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किसान आंदोलन : महिलाओं ने संभाली लंगर की जिम्मेदारी, 'शक्ति' के बाद दिखा दूसरा रूप
Wed, 10 Mar 2021 04:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 10 Mar 2021 04:57 AM IST
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टीकरी बॉर्डर पर रोटियां सेकती महिलाएं...
- फोटो : अमर उजाला
नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर महिलाएं भी बराबरी से डटी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जहां उनका शक्ति रूप दिखा तो अगले ही दिन उनका एक दूसरा अद्भुद रूप दिखाई दिया। फिर से प्रेम व मातृत्व भाव में लौटी महिलाओं ने आंदोलन स्थलों पर घर की तरह साफ-सफाई और लंगर बनाने का जिम्मा अपने हाथ ले लिया।
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टीकरी बॉर्डर पर बुधवार को भी बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। ज्यादातर बुजुर्ग महिलाएं किसान आंदोलन स्थल पर रुकी हैं जिन्होंने घर की तरह ही अपने टेंट के आस-पास साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभाल रखी है। लंगर बनाने में एक दूसरे का सहयोग कर रही हैं।
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दर्जनों महिलाएं चपाती बनाते, सब्जियां काटते नजर आ रही हैं। टीकरी बॉर्डर पर उगराहां मोर्चे को छोड़कर दूसरे मोर्चों पर महिलाओं की मौजूदगी कम थी। लेकिन महिला दिवस पर आईं महिलाएं टीकरी बॉर्डर पर रुक गई हैं।
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जबतक सरकार नहीं मानेगी, कार्यक्रम जारी रहेंगे : लोगोवाल
टीकरी बॉर्डर के पकौड़ा चौक पर भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के उपाध्यक्ष जसविंदर सिंह लोगोवाल ने कहा कि जबतक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं करेगी, जबतक एमएसपी पर पक्का कानून नहीं बन जाता किसानों के कार्यक्रम जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही किसान आंदोलन संयोजन मंडल अपने अगले कार्यक्रम की घोषणा करेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन की मजबूती के लिये लगातार कार्यक्रमों का आयोजन बहुत जरूरी है।