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पड़ोसियों से झगड़े में मारपीट व छेड़छाड़ करने वालों पर दो लाख रुपये जुर्माना

Sat, 23 Jan 2021 05:54 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 23 Jan 2021 05:54 PM IST
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delhi two lac rupees fine on people fighting with neighbors and assaulting them
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली में पड़ोसियों के झगड़े में एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष की महिलाओं से मारपीट व छेड़छाड़ करना काफी मंहगा पड़ गया। छह वर्ष चले मुकदमे के ध्यानार्थ अदालत ने दर्ज प्राथमिकी रद्द करते हुए उन पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। अदालत ने उन्हें दो लाख रुपये पिछड़े वर्ग के लिए काम करने वाली चार संस्थाओं में जमा करवाने का निर्देश दिया है।

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न्यायमूर्ति सूरेश कैत के समक्ष अभियोजन पक्ष ने दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का विरोध किया लेकिन अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोनों पक्ष एक ही इलाके में रह रहे हैं। दोनों ने सौहार्दपूर्ण समझौता किया है, ताकि वे मिलकर रह सके। ऐसे में न्याय के हित में होगा कि समझौते को स्वीकार कर प्राथमिकी रद्द कर दी जाए।
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अदालत ने आरोपियों को दो लाख रुपये में से 50 हजार रुपये मिडिल आय ग्रुप लीगल एड सोसायटी, 50 हजार रुपये निर्मल छाया संस्था, 50 हजार रुपये दिल्ली पुलिस शहीद फंड व 50 हजार रूपये किंग्जवे कैंप स्थित नेत्रहीन सेवा कुटीर में जमा करवाने का निर्देश दिया है। अदालत ने उन्हें यह राशि चार सप्ताह में जमा करवाने का निर्देश दिया है।
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पेश मामले के अनुसार उत्तम नगर इलाके में राजू अग्रवाल व अन्य का 16 अगस्त 2014 को पडोसियों से झगड़ा हो गया। इस मामले में पुलिस ने मारपीट, छेड़छाड़ व अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था। साकेत कोर्ट के मध्यस्थता सेंटर के प्रयास से दोनों पक्षों में समझोता हो गया और वे प्राथमिकी रद्द करवाने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया।


अभियोजन अधिकारी ने आपत्ति जताते हुए कहाकि यह अदालत वर्ष 2015 में उनकी याचिका खारिज कर चुकी है। इसके अलावा मामले में जांच के बाद आरोपपत्र दायर किया जा चुका है और सुनवाई अभियोग तय करने के लिए जारी है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी रद्द न की जाए। अदालत के रवैये को देख उन्होंने कहाकि यदि प्राथमिकी रद्द की जाती है तो याचिकाकर्ता पर भारी जुर्माना लगाया जाए ताकि समाज में एक अच्छा संदेश जाए।

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