देश की राजधानी में महिलाओं को अजनबियों से खतरे की आशंका बेहद कम है। उनके दुश्मन तो 'अपने' ही परिजन और रिश्तेदार हैं। पिछले साल (2020) उनके खिलाफ अपराधों में इनकी भागीदारी 58 फीसदी थी, जबकि 26 फीसदी अपराधी किसी न किसी रूप में परिचित थे।
'अपनों' से जुल्म और जिल्लत झेल रही हैं दिल्ली की महिलाएं, आंकड़ों ने खोली एक और सच्चाई
यह हकीकत दिल्ली पुलिस के आंकड़ों से सामने आई है। वर्ष 2019 के मुकाबले 2020 में उनके खिलाफ अपराधों में करीब 22 फीसदी की कमी आई। वर्ष 2019 के 2168 के मुकाबले इस साल दुष्कर्म की 1699 शिकायतें दर्ज की गईं। इन मामलों के आरोपियों में 44 फीसदी परिजन या पारिवारिक दोस्त और 14 फीसदी रिश्तेदार थे। जानकारों की संख्या महज दो फीसदी रही। 26 फीसदी आरोपी किसी न किसी रूप में महिला से परिचित थे। 12 फीसदी आरोपी पड़ोसी और दो फीसदी सहकर्मी थे। आरोपियों में दो फीसदी ही ऐसे थे, जो उनसे परिचित नहीं थे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस वर्ष दर्ज दुष्कर्म के 22.42 फीसदी मामले ऐसे हैं, जिनमें आरोपी और पीड़िता लिव-इन में रह रहे थे और महिला ने शादी नहीं करने पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करा दिया। महिलाओं पर होने वाले अन्य अपराधों में कमी आई है। उनके शोषण, अपहरण और अपमान में कमी आई है। इस साल नाबालिगों पर होने वाले अपराधों में भी कमी आई है। वर्ष 2019 में पोक्सो के तहत 109 मामले दर्ज किए गए थे, इस वर्ष यह घटकर 65 रह गए हैं।
राजधानी में ज्यादातर मामलों में महिलाएं अपनों की ही हवस का शिकार बनती हैं। आंकड़ों के हवाले से पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह ट्रेंड लगातार बना है कि अपरिचित दुष्कर्म के मामलों में कम शामिल होते हैं। वर्ष 2016 में 3.57 फीसदी अपरिचित महिलाओं के दुष्कर्म में आरोपी थे 2017 में 3.36 फीसदी, 2018 में 2.50 फीसदी, 2019 में 2.20 फीसदी और वर्ष 2020 में 1.77 फीसदी अपरिचित महिलाओं से दुष्कर्म के आरोपी हैं।
महिलाओं पर अपनों द्वारा किए जा रहे तथा अन्य किस्म के अपराधों की सच्चाई की जो तस्वीर दिल्ली पुलिस के रिपोर्ट कार्ड में आंकड़ों के जरिये उजागर हुई है वह कोई बहुत नई बात नहीं है। हां आंकड़ों में कमी या अधिकता जरूर है।
आंकड़ों में महिलाओं के प्रति अपराध
वर्ष 2019 वर्ष 2020
दुष्कर्म 2168 1699
शोषण 2921 2186
अपहरण 3672 2938
अपमान 495 434
पोक्सो 109 65