बेनतीजा बातचीत : पुलिस और किसानों के बीच दूसरे दौर की वार्ता में भी नहीं सुलझा मसला
- 26 जनवरी की हिंसा को देखते हुए इस बार दिल्ली पुलिस किसानों को नई दिल्ली इलाके में प्रवेश करने की नहीं दे रही इजाजत
- किसान 22 जुलाई से संसद मार्च के अपने एलान को वापस लेने को तैयार नहीं
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मानसून सत्र में संसद मार्च करने पर अड़े किसान संगठनों व दिल्ली पुलिस के बीच दूसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। मंगलवार अलीपुर के एक बैंक्वेट हॉल में हुई बैठक में दिल्ली पुलिस संसद सत्र दौरान नई दिल्ली इलाके में किसानों को इजाजत देने को तैयार नहीं थी। 26 जनवरी की हिंसा के आधार पर पुलिस का कहना था कि स्वतंत्रता दिवस से पहले बेहद संवेदनशील नई दिल्ली इलाके में किसानों को जुटना सुरक्षा के नजरिए से ठीक नहीं होगा जबकि किसान शांतिपूर्वक आंदोलन करने की दलील देते दिखे।किसान संगठनों ने भरोसा दिया कि संसद मार्च में शामिल होने वाले सभी प्रदर्शनकारियों की पहले की पहचान कर ली जाएगी। सरकारी दस्तावेजों के आधार पर ही उनको मार्च में शामिल किया जाएगा। अगर कोई अनुशासनहीनता करता है तो उस पर कार्रवाई भी की जाएगी।
दावों-प्रतिदावों के बीच दोनों पक्ष सहमति का कोई फार्मूला नहीं निकाल सके। संसद मार्च के 36 घंटे पहले तक गतिरोध बना हुआ है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि मानसून सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ वह कोई समझौता नहीं कर सकते। खासतौर से इसलिए भी कि इस वक्त आतंकी हमले का खतरा है। इसके इनपुट केंद्रीय सुरक्षा एजेसियों से दिल्ली पुलिस को पहले ही मिले हुए हैं। इस वजह से इस इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर है।
दूसरी तरफ किसान संगठन संसद मार्च के अपने पुराने एलान को वापस लेने का तैयार नहीं हैं। इसके तहत 22 जुलाई से पूरे मानसूत्र के दौरान सिंघु बॉर्डर से बसों में 200 प्रदर्शनकारी जंतर मंतर के लिए रवाना होना है। सभी के पास आधार कार्ड, पहचान पत्र अनिवार्य होगा ताकि आंदोलन की आड़ में हालात को बिगाड़ने की किसी साजिश को अंजाम तक नहीं पहुंचने दिया जा सके। संयुक्त किसान मोर्चा के बलवीर सिंह राजेवाल ने बताया कि बैठक में अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।
दिल्ली पुलिस बार-बार दबाव डाल रही है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या काफी कम की जाए। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था भंग होने का हवाला पुलिस दे रही है। जबकि मोर्चा ने पहले ही पुलिस को आश्वस्त किया है कि मार्च शांतिपूर्ण और अनुशासित होगा। पुख्ता पहचान के बाद ही किसानों को मार्च में प्रवेश करने दिया जाएगा। इसके लिए किसान आंदोलनकारी अपने पूर्व एलान पर अभी भी कायम हैं।
शांतिपूर्ण रहेगा प्रदर्शन
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ने बताया कि 22 जुलाई से सत्र के दिन 200 किसान पहचान बैज लगाकर सिंघु बॉर्डर से जंतर मंतर के लिए रवाना होंगे। पुलिस ने समिति के सदस्यों से प्रदर्शनकारियों की संख्या कम करने के लिए कहा। इसपर समिति ने कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने का भरोसा देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध होगा। हालांकि पुलिस की तरफ से अभी तक मोर्चा को लिखित सूचना नहीं मिली है।