{"_id":"634609da7516806dc37a9108","slug":"delhi-news-delhi-government-accused-of-violating-rti-act","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi News : दिल्ली सरकार पर आरटीआई कानून के उल्लंघन का आरोप, सीआईसी ने लिखी एलजी को चिट्ठी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi News : दिल्ली सरकार पर आरटीआई कानून के उल्लंघन का आरोप, सीआईसी ने लिखी एलजी को चिट्ठी
Wed, 12 Oct 2022 05:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 12 Oct 2022 05:57 AM IST
सार
Delhi News : केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) ने दिल्ली सरकार पर सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के उल्लंघन का आरोप लगाया है। सीआईसी ने इसे लेकर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को चिट्ठी लिखी है।
विज्ञापन
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) ने दिल्ली सरकार पर सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के उल्लंघन का आरोप लगाया है। सीआईसी ने इसे लेकर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को चिट्ठी लिखी है। इस पत्र के आधार पर उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव को इस मसले में जरूरी कार्रवाई का निर्देश दिया है। इसे लेकर केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल में ठन गई है।
विज्ञापन
केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने पत्र में लिखा है कि कई विभाग व एजेंसियां आधी-अधूरी जानकारी देने के साथ ही कई मामलों को आपसी मिलीभगत से रफा-दफा कर रहे हैं। इससे आम लोगों का हित भी प्रभावित हो रहा है। उधर, दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया है कि सीआईसी ने यह पत्र भाजपा के कहने पर लिखा है। यह बेहद दुखद है कि सीआईसी जैसी संस्था भी गंदी राजनीति में लिप्त है। दिल्ली सरकार को आरटीआई अधिनियम को सही मायने में लागू करने पर गर्व है। ब्यूरो >> विभाग दे रहे आधी-अधूरी जानकारी : पेज 7
विज्ञापन
आरटीआई : विभाग दे रहे आधी अधूरी और भ्रामक जानकारी
सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के उल्लंघन को लेकर खड़े हुए विवाद में उपराज्यपाल कार्यालय के एक सूत्र का कहना है कि पत्र में दिल्ली सरकार के राजस्व, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य, सहकारिता विभाग सहित डीएसएसएसबी और डीएसआईआईडीसी जैसे निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि संबंधित विभाग व संस्थाएं आरटीआई का पहले तो जवाब देने में आनाकानी करती हैं। बाद में आधी-अधूरी व भ्रामक जानकारी दी जाती है।
विज्ञापन
इतना ही नहीं, जवाब देने की जगह अधिकारी कई बार आवदेनकर्ता से सीधे मुलाकात कर गलत तरीकों के सहारे मामले का रफा-दफा करने की कोशिश करते हैं। इससे विभागीय पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर असर पड़ता है। पत्र में यह भी बताया गया है कि लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) के बजाय क्लर्क या दूसरे कर्मियों को आयोग के समक्ष पेश करने के लिए भेज दिए जाते हैं। सूत्र ने कहा है कि माहुरकर के पत्र में उपरोक्त विभागों के विशिष्ट उत्तरों को संलग्न किया गया है।