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दिल्ली : जामिया की प्रोफेसर नबीला कोरोना से हारीं जिंदगी की जंग

Thu, 20 May 2021 08:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 20 May 2021 08:36 AM IST
सार

  • 10 दिन पहले मां को कोरोना ने छीना, पिता भी थे संक्रमित
  • माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर परेशान थीं नबीला

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Delhi news: Corona infected professor of jamia Nabila lost the battle of life
नबीला सादिक - फोटो : amar ujala

विस्तार

कोरोना ने एक और होनहार  युवा महिला प्रोफेसर को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। संक्रमित होने के बाद भी ट्विटर पर लोगों से मदद की गुहार लगाने वाली दिल्ली निवासी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की असिस्टेंट प्रोफेसर नबीला सादिक ( 38) की सोमवार रात को फरीदाबाद के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। प्रो. नबीला की मां मां नुजहत (76) की 10 दिन पहले कोरोना के चलते डेथ हो गई थी जबकि पिता अभी संक्रमण से ठीक हुए हैं। 

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2 मई को अपने आखिरी ट्वीट में नबीला ने अपने लिए बेड दिलवाने की अपील की थी। इसमें लिखा था कि इस दर से दिल्ली में कोई भी जिंदा नहीं बचेगा। जामिया मिल्लिया इस्लामिया  प्रशासन ने प्रो. नबीला की मृत्यु पर शोक प्रकट किया है। शिक्षक और छात्र हर कोई दुखी है। छात्रों ने बताया कि दिल्ली में बेड न मिलने के कारण बड़ी मुश्किल से फरीदाबाद के अस्पताल में बेड उपलब्ध करवाया था।
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यदि समय से दिल्ली में बेड मिलता तो शायद आज वे जिंदा होतीं। क्योंकि देरी से अस्पताल पहुंचाने के चलते उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। उन्हें फोन पर हमेशा उनके माता-पिता की बात करके हिम्मत देते थे। उन्हें कहते थे कि वे उन्हें बेहद मिस कर रहे हैं। क्योंकि हम जानते थे कि वे अपने माता-पिता की आखिरी उम्मीद थीं। 
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प्रोफेसर नबीला की मौत से ठीक दस दिन पहले उनकी मां नुजहत की भी कोविड से जुड़ी गंभीर परेशानियों की वजह से मृत्यु हो गई थी। नबीला के पिता को भी कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।हालांकि बाद में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया और वह फिलहाल होम क्वारंटीन में हैं। 

माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर परेशान थीं नबीला
 सहकर्मियों और दोस्तों ने बताया कि जेएनयू की पीएचडी स्कॉलर डॉ नबीला सादिक 20 अप्रैल तक छात्रों को थीसिस पढ़ाती रहीं और उनकी मदद करती रहीं। नबीला को अपनी मां की मौत के बारे में पता नहीं था और वह हर समय अपने माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित रहती थीं।

दिल्ली एनसीआर में बेड तलाशते रह गए: 
2 मई को नबीला ने आखिरी ट्वीट किया था और कहा था कि ‘इस दर से दिल्ली में कोई भी जिंदा नहीं बचेगा’। जामिया के एमए के छात्र लारैब नेयाजी  ने बताया कि ‘जब मुझे उनके संक्रमण की जानकारी मिली तो मैं अन्य छात्रों के साथ उनके घर गया। हम एक बेड की तलाश करने लगे। दिल्ली-एनसीआर के हर अस्पताल में ऑक्सीजन बेड पाने के लिए कई फोन किये।  तब जाकर फरीदाबाद में एक निजी अस्पताल में जगह मिली।


हालांकि, उनके ऑक्सीजन का स्तर गिरते-गिरते 32 फीसदी तक आ गया था. सीटी स्कैन के बाद डॉक्टर ने कहा कि उनके फेफड़े खराब हो चुके हैं।  इस बीच, उनकी मां को संजय गांधी अस्पताल ले गए, जहां उनकी मौत हो गई।  हमने नबीला को उनकी मां की मौत की बात नहीं बताई, क्योंकि उनकी हालत भी गंभीर थी’। प्रो. नबीला एक केयरिंग प्रोफेसर थीं। जिन्हें कविताएं लिखना और राजनीति और लिंग सिद्धांत पर चर्चा करना बेहद पसंद था। 

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