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किसान आंदोलनः तीन साल की रोजलीन गिल भर रही उत्साह, दादा के साथ परेड में लेगी हिस्सा

Sat, 23 Jan 2021 05:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 23 Jan 2021 05:19 AM IST
सार

  • रोजलीन अपने दादा दादी और चाचा के साथ सिंघु बॉर्डर पर पहुंची हैं, यहां उनके नारे सुनने के लिये लग रही भीड़ 
  • तीन साल की रोजलीन गिल ने अपनी विंटेज कार संग संभाला मोर्चा, 26 को परेड में होंगी शामिल

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Delhi news: Three-year-old Rosalyn Gill encouraging agitating farmers
विंटेज कार पर सवार रोजलीन... - फोटो : amar ujala

विस्तार

सिंघु बॉर्डर पर मोगा से आईं रोजलीन गिल केवल तीन साल की है लेकिन उसकी चटख आवाज और जज्बे को देखकर बड़े-बड़े लोग तालियां बजाने को बेबस हो रहे हैं। उसे देखने के लिये भीड़ इकट्ठी हो रही है।

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रोजलीन ने अपने दादा-दादी, चाचा परनाम सिंह और 1926 मॉडल की अपनी विंटेज कार के साथ सिंघु बॉर्डर पर मोर्चा संभाला हुआ है। परनाम सिंह गिल ने बताया कि रोजलीन 26 जनवरी को संभावित किसानों की ट्रैक्टर परेड में भी हिस्सा लेगी।
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रोजलीन गिल चार दिन से सिंघु बॉर्डर पर डटी हुई है। शुक्रवार को वह अपनी विंटेज कार के आगे खड़ी हाथ में माइक थामे किसान मजदूर एकता जिंदाबाद के नारे लगाती दिखी।
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बेहद बुलंद आवाज और घंटों बिना थके वह किसानों के समर्थन में नारे लगा रही थी। परनाम सिंह विंटेज कार की स्टीयरिंग पर थे जबकि पीछे की सीट पर रोजलीन की दादी बैठी थीं और आगे उनके दादा नैब सिंह रोजलीन के साथ सुर में सुर मिला रहे थे। 

लोगों को रोजलीन का जज्बा देखकर ताज्जुब हो रहा था कि इतनी कम उम्र की छोटी सी बच्ची को इतने नारे आखिर कैसे याद हो गए। परनाम सिंह ने बताया कि रोजलीन का दिमाग तेज है और वह अपनी उम्र के बाकी बच्चों से खासा मजबूत है। रोजलीन को अपने दादा नैब सिंह से खासा लगाव है। नैब सिंह ने रोजलीन को किसान आंदोलन से जुड़ी तमाम बातें सिखाई हैं। 

मौके पर उपस्थित नैब सिंह ने कहा कि यदि यह किसान विरोधी कानून रद्द नहीं हुआ तो उनके बच्चों का भविष्य गर्त में चला जाएगा इसलिए जरूरी है कि बच्चे भी इसकी सच्चाई से वाकिफ रहें।


इसीलिये उन्होंने अपनी तीन साल की इस मामूम पोती को सरकार की मानसिकता के विषय में सब कुछ समझा दिय़ा है जिसे रोजलीन गिल ने याद कर लिया है। तभी तो वह माइक पकड़कर कहती हैं कि साड्डा हक लेके रहेंगे।

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