फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi riots Charges framed against father-son for destroying mosque and setting it on fire

दिल्ली दंगा: मस्जिद को क्षतिग्रस्त करने और आग लगाने के मामले में पिता-पुत्र के खिलाफ अभियोग तय

Mon, 22 Nov 2021 11:11 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 22 Nov 2021 11:11 PM IST
सार

अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उनके मुवक्किलों को फर्जी मामले में फंसाया गया है और उन्हें आरोपमुक्त किया जाए। बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि घटना की रिपोर्टिंग और गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी हुई थी। 

विज्ञापन
Delhi riots Charges framed against father-son for destroying mosque and setting it on fire
कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock

विस्तार

अदालत ने दंगों के दौरान एक मस्जिद को क्षतिग्रस्त करने, आग लगाने, तोड़फोड़ करने और पथराव करने के मामले में एक पिता-पुत्र के खिलाफ अभियोग तय कर दिए। अदालत ने कहा दोनों के खिलाफ आगजनी और दंगा करने के आरोप में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है।

विज्ञापन


शिकायतकर्ता के अनुसार 25 फरवरी 20 को दिल्ली के खजूरी खास इलाके में 'जय श्री राम' के नारे लगाने वाली और मस्जिद को क्षतिग्रस्त करने वाली हिंसक भीड़ में आरोपी मिथन सिंह और उनके बेटे जॉनी कुमार शामिल थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट के पूछने पर दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार करने से इनकार करते हुए स्वयं को निर्दोश बताया। अदालत ने उनका तर्क सुनने के बाद अभियोजन पक्ष को गवाहों को पेश करने की प्रक्रिया शुरु करने का निर्देश दिया है। अदालत ने आरोपियों के खिलाफ दंगा करने, घातक हथियार का प्रयोग, गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने, आगजनी, विस्फोटक पदार्थ का प्रयोग, जबरन घर में घुसने के आरोप में मुकदमा चलाने का निर्देश दिया है।

विज्ञापन

अदालत ने कहा कि गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी जानबूझकर नहीं की गई थी और दंगे की घटना के दौरान और बाद में क्षेत्र में मौजूद स्थिति के कारण हुई थी। दंगों के बाद भी कई दिनों तक इलाके में आतंक और आघात का माहौल बना रहा। अदालत ने कहा ऐसे में एक सप्ताह गवाहों के बयान दर्ज करने संबंधी पुलिस का तर्क संतोषजनक है।

शिकायतकर्ता इसराफिल के अनुसार, मिथुन सिंह और उनके बेटे जॉनी कुमार उस हिंसक भीड़ का हिस्सा थे, जिसने 25 फरवरी, 2020 को उनके घर के पास 'जय श्री राम' के नारे लगाए और आग लगा दी।

इससे शिकायतकर्ता को अपनी जान बचाने के लिए फातिमा मस्जिद पर चढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा भीड़ ने फिर मस्जिद को क्षतिग्रस्त कर दिया और आग लगा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मिथन सिंह ने अपने बेटे को मस्जिद में एक छोटा गैस सिलेंडर फेंकने का भी आह्वान किया। 

अदालत ने कहा शिकायकर्ता के बयान से स्पष्ट है कि इसके बाद पिता-पुत्र ने भीड़ के साथ एक विशेष समुदाय के घरों पर ज्वलनशील सामग्री वाली बोतलें फेंक दीं। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि इसराफिल के अलावा प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद तैय्यूब, महबूब आलम, शादाब और मोहम्मद अकरम ने भी भीड़ में शामिल दो आरोपियों को फातिमा मस्जिद के साथ-साथ उनके घरों को क्षतिग्रस्त और आग लगाते देखा था। उन्होंने तर्क दिया कि इन गवाहों के स्पष्ट बयानों को देखते हुए जो दोनों आरोपियों को अच्छी तरह से जानते थे और वे सभी एक ही पड़ोस में रहते थे से स्पष्ट है कि दोनों आरोपियों ने बर्बरता, पथराव और निजी और सार्वजनिक को जलाने का सहारा लिया था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed