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चलती दिल्लीः रिंग रेल पर नहीं दौड़ रही पैसेंजर ट्रेन, नेटवर्क में उलझ गया मामला

Thu, 04 Mar 2021 05:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 04 Mar 2021 05:27 AM IST
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Delhi News : public transport systen in the capital and options of ring rail
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अराउंड द दिल्ली एट 10 रुपया, मतलब दिल्ली का एक चक्कर लगाने का खर्च महज दस रुपये। ऊपर से जाम में फंसने की चिंता भी नहीं है। वहीं, हवा में जहरीली गैसों के घुलने का खतरा भी कम है। दुर्घटना की आशंका भी न्यूनतम है। इन और इसी तरह की सब खूबियों के बाद भी रिंग रेलवे फिलवक्त बेपटरी है। भारतीय रेलवे व दिल्ली सरकार के बीच के फासले से लो कास्ट ट्रेन को फास्ट ट्रैक नहीं मिल सका है। इस वक्त इस ट्रैक पर मालगाड़ियां शोभा बढ़ा रही हैं। दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन की लाइफलाइन बनने की संभावना रखने वाली रिंग रोड की खूबियों व इसके विकास में आने वाली बाधाओं पर विस्तार से रोशनी डालती अमर उजाला संवाददाता नवनीत शरण की रिपोर्ट....

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नेटवर्क में उलझी रेल
दिल्ली की लाइफ लाइन रही रिंग रेल अपने ही नेटवर्क में उलझ गई है। वक्त के साथ इसके स्टेशन तक पहुंचना मुश्किल है। जगह-जगह अतिक्रमण की वजह से स्टेशन तक पहुंचना मुश्किल है। इसके साथ ही स्टेशन तक पहुंचने के लिए किसी फीडर बस की सुविधा नहीं है। रेलवे हर बार दिल्ली सरकार को अतिक्रमण हटाने व फीडर बस चलाने का सुझाव देता है तो दिल्ली सरकार रेलवे की कमियां गिना देती है। ऐसे में रिंग रेल अपग्रेड करने की योजना उलझ के रह गई है।
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मेट्रो व रैपिड रेल वाली दिल्ली में पिछड़ी रिंग रेल
राजधानी में सार्वजनिक वाहनों को लगातार बढ़ावा देने की कवायद तो हो रही है। मेट्रो, रैपिड रेल और कभी मोनो रेल चलाने की बात तो हुई लेकिन चार दशक पहले शुरू हुई रिंग रेल पटरी पर दम तोड़ रही है। फीडर बस के बिना रिंग रेल को पुर्नजीवित करना बेहद ही मुश्किल है कयोंकि रिंग रेल के स्टेशन तक पहुंचना यात्रियों के लिए कठिन, अतिक्रमण के कारण पैदल चलना भी मुश्किल। चालू रोड नहीं होने की वजह से शरारती तत्व का भी डर रहता है।
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प्रदूषण के खिलाफ जंग में सहयोगी
पिछले दो दशक से दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ जंग तो लड़ रही है। कभी सीएनजी बस उतारी जाती है तो कभी डीजल कार को सड़क से 10 साल में हटाने की बात की जाती है तो स्क्रैप नीति लाई जाती है। लेकिन जो ट्रेन प्रदूषण को कम करने में सहयोगी हो सती है उसका सुध लेने वाला कोई नहीं है।

सड़क पर मौत का आकड़ा कम करने में सहयोगी 
रिंग रेल को पुर्नजीवित की जाए तो ना केवल दिल्ली की सड़कों की ट्रैफिक कम होगी बल्कि आए दिन होने वाले दुर्घटना भी कम हो जाएगी। वैसे भी ट्रेन की दुर्घटना के मामले लगातार तीसरे साल जीरो तक पहुंच गए है। ट्रेन महफूज यातायात व्यवस्था की श्रेणी में भी अन्य के मुकाबले आता है।

मेट्रो से स्टेशन की कनेक्टिविटी भी है
मेट्रो फेज तीन के पूरा होने पर रिंग रेल के कई स्टेशन मेट्रो से भी जुड़ गए है। ऐसे में ट्रांजिट करने में भी अब ज्यादा दिक्कत नहीं है। रिंग रेल सराय काले खां, सरोजनी नगर, धौला कुंआ, नारायणा विहार समेत करीब एक दर्जन स्टेशन जुड़ गए है। बावजूद इसे पुर्नजीवित करने की योजना खटाई में पड़ी हुई है। 

