डीयू दे रहा मौका: 100वें स्थापना दिवस से मिलेगा अवसर, कभी भी छूटी पढ़ाई, डिग्री पूरी करने के लिए करें अप्लाई
डिग्री पूरा करने के इच्छुक छात्रों को डीयू पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इस संबंध में जल्दी ही गाइडलाइंस जारी की जाएंगी। शताब्दी वर्ष में डीयू की तरफ से छात्रों को यह एक तोहफा होगा।
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दिल्ली विश्वविद्यालय अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। सौ साल के अपने इतिहास में डीयू किन्हीं कारणों से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके छात्रों को डिग्री पूरी करने का अवसर देने जा रहा है। डिग्री पूरा करने के लिए अक्तूबर और फरवरी (2023) में दो अवसर मिलेंगे। डिग्री पूरा करने के इच्छुक छात्रों को डीयू पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इस संबंध में जल्दी ही गाइडलाइंस जारी की जाएंगी। शताब्दी वर्ष में डीयू की तरफ से छात्रों को यह एक तोहफा होगा।
एक मई 2022 से डीयू का शताब्दी वर्ष के समारोह शुरु होंगे पूरे साल के दौरान डीयू कई तरह की गतिविधियों को आयोजित करेगा। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने प्रेस वार्ता में इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि शताब्दी समारोह की शुरूआत एक मई 2022 विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर होगी। कुलपति ने कहा कि डीयू का शताब्दी समारोह एक ऐतिहासिक घटना है। ऐसे अवसर लंबे इंतजार के बाद सौ साल के पश्चात आते हैं। हमें इस ऐतिहासिक घटना का हिस्सा बनने का अवसर मिल रहा है यह गर्व की बात है। सौ साल के जश्न के लिए डीयू कार्यकारी परिषद ने 10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।
कुलपति ने कहा कि शताब्दी वर्ष का जश्न साल भर चलेगा इस दौरान विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। प्रेस वार्ता में प्रो. सिंह ने डीयू के शताब्दी लोगो और टैगलाइन का भी विमोचन किया। शताब्दी लोगो केलिए एक प्रतियोगिता आयोजित की गई थी जिसमें 315 एंट्री मिली थी। जिसकेबाद गार्गी कॉलेज की छात्रा कृतिका किंची के बनाए लोगो का चयन किया गया। शताब्दी वर्ष में डीयू का एक स्मारक टिकट और सिक्के का विमोचन भी किया जाएगा।
डीयू में तकनीकी और मैनेजमेंट से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू होंगे
कुलपति ने बताया कि इस साल डीयू में तकनीकी पाठ्यक्रम शुरु किए जाएंगे। फैक्लटी ऑफ टेक्नॉलॉजी के तहत बीटेक कंप्यूटर साइंस, बीटेक इलेक्ट्रिनिक्स, बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग शुरू की जाएगी। वहीं अब कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग में मैनेजमेंट और इकोनॉमिक्स से जुड़े यूजी-पीजी स्तर के पाठ्यक्रम शुरु किए जाएंगे। इन्हें आगामी सत्र से शुरू करने की योजना तैयार की गई है। इसमें कई डिप्लोमा स्तर के पाठ्यक्रम भी होंगे। इनको करने के लिए एक योग्यता निर्धारित की जाएगी। इसके अलावा खेलों के स्तर पर एक शताब्दी कप का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा युवा उत्सवों की योजना तैयार की गई है।
गांव को गोद लेने, 100 स्थानों पर पेड़ लगाने की योजना
कुलपति प्रो. सिंह ने बताया कि विवि से जुड़े लोगों साथ-साथ समुदाय के लिए भी कार्यक्रम आयोजित होंगे। समाज कल्याण के लिए एक गांव को गोद लेने, स्वास्थय जागरुकता जांच और रक्तदान शिविर आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसरों में 100 स्थानों पर एक साथ 100 पेड़ लगाने की भी योजना है। शताब्दी वर्ष के दौरान डीयू की कॉफी टेबल बुक जारी करने की भी योजना बनाई गई है। विश्वविद्यालय पर आधारित कुछ डॉक्यूमेंट्री का निर्माण भी किया जाएगा। साथ ही डीयू के इतिहास को समेटते हुए लाइट एंड साउंड शो भी होंगे। एक डीयू स्टूडियो लॉन्च किया जाएगा। इसके अलावा लिटरेचर फेस्ट, पुस्तक मेले, दुर्लभ पुस्तकें, पाडुलिपियों की प्रदर्शनी, सेमिनार, सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला और लेक्चर सीरीज भी आयोजित की जाएंगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज प्रोग्राम सहित रिसर्च एंड डेवलपमेंट इनोवेशन प्रैक्टिस जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
दो हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा
कुलपति ने बताया कि पढ़ने के दौरान छात्रों को आवास की समस्या से जूझना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन दो हॉस्टल का निर्माण करने की दिशा में काम कर रहा है। यह दो हॉस्टल होंगे जिसमें एक लड़कियों व एक लड़कों के लिए होगा। उत्तरी दिल्ली के ढक्का में बनने वाले यह हॉस्टल 1000-1000 बिस्तर की क्षमता वाले होंगे। इसके अलावा इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस बिल्डिंग में प्रौद्योगिकी संकाय और अकादमिक व प्रशासनिक ब्लॉक के लिए नए भवन के रूप में सेंटेनरी इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की भी योजना बनाई गई है।
डीयू के गुमनाक नायकों को व विख्यात एल्युमिनाई को सम्मानित किया जाएगा
डीयू ने अपने विख्यात एल्युमिनाई और गुमनाक नायकों, शिक्षण और गैर शिक्षण सदस्यों के साथ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित करने की भी योजना तैयार की है। विख्यात एल्युमिनाई में किन्हें शामिल किया जाएगा इस पर अभी काम किया जा रहा है। कुलपति ने कहा कि विख्यात एल्युमिनाई के साथ-साथ यह भी जरुरी है कि गुमनाक नायकों को भी सम्मानित किया जाएगा। इनकी भी डीयू के इतिहास में काफी अहम भूमिका है