कला अकादमी के संविधान में साफ तौर पर लिखा है कि अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का ही होगा, एक व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा दो कार्यकाल तक रह सकता है, वह भी लगातार नहीं। नियम के मुताबिक राष्ट्रपति के आदेश से किसी अध्यक्ष को अतिरिक्त अधिकतम 6 महीने तक प्रोटेम अध्यक्ष के तौर पर रखा जा सकता है। पचारणे ये अवधि पूरी कर चुके थे और साढ़े तीन साल का उनका कार्यकाल पूरा हो चुका था।
हालांकि पचारणे के गुस्से को लेकर अकादमी के एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि उन्हें पूरा मौका मिला फिर भी वो पद से हटने को तैयार नहीं हैं, सबपर अनर्गल आरोप लगाते हैं। हालांकि अधिकारी ये भी मानते हैं कि अभी भी यहां अशोक वाजपेयी के ज़माने के कुछ अफसर हैं जो काम नहीं करने देते। यही आरोप पूर्व प्रशासक रहे सीएस कृष्णा शेट्टी भी लगाते रहे थे। अकादमी के अधिकारी बताते हैं कि तमाम अंदरूनी खींचतान और भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद ललित कला अकादमी ने पहले की तुलना में बहुत काम किया है। कोरोना काल में भी और उसके बाद भी।