समय की बचत
रिंग रेल को पुर्नजीवित किया गया तो ना केवल किफायती यात्रा होगी बल्कि दुर्घटना रहित और समय की बचत भी होगी। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि नई दिल्ली से सफदरजंग का सफर महज 20 मिनट का है। जबकि सड़क मार्ग से व्यस्तम समय में एक घंटे से कही अधिक लग जाते है।
 

रिंग रेल का नेटवर्क:

  • एशियाड (1982) के दौरान शुरू हुई रिंग रेल की याद व अहमियत एक बार फिर दिल्ली सरकार को आई है। दिल्ली के फैलाव केसाथ रिंग रेल का दायरा भले ही छोटा दिखता हो लेकिन शहर केप्रमुख स्टेशनों व इलाकों को जोडता है।
  • साउथ दिल्ली के स्टेशन-लाजपत नगर, सेवा नगर, लोधी कॉलोनी, सरोजनी नगर हॉल्ट, सफदरजंग, चाणक्यपुरी हॉल्ट, सरदार पटेल मार्ग हॉल्ट, बरार स्क्वायर, दिल्ली इंद्रलोक हॉल्ट, नारायणा विहार हॉल्ट, कृति नगर हॉल्ट, नारायणा विहार हॉल्ट।
  •  उत्तरी दिल्ली: निजामुद्दीन, प्रगति मैदान, तिलक ब्रिज, शिवाजी ब्रिज, नई दिल्ली, सदर बाजार, दिल्ली किशनगंज, विवेकानंद पूरी, दया बस्ती और शकूरबस्ती।

आंकड़ों में रिंग रेल:

  • रिंग रेलवे चलाना लगातार घाटे का सौदा, मालगाड़ी चलाकर हो रही है भरपाई।
  • लो कास्ट ट्रेन को चाहिए फास्ट ट्रैक व स्टेशन तक पहुंचने का रास्ता।
  • रिंग रेल ट्रैक पर एक दर्जन ईएमयू कोविड के पहले चलती थी। जिसमें 90 प्रतिशत खाली रहती थी।
  • पीक ऑवर में दोनों दिशाओं से 12 ट्रेन चलती थी। 
  • एक ट्रेन में एक साथ दो हजार से अधिक यात्री सफर कर सकते हैं, लेकिन यात्रियों की संख्या ढाई सौ से भी कम रहती है। 
  • दिल्ली का पूरा चक्कर यानी हजरत निजामुद्दीन से हजरत निजामुद्दीन का सफर 90 मिनट लगता है।
  • लाइन बिछाई गई                अक्तूबर 1975 
  • यात्री रेलगाड़ी का परिचालन        अगस्त 1982
  • शुरूआत में परिचालन             8 ईएमयू रेलगाडिय़ां 
  • एशियाई खेल के समय            24अतिरिक्त सेवा रेलगाडिय़ां
  • रिंग रेलवे की कुल दूरी            35.34 किलोमीटर
  • स्टेशनों एवं हाल्ट की संख्या            21
  • स्टेशनों पर तय ठहराव            10-15 सेकेंड

विशेषज्ञ ने कहा- इच्छाशक्ति की जरूरत
इसमें कोई दो राय नहीं कि रिंग रेल दिल्ली की लाइफ लाइन बन शक्ति है। प्रदूषण मुक्त दिल्ली में सहयोगी बन सकती है तो दुर्घटना रहित यातायात व्यवस्था की सवारी भी हो सकती है। बस जरूरत है तो इच्छा शक्ति की। कमी यह है कि सरोजनी नगर, लाजपतनगर, बरार स्क्वायर समेत कई स्टेशन दिल्ली की पॉश इलाके से तो जुड़े है, लेकिन स्टेशन तक पहुंचने व वहां से बाहर जाने के लिए डीटीसी बस की सुविधा नहीं है।हालांकि, दिल्ली का परिदृश्य अब बदल गया है। आनंद विहार-निजामुद्दीन-पुरानी दिल्ली को कनेक्ट करने वाली नई रेल लाइन की अब जरूरत है। इस तरह से मेट्रो की पहुंच यहां तक बढ़ी है।
एके पूठिया, पूर्व महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे

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