होली पर घर : यात्रियों की भीड़ ने ‘कुचल’ दिए कोरोना के नियम, हर जगह मारामारी
- आनंद विहार और कश्मीरी गेट बस अड्डे पर रही जबरदस्त भीड़, बाहर भी उमड़ा रेला
- बसों में चढ़ने तक के लिए लोगों में अफरातफरी, सामाजिक दूरी से काफी दूर थे लोग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए प्रशासन ने होली पर लोगों को घर में ही रहने की सलाह दी है। दिल्ली में रोजी-रोटी कमाने आए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों के बड़ी संख्या में लोग भी शनिवार को अपने गृह जनपदों के लिए रवाना हो गए। इसी वजह से आनंद विहार और कश्मीरी गेट बस अड्डे पर यात्रियों की जबरदस्त भीड़ रही। बसों और टिकट काउंटरों पर सामाजिक दूरी तार-तार होती नजर आई। लोगों ने सही तरीके से मास्क तक नहीं पहना था। उधर, ट्रेनों में भी खासी भीड़ रही। पेश है अमर उजाला संवाददाता आदित्य पाण्डेय और नवनीत शरण की खास रिपोर्ट...
रिंग रोड पर लगा भीषण जाम
स्थान : कश्मीरी गेट आईएसबीटी
समय : दोपहर 01.00 बजे
यहां शनिवार को यात्रियों की जबरदस्त भीड़ रही। एक के बाद एक बसें यात्रियों को लेकर रवाना हो रही थी। टिकट काउंटरों पर भी भीड़ कम नहीं हो रही थी। हरियाणा के अलग-अलग रूट पर जाने के लिए यात्री टिकट लेने की जद्दोजहद में लगे थे। चिंताजनक बात यह थी कि यहां सामाजिक दूरी का पालन करता कोई नजर नहीं आया। ज्यादातर लोगों ने मास्क तो लगा रखा था, लेकिन उनका मास्क नाक के बजाय गले में लटका था। सामाजिक दूरी का पालन कराने के लिए सुरक्षा इंतजाम भी नजर नहीं आया। बस अड्डे के प्रवेश द्वार पर दो पुलिसकर्मी कुर्सी पर बैठे दिखाई दिए। उनसे पूछने पर कि भीड़भाड़ है तो यात्रियों के लिए क्या खास इंतजाम हैं। उन्होंने कहा कि इंतजाम कल होगा। यात्रियों के सामानों की जांच के लिए मेटल डिटेक्टर मशीन चल रही थी। लगातार बसों की आवाजाही के कारण रिंग रोड पर भीषण जाम लगा था। आईएसबीटी के दो किलोमीटर आगे-पीछे तक करनाल रोड पर वाहन रेंगते नजर आए।
यूपी जाने वाली बसों में खचाखच भीड़
स्थान : आनंद विहार आईएसबीटी
समय : दोपहर 02.30 बजे
यहां पर तो कश्मीरी गेट बस अड्डे से भी ज्यादा भीड़ नजर आई। यहां भी कोरोना प्रोटोकाल का पालन नहीं किया जा रहा था। संक्रमण से बेफिक्र लोगों को केवल अपने घर पहुंचने की जल्दी थी। महिलाएं और उनके साथ बच्चे भी बिना मास्क के नजर आए। यूपी के अलग-अलग रूट की बसें आकर लगतीं और यात्री भागकर उनमें सवार हो जाते। कुछ मिनटों में ही बसें यात्रियों से भर रही थी। बस अड्डा परिसर से कहीं ज्यादा भीड़ बस अड्डे के सामने सड़क पर थी। सड़क के दोनों तरफ हजारों लोग नजर आ रहे थे। बस पकड़ने के लिए सड़क पर बने पैदल पार पथ पर लोगों का हुजूम लगा था। आनंद विहार से रायबरेली जाने के लिए यहां पहुंचे दुर्गेश ने मास्क नहीं लगाया था। कारण पूछने पर उन्होंने जवाब दिया कि मजदूरों को कोरोना नहीं होता, बड़े लोगों को होता है। उनका जवाब हैरान करने वाला था। फिलहाल वह अपनी पत्नी और बच्चे के साथ फटाफट सीढ़ियां चढ़कर बस अड्डे की तरफ बढ़ गए।
कम पड़ी रेलवे की तैयारी, परेशान रहे लोग
होली पर अपने घर जाने के लिए रेलवे स्टेशनों पर शनिवार को भीड़ उमड़ पड़ी। कोरोना संक्रमण के कारण ट्रेनों की संख्या कम है, इसलिए यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। होली को लेकर रेलवे की सभी तैयारी भीड़ के सामने बौनी दिखाई पड़ी। हालांकि, त्योहार स्पेशल ट्रेनों ने यात्रियों की राह आसान की है।
