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विश्व क्षय रोग दिवस : 15 प्रतिशत दंपती जननांग टीबी के कारण कराते हैं आईवीएफ

Wed, 24 Mar 2021 04:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 24 Mar 2021 04:26 AM IST
सार

  • जागरूकता की कमी के कारण आ रहे रोग की चपेट में
  • पिछले 5 साल में तादाद में दस फीसदी का इजाफा

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Delhi News : 15 percent of couples opt IVF due to genital TB
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विस्तार

पूरी दुनिया में हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी (क्षय रोग) दिवस मनाया जाता है। हर साल इस बीमारी से लाखों लोगों की मौत हो जाती है। इसका सबसे अधिक प्रभाव फेफड़ों पर होता है। पिछले कुछ सालों से देखा जा रहा है कि जननांग की टीबी के कारण दंपतियों को आईवीएफ कराना पड़ रहा है।

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डॉक्टरों का कहना है कि लापरवाही और जागरूकता की कमी के कारण ऐसा हो रहा है। आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) गर्भधारण की एक कृत्रिम प्रक्रिया है। यह तकनीक उन महिलाओं के लिए विकसित की गई है, जो किन्हीं कारणवश गर्भधारण नहीं कर पाती हैं। देशभर के आईवीएफ केंद्रों पर इस तकनीक का सहारा लेने आने वाले करीब 15 फीसदी दंपती जनन्नाग की टीबी से पीड़ित मिले हैं। ऐसे रोगियों की संख्या हर साल बढ़ रही है। पिछले 5 साल में ही इनकी संख्या में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। 
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के अनुसार, भारत में आईवीएफ उपचार कराने वाली आधी महिलाएं हैं। उनमे जेनिटल ट्यूबरक्लोसिस (जनन्नाग टीबी) पाई गई है। दिल्ली सहित देशभर में आईवीएफ केंद्र चलाने वाली सीड्स ऑफ़ इन्नोसेंस की निदेशक डॉ, गौरी अग्रवाल ने बताया कि उनके केंद्रों पर आने वाले लगभग 15 फीसदी दंपतियों मे जेनिटल टीबी बीमारी मिली है। 
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उनके मुताबिक, जब कोई व्यक्ति एक खास बैक्टीरिया (माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया) से संक्रमित होता है, तो वह इस बीमारी की चपेट में आता है। जेनिटल टीबी महिलाओं में फैलोपियन ट्यूब और पुरुषों में पिट्यूटरी ग्रंथि को प्रभावित करती है।


बीमारी के लक्षण 

  • अनियमित मासिक चक्र
  • जननांग क्षेत्र में सूजन
  • वजन कम होना
  • सांस लेने में परेशानी
  • हल्की ख़ांसी आना


खांसी और छींक से भी फैलती है यह बीमारी
डॉक्टर गौरी के मुताबिक, टीबी खांसी और छींक से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के करीब रहने से टीबी होने की आशंका बढ़ जाती है। यह इन्फेक्शन आसानी से हवा में घुल जाता है। शुरुआत में यह बीमारी फेफड़ों पर असर करती है। बाद में बैक्टीरिया खून के जरिये शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित करता है। लक्षण महसूस करते ही समय पर जांच कराएं तो इसका इलाज हो सकता है।

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