दिल्ली : महिला वकील से 27 साल पहले हुई थी मारपीट, दोषी पर अब हुआ 40 हजार जुर्माना
डीएचसीबीए के पूर्व अध्यक्ष राजीव खोसला पर 40 हजार रुपये जुर्माना। पीड़िता पूर्व जज को मुआवजे के रूप में 20 हजार रुपये देने का निर्देश। वकीलों ने भरी अदालत में लगाए नारे।
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अदालत ने करीब 27 वर्ष पहले एक महिला वकील से मारपीट करने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) के पूर्व अध्यक्ष राजीव खोसला पर 40 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने उन्हें पिछले माह दोषी करार दिया था।
मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गजेंद्र सिंह नागर ने खोसला पर मारपीट के आरोप में 20 हजार रुपये व जान से मारने की धमकियां देने पर भी 20 हजार रुपये जुर्माना किया है। अदालत ने इस जुर्माने में से 20 हजार रुपये पीड़िता को देने का निर्देश दिया है।
अदालत ने खोसला को एक महीने के भीतर जुर्माना राशि जमा करवाने का निर्देश दिया है।अदालत के फैसला सुनाने के दौरान करीब 100 से ज्यादा वकील अदालत में उपस्थित थे, कुछ वकील मेजों और कुर्सियों के ऊपर खड़े थे। इस दौरान उन्होंने वकील एकता जिंदाबाद और राजीव खोसला जिंदाबाद के नारे लगाए। पुलिस ने फैसले के ध्यानार्थ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी।
खोसला को पिछले महीने मारपीट के मामले में दोषी ठहराया गया था। शिकायतकर्ता सुजाता कोहली ने आरोप लगाया था कि खोसला ने अगस्त 1994 में उसे बाल पकड़कर घसीटा। इन धाराओं के तहत अधिकतम सजा में दो साल तक की जेल की सजा होनी चाहिए। कोहली घटना के समय तीस हजारी अदालत में वकील थी और बाद में दिल्ली न्यायपालिका में न्यायाधीश बनी और पिछले साल जिला और सत्र न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हुई है।
वकीलों ने संबंधित जज पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया। खोसला की और से पेश एडवोकेट बीरेंद्र ने अदालत को बताया कि पीड़िता ने जज बनने के बाद अपनी स्थिति का अनुचित लाभ उठाया। वहीं वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पेश हुई कोहली ने कहा कि फैसले के बाद खोसला ने कोर्ट और जज के खिलाफ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया।
खोसला के वकील ने इस आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उनके मुवक्किल ने न तो अदालत में असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया और न ही उसे धमकाया और न ही गवाहों के साथ छेड़छाड़ की। उन्होंने अदालत से कहा खोसला ने सद्भावना दशाई है।
सुजाता कोहली ने आरोप लगाया था कि घटना के सम खोसला जुलाई 94 में दिल्ली बार एसोसिएशन (डीबीए) के सचिव थे। उन्होंने कोहली से एक सेमिनार में शामिल होने को कहा और उनके मना करने पर उन्हें धमकी दी कि बार एसोसिएशन से सभी सुविधाएं वापस ले ली जाएंगी और उन्हें उनकी सीट से भी बेदखल कर दिया जाएगा।
कोहली ने एक अगस्त 94 एक दीवानी वाद दायर किया था अदालत के आदेश के रोक के बावजूद उनकी मेज और कुर्सी को उनकी जगह से हटा दिया गया। जब सुनवाई कर रहे सिविल जज घटनास्थल का निरीक्षण करने करने गए तो खोसला ने 40-50 वकीलों की भीड़ के साथ कथित तौर पर उसे घेर लिया। सुजाता ने आरोप लगाया कि खोसला ने उसके बाल खींचे, उसे घसीटा, उसकी बाहों को घुमाया, गंदी गालियां दीं।
हाईकोर्ट ने कहा- विश्वास का संकट है, अपराधियों पर हो कड़ी कार्रवाई
हाई कोर्ट ने कहा कि समाज अपराध के कारण व्यवस्था पर विश्वास खो रहा है जिस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी होगी। अदालत ने लूटपाट व हत्या के दोषियों की अपील खारिज करते हुए उक्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा लोगों के लिए एक अच्छा, सम्मानजनक जीवन व्यतीत करने के लिए सुरक्षा सर्वोपरि है और अगर अपराध के चलते एक युवा की मौत हो जाती है तो यह राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भम्भानी की पीठ ने इस मामले दोषियों की अपील को खारिज करे हुए कहा दोनों दोषियों के कारण 25 वर्षीय फैक्ट्री कर्मी को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा। दोनों ने उससे मोबाइल फोन लूटने के दौरान हत्या कर दी थी।
पीठ ने कहा वर्तमान एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण मामला है जहां एक युवा लड़के ने जो कड़ी मेहनत कर रहा था ने दुर्भाग्य से समाज के अपराधियों द्वारा बनाए गए खतरे के कारण अपनी जान गंवा दी। लोगों की सुरक्षा और संरक्षा उनके लिए एक अच्छा, गरिमामय जीवन व्यतीत करने के लिए स्वयंसिद्ध रूप से सर्वोपरि हैं। अपराध के कारण समाज व्यवस्था में विश्वास खोता जा रहा है। इस तरह अपराधियों से कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।
पेश मामले में जुलाई 2012 में एक रात जब चप्पल की फैक्ट्री में काम करने वाले गवाह और मृतक काम से लौट रहे थे, तभी दोषियों ने मोटरसाइकिल पर उनका पीछा किया व गवाह की जेब में जबरन तलाशी ली। बाद में उन्होंने पीड़िता का मोबाइल फोन छीन लिया विरोध करने पर उन्होंने चाकू से हमला कर दिया।
अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में पेश साक्ष्यों से स्पष्ट है कि अभियोजन पक्ष उनका अपराध बिना शक के साबित करने में सफल रहा है। उनकी नजर में निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।