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दिल्ली: आतिशबाजी पर प्रदेश सरकार के आदेश में बदलाव की मांग वाली याचिका पर हाई कोर्ट में 22 अक्तूबर को होगी सुनवाई
Wed, 06 Oct 2021 11:44 AM IST
अनुराग सक्सेना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनुराग सक्सेना
Updated Wed, 06 Oct 2021 11:44 AM IST
सार
हाई कोर्ट ने यह आदेश यह संज्ञान में आने के बाद दिया है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर पहले से ही विचार कर रहा है।
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दिल्ली हाई कोर्ट
- फोटो : दिल्ली हाई कोर्ट
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विस्तार
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार के उस आदेश में बदलाव करने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई 22 अक्तूबर तक टालने का आदेश दे दिया, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी सीमा में आतिशबाजी (पटाखों) के भंडारण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहा है।
चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति की पीठ ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन कर लेते हैं। यह याचिका दो लोगों राहुल सांवरिया और तनवीर ने दायर की है। उन्होंने दावा किया है कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध का दिल्ली सरकार का निर्णय सही नहीं है क्योंकि शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी में कभी भी पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि तो आपका मतलब है कि यह आदेश (सुप्रीम कोर्ट के आदेश की) अवमानना है? तो आप अवमानना का केस करिए। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील गौतम झा ने कहा कि मैं बिल्कुल यह नहीं बोल रहा हूं। मैं सिर्फ इतना बोल रहा हूं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में इसकी अनुमति नहीं दी गई है।
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चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति की पीठ ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन कर लेते हैं। यह याचिका दो लोगों राहुल सांवरिया और तनवीर ने दायर की है। उन्होंने दावा किया है कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध का दिल्ली सरकार का निर्णय सही नहीं है क्योंकि शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी में कभी भी पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया।
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इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि तो आपका मतलब है कि यह आदेश (सुप्रीम कोर्ट के आदेश की) अवमानना है? तो आप अवमानना का केस करिए। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील गौतम झा ने कहा कि मैं बिल्कुल यह नहीं बोल रहा हूं। मैं सिर्फ इतना बोल रहा हूं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में इसकी अनुमति नहीं दी गई है।
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दिल्ली सरकार के अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए है। इस पर झा ने कहा कि वे दिल्ली सरकार के 15 सितंबर के आदेश में बदलाव चाहते हैं, जिसमें प्रदूषण का हवाला देकर दिवाली के त्योहार पर हर तरह के पटाखों के भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। पूर्ण प्रतिबंध की जगह प्रशासन को ग्रीन पटाखे या वर्गीकरण करने का विकल्प देखना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि दावा किया गया है कि दिल्ली में प्रदूषण वाहनों और बायोमास के जलने आदि कारणों से होता है और दिवाली के त्योहार से डेढ़ महीने पहले पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से लाखों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली सरकार ने आदेश दिया था कि वायु प्रदूषण और मौजूदा कोरोना महामारी में सांस संबंधी दिक्कतों को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी सीमा (एनसीटी) में एक जनवरी 2022 तक सभी तरह के पटाखे फोड़ने और बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध होगा।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि दावा किया गया है कि दिल्ली में प्रदूषण वाहनों और बायोमास के जलने आदि कारणों से होता है और दिवाली के त्योहार से डेढ़ महीने पहले पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से लाखों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली सरकार ने आदेश दिया था कि वायु प्रदूषण और मौजूदा कोरोना महामारी में सांस संबंधी दिक्कतों को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी सीमा (एनसीटी) में एक जनवरी 2022 तक सभी तरह के पटाखे फोड़ने और बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध होगा।