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Yamuna Pollution : यमुना को साफ करने का हर उपाय हुआ बेकार, न्यूनतम प्रवाह बिना नहीं उद्धार
Sat, 27 Aug 2022 04:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 27 Aug 2022 04:10 AM IST
सार
Delhi News : सीधा सा मतलब है कि यमुना साल में एक बार खुद को साफ रखने का फार्मूला भी देती है और वह है कि हम उसका न्यूनतम प्रवाह बनाए रखें और नदी साफ करने के बजाय इसे गंदा करना बंद कर दें। यमुना एक्शन प्लान के दो फेज में करीब 1514.70 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।
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मानसूनी मौसम में यमुना...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मानसूनी बारिश से यमुना इस वक्त लबालब है। ऐसा हर साल होता है, जब यमुना जैसी प्रदूषित नदी भी खुद को साफ कर लेती है। बाद के दस महीनों में दिल्ली फिर से इसे गंदा करती है। ऊपर से उसका पानी बैराज से निकाल दिया जाता है।
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सीधा सा मतलब है कि यमुना साल में एक बार खुद को साफ रखने का फार्मूला भी देती है और वह है कि हम उसका न्यूनतम प्रवाह बनाए रखें और नदी साफ करने के बजाय इसे गंदा करना बंद कर दें।
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यमुना एक्शन प्लान के दो फेज में करीब 1514.70 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।अब तक सीरीज के जरिये यमुना की बदहाली सामने लाने का मकसद भी यही था कि नदी की इस खूबी से हम सीख सकें।
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यमुना का जल प्रवाह
- 1940 तक यमुना का प्रवाह अबाधित था।
- 1940, 1953, 1976, 2002 के बीच ताजेवाला/हथिनीकुंड बैराज की ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ी। और 8,000, 14,000, 16,000 व 25,000 क्यूसेक पानी नहरों में डाला।
- 2015 तक हरियाणा हथिनी कुंड से महज 160 क्यूसेक पानी छोड़ता था। वह भी इसलिए कि यमुना में जलीय जीव बचे रहें।
- 2015 के यमुना जिए अभियान की याचिका पर एनजीटी ने सुनवाई की और मानिटरिंग कमेटी ने न्यूनतम 10 क्यूमेक्स पानी छोड़ने का आदेश हरियाणा को दिया।
- मॉनिटरिंग कमेटी ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) को ई-फ्लो सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी। 2020 में 40 क्यूमेक्स तक पानी हथिनीकुंड से छोड़ने की सिफारिश की है। लेकिन अभी तक हरियाणा 10 क्यूमेक्स पानी ही छोड़ रहा है।
- 1959 में बजीराबाद में बांध बनाकर दिल्ली में भी पानी रोक लिया जाता है।
आगे की राह
- यमुना को उसके अपने हिस्से का पानी देना होगा।
- आईटीओ व वजीराबाद बैराज के सभी चैनल हमेशा के लिए खोल दिए जाएं।
- दिल्ली के लिए पानी अपस्ट्रीम में पल्ला से लिफ्ट किया जाए।
- 2024 में दिल्ली, हरियाणा, यूपी, हिमाचल प्रदेश व राजस्थान के बीच जल समझौते की समीक्षा होनी है। इसमें एनआईएच की उस सिफारिश को सभी मानें, जिसमें हथिनीकुंड से 40 क्यूमेक्स पानी छोड़ने की बात है।
- किसी भी कीमत पर फैक्टरियों की किसी भी तरह की गंदगी न डाली जाए। वहां से निकलने वाले दूषित पानी को शोधित कर बाहर ही खपाया जाए।
- अशोधित सीवेज यमुना में न मिले।
- यमुना फ्लड प्लेन का अतिक्रमण बंद हो। इसमें कोई बंटवारा न हो।
- नम भूमियां पुनर्जीवित की जाएं।
- प्राकृतिक तौर पर नालों के सीवेज के शोधन के लिए कॉस्ट्रक्टेड वेटलैंड का अधिकतम निर्माण हो।
सरकार और यमुना
- केंद्र सरकार ने यमुना की अविरल करने के लिए 1993 में यमुना एक्शन प्लान (वाईएपी) शुरू किया। दो चरणों में यह 2013 में पूरा हुआ।
- वाईएपी के दोनों फेज में केंद्र के 1514.70 करोड़ खर्च हुए।
- यमुना की स्वच्छता को 2014 में इसे नेशनल रीवर कन्जर्वेशन प्लान (एनआरसीपी) में शामिल कर लिया।
- 2018 में केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि 17 प्रोजेक्ट के लिए करीब 3941.73 करोड़ रुपये खर्च का आकलन है। इसका करीब 2361.08 करोड़ दिल्ली में खर्च होगा। बाकी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लिए है।
- इस वक्त नमामि गंगा प्लान (एनएमसीजी) 1268 एमएलडी के 11 प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इस पर करीब 2009 करोड़ रुपये आएगा। . करीब 2009 करोड़ रुपये के इन प्रोजेक्ट का 1477 करोड़ रुपये शेयर केंद्र सरकार और 531 करोड़ दिल्ली सरकार का है।
- ओखला में 564 एमएलडी क्षमता का प्लांट बन रहा है। यह एसटीपी केमिकल लेस, पर्यावरण अनुकूल और 50% खुद की ऊर्जा से चलने वाला एशिया का सबसे बड़ा प्लांट है। पूरी दुनिया में इसका नंबर तीसरा है।
- कोंडली में 204 एमएलडी व रिठाला में 182 एमएलडी क्षमता का एसटीपी निर्माणाधीन है। तीनों प्रोजेक्ट 2022 तक पूरे हो जाएंगे।