{"_id":"648520969e8c9a65bc04e8b6","slug":"delhi-police-pulled-up-for-presenting-the-complainant-as-a-false-witness-2023-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi : शिकायतकर्ता को झूठे गवाह के रूप में पेश करने पर पुलिस की खिंचाई, अदालत ने बरी किया आरोपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi : शिकायतकर्ता को झूठे गवाह के रूप में पेश करने पर पुलिस की खिंचाई, अदालत ने बरी किया आरोपी
Sun, 11 Jun 2023 06:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 11 Jun 2023 06:47 AM IST
सार
अदालत ने शिकायतकर्ता को एक झूठे गवाह के रूप में पेश करने के लिए दिल्ली पुलिस की खिंचाई की।
विज्ञापन
demo pic...
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
विस्तार
कड़कड़डूमा कोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के एक मामले में एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने शिकायतकर्ता को एक झूठे गवाह के रूप में पेश करने के लिए दिल्ली पुलिस की खिंचाई की।
विज्ञापन
कड़कड़डूमा कोर्ट के चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट शिरीष अग्रवाल ने साथ ही पुलिस के गवाह की गवाही पर भी भरोसा नहीं किया। अदालत ने कहा ऐसा प्रतीत होता है कि उनका बयान इस मामले को सुलझाने के लिए झूठा और देरी से तैयार किया गया था।
विज्ञापन
अदालत ने एक हेड कांस्टेबल द्वारा नूर मोहम्मद की पहचान पर भी सवाल उठाया, जिसने कथित दंगे का चश्मदीद होने का दावा किया था। अदालत ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि एक पुलिसकर्मी जो भीड़ को रोकने के लिए प्रयास करने के लिए पर्याप्त साहसी हो सकता है, जब दंगा और लूटपाट हो रही थी तो मूक दर्शक के रूप में वहां खड़ा था।
विज्ञापन
उक्त गवाह द्वारा कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, वह खड़े होकर बस देख रहा था और प्रतीक्षा कर रहा था, उसने किए जा रहे अपराध का वीडियो बनाना भी उचित नहीं समझा, भले ही वह अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी पर था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता मो. राशिद खजूरी खास पुलिस स्टेशन आया था और उसने नूर मोहम्मद की पहचान उन लोगों में से एक के रूप में की थी, जिन्होंने उसकी दुकान में तोड़फोड़ की थी और वह भीड़ का हिस्सा था। नूर मोहम्मद पहले से ही थाने में मौजूद था और एक अन्य मामले में उससे पूछताछ की जा रही थी। शिकायतकर्ता का बयान 2 अप्रैल, 2020 को दर्ज किया गया था और नूर मोहम्मद को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया था।
हालांकि, मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता को अभियोजन पक्ष ने मुकरा हुआ गवाह घोषित कर दिया। दरअसल शिकायतकर्ता ने अपराधी के रूप में नूर मोहम्मद की पहचान करने से इन्कार का दिया। शिकायतकर्ता ने इस बात से इन्कार किया कि नूर मोहम्मद को उसकी उपस्थिति में गिरफ्तार किया गया था या उसने 2 अप्रैल, 2020 को पुलिस स्टेशन में उसकी पहचान की थी।