बड़ी संख्या में पूर्वांचल दिशा की ओर जाने वाले हजारों लोग होलिका दहन की पूर्व संध्या पर रेलवे स्टेशनों पर उमड़ पड़े। आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर तो यात्री घंटों तक ट्रेनों का इंतजार करते नजर आए। जितनी भीड़ प्लेटफार्म पर थी तो उससे कही अधिक स्टेशन परिसर में व टिकट काउंटर पर थी। आरक्षित टिकट नहीं मिलने की वजह से कई लोगों को मायूस होकर घर भी लौटना पड़ा। क्योंकि, बिना आरक्षित टिकट के यात्रियों को प्लेटफार्म तक जाने की इजाजत तक नहीं थी।
प्लेटफार्म पर ट्रेन पहुंचते ही आपाधापी
अनारक्षित कोच भले ही ट्रेनों में नहीं जुड़े हैं, लेकिन आरक्षित टिकट वाले यात्रियों की भी ट्रेनों में चढ़ने की आपाधापी आनंद विहार स्टेशन पर नजर आई। नियमित स्पेशल ट्रेनों के साथ स्पेशल ट्रेन में भी बड़ी संख्या में यात्रा करने वालों की तादाद थी। ट्रेन संख्या 05140 आनंद विहार-मऊ सुपरफास्ट ट्रेन दोपहर करीब 3 बजे जैसे ही प्लेटफार्म पर पहुंची तो उसमें चढ़ने के लिए अफरातफरी का माहौल दिखा। आरक्षित बर्थ के बावजूद ट्रेन के भीतर पहुंचने की जल्दी थी। इस दौरान लोग कोरोना से बेफिक्र दिखाई दिए।
टिकट काउंटर पर मिली निराशा
ट्रेनों की कमी होली के मौके पर साफ देखने को मिली। आनंद विहार स्टेशन हो या नई दिल्ली व पुरानी दिल्ली। सभी स्टेशनों पर स्थित टिकट काउंटर पर घंटों लाइन में लगने के बाद यहीं जवाब था कि आरक्षित टिकट उपलब्ध नहीं है। वेटिंग टिकट लेने का भी कोई फायदा नहीं है। क्योंकि, बिना कंफर्म टिकट यात्रा करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ऐसे में लोगों को निराश होकर वापस दिल्ली के घर का ही रुख करना पड़ा।
रैनबसेरा बना हुआ है रेलवे स्टेशन
एक अदद आरक्षित ट्रेन टिकट के लिए रेलवे स्टेशन का परिसर रैनबसेरा बना हुआ है। बड़ी संख्या में पहुंचे यात्री बार-बार पूछताछ केंद्र पर स्पेशल ट्रेन के बारे में पूछते दिखे। उन्हें उम्मीद थी कि स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा होगी तो आरक्षित टिकट ले लेंगे।
कोविड को लेकर खास इंतजाम नहीं
देश के सबसे वीवीआईपी स्टेशनों में शुमार नई दिल्ली स्टेशन पर कोविड प्रोटोकाल का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा था। सामान की जांच तो हो रही थी, लेकिन यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग नहीं हो रही थी। मास्क लगाने को लेकर भी कड़ाई नहीं दिखीं। मास्क लगाना स्वेच्छा था। ट्रेन में चढ़ने के दौरान भी मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग सिर्फ दिखावें भर थी।
अनारक्षित ट्रेन नहीं चलने से बढ़ी परेशानी
कोविड की वजह से अनारक्षित ट्रेन लंबी दूरी की नहीं चलने से ज्यादा परेशानी इस साल लोगों को होती दिखीं। हर साल दिल्ली में रहने वाले हजारों लोग आरक्षित टिकट नहीं मिलने की स्थिति में अनारक्षित टिकट लेकर ही यात्रा करते थे, लेकिन इस बार ना तो अनारक्षित कोच ट्रेनों में जुड़ रहे हैं और ना ही वेटिंग टिकट पर ही यात्रा की अनुमति है।
यात्रियों ने कहा...
ट्रेन में सभी यात्री नियमों का पालन कर रहे हैं। आनंद विहार-मऊ स्पेशल ट्रेन में कोई भी वेटिंग टिकट वाला पैसेंजर नहीं है। इससे साफ होता है कि कोविड-19 के नियमों का पालन हो रहा है। आरक्षित टिकट नहीं मिलने से यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। वेटिंग टिकट पर यात्रा की अनुमति नहीं होने से कई साथी इस बार होली त्योहार अपने मूल स्थान पर मनाने से वंचित रह जाएंगे। - अंकित श्रीवास्तव
ट्रेन में सभी यात्री नियमों का पालन कर रहे हैं। किसी तरह की कोताही नहीं हो रही है। यह जरूर है कि मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कड़ाई से लोग नहीं कर रहे हैं। ट्रेन में चढ़ने की आपाधापी के कारण सामाजिक दूरी का सही पालन नहीं हो रहा है। ट्रेनों की कमी है। रेलवे को ज्यादा से ज्यादा संख्या में ट्रेन चलाने की आवश्यकता था। - धर्मेंद्र शर्मा