प्रदूषण पर वार : नियमों का उल्लंघन करने पर एलएंडटी पर पांच लाख का जुर्माना
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने प्रगति मैदान में एंट्री कैनाल का किया औचक निरीक्षण, एलएंडटी कंपनी को नोटिस किया जारी।
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राजधानी में बृहस्तपतिवार से प्रदूषण को लेकर एंटी डस्ट अभियान की शुरुआत हो गई है। इसके तहत पहले दिन प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अवहेला करने पर दिल्ली सरकार ने लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) कंपनी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही कंपनी को नोटिस भी जारी किया गया है। अगले दो दिनों में नियमों का पालन नहीं होने पर निर्माण स्थल पर काम बंद कराया जाएगा और हर दिन पांच लाख का जुर्माना लगेगा।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय बृहस्पतिवार को प्रगति मैदान स्थित एंट्री कैनाल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने उक्त कार्रवाई को लेकर मामले की प्रतिदिन की रिपोर्ट भेजने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली के अंदर एंटी डस्ट अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत 31 टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में निगरानी का काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि विभाग को सूचना मिली थी कि प्रगति मैदान की टनल बनाने वाली कंपनी एलएंडटी द्वारा बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, जिसके बाद निरीक्षण करने पर चारों तरफ धूल फैली हुई पाई गई। वहीं, धूल को ढकने वाली तिरपाल भी टुकड़ों-टुकड़ों में फटी हुई थी।
साइट पर एंटी स्मॉग गन केवल दिखाने के लिए रखी गई थी। साथ ही यहां पर टैंकर में पानी मौजूद नहीं था। गोपाल राय ने कहा कि कंपनी पर जुर्माना लगाने के अलावा नोटिस दिया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
धूल प्रदूषण मूल्यांकन की जानकारी नहीं देने पर लगेगा जुर्माना
राजधानी में निर्माण कार्य में जुटी एजेंसी या व्यक्ति अब धूल प्रदूषण को लेकर स्वयं मूल्यांकन कर सकेंगे। इसके लिए बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार ने धूल नियंत्रण के लिए ऑनलाइन पोर्टल https://dustcontroldpcc.delhi.gov.in लांच किया है। पोर्टल के माध्यम से दिल्ली में चल रहे निर्माण कार्यों को जोड़ा जाएगा।
पर्यावरण मंत्री ने गोपाल राय ने दिल्ली सचिवालय में पोर्टल को लांच करते हुए बताया कि पोर्टल को सेल्फ असेसमेंट नाम दिया गया है। सरकार अभी तक इसका मूल्यांकन खुद करके कार्रवाई करती थी। इसकी जगह अब स्वयं मूल्यांकन का विकल्प शुरू किया गया है। सरकार, एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण के जो मापदंड तय किए हैं, उन सभी को पूरा किया जा रहा है या नहीं, यह हर व्यक्ति पोर्टल पर आकर घोषित करेगा।
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य संबंधी मापदंडों की जानकारी दो तरह की है। पहली जानकारी जो अनिवार्य है, जिन्हें हर हाल में सभी को पालन करना है, उनकी संख्या 15 है। दूसरे 12 मापदंड ऐसे हैं जिनकी जानकारी की जरूरत है, लेकिन वह अनिवार्य नहीं है। इस तरह से दोनों तरह के मापदंडों को मिलाकर 27 मापदंड निर्धारित किए हैं।
मूल्यांकन के मानक
जो लोग 15 मापदंडों को पूरा करेंगे उनको 200 नंबर दिए जाएंगे। इसके अलावा अन्य 12 बिंदुओं का जवाब देने पर 60 नंबर होंगे। इस तरह 200 और 60 अंक के आधार पर स्कोरिंग की जाएगी। इसके बाद मापदंडों के पालन में कमी मिलती है तो पोर्टल के जरिए ही नोटिस जाएगा। उनके खिलाफ जांच करने और कार्रवाई करने पर जो भी जुर्माना होगा, वह भी पोर्टल के जरिए ही होगा। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि एक नवंबर तक इस पोर्टल के ट्रेनिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद डीपीसीसी के अधिकारियों द्वारा निगरानी की प्रक्रिया शुरू होगी। जो लोग मापदंडों का पालन नहीं कर रहे हैं, उसके हिसाब से नोटिस और जुर्माना लगाने का काम शुरू किया जाएगा।
अगले सप्ताह से प्रशिक्षण
अगले सप्ताह से प्रशिक्षण का सिलसिला शुरू होगा। पहले चरण में एमसीडी, डीडीए, पीडब्ल्यूडी, सीपीडब्ल्यूडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, मेट्रो, एनएचएआई, डीएसआईआईडीसी और इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन के कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। दूसरे चरण में निजी एजेंसियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा निजी स्तर पर जो घर बनाते हैं वो नगर निगम से अनुमति लेते हैं। इसलिए एमसीडी के जरिए उनको सलाह दी जाएगी और पोर्टल पर आने के लिए प्रेरित करेंगे।