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दिल्ली : हाईकोर्ट ने कहा- ओबीसी के लिए कोटा देने का उद्देश्य उच्च शिक्षा के सपने को प्रोत्साहित करना

Fri, 22 Apr 2022 04:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 22 Apr 2022 04:39 AM IST
सार

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने यह टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय में एलएलएम उम्मीदवार आकांक्षी  को प्रवेश देने का निर्देश देते हुए की है  जिसे ओबीसी - नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र प्रदान करने में विफल रहने के कारण प्रवेश से वंचित कर दिया गया था।
 

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Delhi High Court said that the purpose of giving quota for OBCs is to encourage the dream of higher education
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

उच्च न्यायालय ने एक आदेश में कहा है कि ओबीसी उम्मीदवारों के लिए कोटा का उद्देश्य उन्हें उच्च शिक्षा के अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। ऐसे में अधिकारियों का कर्तव्य है कि वह उनको आरक्षण प्रदान करने के सांविधानिक लक्ष्य को आगे बढ़ाएं। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने यह टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय में एलएलएम उम्मीदवार आकांक्षी  को प्रवेश देने का निर्देश देते हुए की है  जिसे ओबीसी - नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र प्रदान करने में विफल रहने के कारण प्रवेश से वंचित कर दिया गया था।

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उच्च न्यायालय ने आकांक्षी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने याचिकाकर्ता को सभी दस्तावेज अपलोड करने के लिए मुश्किल से चार घंटे का समय दिया । और  प्रमाणपत्र वर्तमान वित्तीय वर्ष का नहीं होने के कारण प्रवेश से इनकार  कर दिया था। इस मामले में अदालत ने कहा है कि जब अधिकारियों ने छात्रों को उनके पहले के ओबीसी-नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र के आधार पर प्रवेश के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी, तो याचिकाकर्ता को कम से कम पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था।  
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 ऐसा करके विवि ने ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित दो कीमती सीटों को बेकार जाने दिया गया। अदालत कहा है कि यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि  याचिकाकर्ता के प्रवेश को मंजूरी नहीं देने में प्रतिवादी का रवैया मनमाना  रहा है। इसी के बाद याचिकाकर्ता को विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई जा रही प्रथा के अनुसार बाद के सेमेस्टर की परीक्षाएं देने की अनुमति दी है।

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आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम की समीक्षा की मांग पर केंद्र को नोटिस

उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को आपराधिक प्रक्रिया (पहचान)अधिनियम 2022 के प्रावधानों की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने केंद्र को 6 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार इस याचिका के विचारयोग्य मुद्दे सहित अपना जवाब दाखिल करें। पीठ ने मामले की सुनवाई 16 नवंबर तय की है। आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक लोकसभा द्वारा 4 अप्रैल 2022 और राज्य सभा द्वारा 6 अप्रैल, 2022 को पारित किया गया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की सहमति मिली और अंतत: 18 अप्रैल को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

अधिनियम में आपराधिक मामलों में पहचान और जांच के उद्देश्य से दोषियों और अन्य व्यक्तियों की माप लेने और रिकॉर्ड को संरक्षित करने का प्रावधान है। यह उंगलियों के निशान, हथेली और पैरों के निशान, फोटोग्राफ, आईरिस और रेटिना स्कैन, भौतिक, जैविक नमूने, और उनके विश्लेषण आदि सहित व्यक्तियों के उचित शरीर माप लेने की मंजूरी के लिए कानूनी मंजूरी भी देता है।

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