दीक्षांत : पीएचडी डिग्री देने में रिकॉर्ड बनाएगा दिल्ली विश्वविद्यालय, पहली बार 776 विद्यार्थियों को दी जाएगी उपाधि
डीयू के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब समारोह में 776 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री दी जाएंगी। इससे पहले सत्र 2014-15 में 704 विद्यार्थियों ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी।
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दिल्ली विश्वविद्यालय में शनिवार को आयोजित होने जा रहे 98वें दीक्षांत समारोह में रिकॉर्ड बनने जा रहा है। डीयू के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब समारोह में 776 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री दी जाएंगी। इससे पहले सत्र 2014-15 में 704 विद्यार्थियों ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी।
डीयू परीक्षा शाखा डीन प्रो. डीएस रावत ने बताया कि इस बार के दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में पीएचडी डिग्री दिए जाने का रिकॉर्ड बन रहा है। बीते साल मार्च से जून तक कोरोना लहर चरम पर थी। बावजूद इतनी बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी पीएचडी को पूरा किया। इस दौरान परीक्षा शाखा ने समय से डिग्री जारी करने को लेकर मेहनत की।
प्रो रावत ने बताया कि इससे पहले सत्र 2014-15 में 704 विद्यार्थियों ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी। उस समय इतनी डिग्री इसलिए मिली थी क्योंकि दीक्षांत समारोह करीब 16 माह बाद आयोजित किया गया था। मालूम हो कि इस साल दीक्षांत समारोह में कुल 1, 73, 541 डिजिटल डिग्री, 161 मेडल व 34 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। शनिवार को होने जा रहे दीक्षांत समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि होंगे।
कब कितनी पीएचडी डिग्री दी गई
सत्र डिग्री की संख्या
2013-14 499
2014-15 704
2015-16 693
2016-17 578
2017-18 607
2018-19 592
2019-20 667
2020-21 776
डीयू : कॉलेजों में बढ़ने लगी विद्यार्थियों की उपस्थिति
दिल्ली विश्वविद्यालय बीते सप्ताह करीब दो साल बाद खुल गया है। कॉलेज खुलने के साथ ही कक्षाओं में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी बढ़ने लगी है। अभी भी दूसरे राज्यों के अधिकतर छात्र कैंपस नहीं पहुंच सके हैं। इसके लिए कुछ कॉलेज लाइव क्लास शुरू करने की योजना बना रहे हैं ताकि पढ़ाई का नुकसान नहीं हो। इसके लिए कॉलेज गूगल मीट का सहारा लेंगे।
विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा होने के कारण सामाजिक दूरी का पालन कराना चुनौती है। कॉलेज प्रिंसिपल कहते हैं कि परिसर में एक-दूसरे से दूरी बनाए रखना काफी मुश्किल है। पूरी तरह से कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने की कोशिश की जा रही है। लक्ष्मीबाई कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रत्युष वत्सला ने बताया कि कॉलेज खुलते ही बड़ी संख्या में छात्र कक्षाओं में आ रहे हैं। लेकिन बाहरी राज्यों के अधिकतर छात्र कॉलेज नहीं आ रहे। ऐसे बच्चे कक्षाओं को हाईब्रिड मोड में चाह रहे हैं। इसमें नेटवर्किंग समस्या आ सकती है। लिहाजा छात्र हित को जरूरी समझते हुए गूगल मीट से कक्षाओं को लाइव करने की योजना बना रहे हैं।
महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजीव तिवारी ने बताया कि पहले दिन ही उनके यहां छात्रों की उपस्थिति 70 फीसदी थी। अब कॉलेज खुले एक सप्ताह होने जा रहा है और उपस्थिति बढ़ती जा रही है। राजधानी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजेश गिरी ने बताया कि अब उपस्थिति बढ़ी है और पूरी तरह सेे कक्षाएं हो रही हैं।