दिल्ली में लौटा कोराना का दंश : वैक्सीन से जगी थोड़ी उम्मीद
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ठीक एक साल पहले 24 मार्च को पूरा देश लॉक कर दिया गया था। आज मामूली बंदिशों के साथ सब कुछ अनलॉक है। लॉकडाउन से अनलॉक तक की कहानी तस्वीरें बयां भी कर रही हैं। सूनी सड़कें, बाजार, बस अड्डे अब आबाद हो चले हैं। इस बीच कोविड-19 से जबरदस्त जंग भी चली।
कोरोना कभी चित होता दिखा तो कभी पट। वैक्सीन बनी तो लगा था कि अब जीत मुट्ठी में हैं। फरवरी के अंत तक के आंकड़े इस सोच को ताकत भी दे रहे थे, लेकिन मार्च आने से पहले कोरोना ने फिर बाजी पलट दी है।
एक बार फिर वह हावी होता दिख रहा है। अब देश कोविड-19 के दंश के साथ लॉकडाउन के पहले साल को लांघ रहा है। हर पैरामीटर पर आज कोरोना ताकतवर है। फिर भी, सालभर का अनुभव और वैक्सीनेशन के धीरे-धीरे ही सही, लेकिन फैलते दायरे से उम्मीद भी बंधी है कि कोरोना ज्यादा दिन नहीं चलेगा। बशर्ते, देश कोविड प्रोटोकाल से चलता रहे।
अब तक रिकॉर्ड
- एक दिन में सबसे ज्यादा मरीज, 11 नवंबर को 8593
- एक दिन में सबसे ज्यादा मरीज स्वस्थ, 20 नवंबर को 8775
- एक दिन में सबसे ज्यादा मौतें, 18 नवंबर को 131
50 फीसदी से कम हो गए थे यात्री
लॉकडाउन से पहले मेट्रो में 27-30 लाख, बसों में करीब 30 लाख, टैक्सी और ऑटो समेत अन्य परिवहन साधनों का करीब तीन लाख लोग रोजाना उपयोग कर रहे थे। दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी सेवाएं भी धीरे-धीरे अनलॉक हुईं। पाबंदियों के बीच यात्रा करने वालों की संख्या घटकर 50 फीसदी से भी कम हो गईं।
कोरोना संक्रमण दोबारा बढ़ रहा है। लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। जरूरी है कि लोग कोविड से बचाव के नियमों का पालन करें। लापरवाही इसी प्रकार बरती गई तो आने वाले दिनों में गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
- डॉक्टर बीबी बाधवा, अध्यक्ष, दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन, एम्स