Delhi high court: देश में कुशल डॉक्टरों की कमी, चिकित्सा की पढ़ाई में न हो गुणवत्ता से समझौता
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव नरूला की पीठ ने तमिलनाडु के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने के मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की ओर से हलफनामे में गलत तथ्य पेश किए जाने की जांच करने का आदेश दिया है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि देश में कुशल डॉक्टरों की कमी है। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के प्रमाणीकरण प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव नरूला की पीठ ने तमिलनाडु के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने के मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की ओर से हलफनामे में गलत तथ्य पेश किए जाने की जांच करने का आदेश दिया है। पीठ ने कहा, पात्र कॉलेजों को अन्यायपूर्ण ढंग से मेडिकल पेशेवरों की संख्या बढ़ाने के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
कॉलेज की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, स्वास्थ्य शिक्षा के ढांचे को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है, इसलिए एनएमसी जैसी नियामक संस्था की भूमिका अहम है। कॉलेज ने एमबीबीएस सीटों की संख्या 150 से बढ़ाकर 250 करने की मांग की थी। एनएमसी ने इसे सुविधाओं, फैकल्टी में कमी के आधार पर खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कॉलेज में 2021-22 के लिए एमबीबीएस सीटों की संख्या 200 और 2022-23 में 250 करने के आदेश भी दिए हैं।
आयोग ने किया गलत आकलन
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि एनएमसी ने इस बारे में सुविधाओं की कमी का गलत आंकलन करते हुए हलफनामा पेश किया। इसे देखते हुए कोर्ट ने एनएमसी अध्यक्ष को उन परिस्थितियों की जांच करने के लिए कहा है, जिसके तहत गलत आंकलन किया गया।