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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा : कालाबाजारी करने वालों पर आपराधिक के साथ हो अवमानना की भी कार्रवाई

Mon, 03 May 2021 05:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 03 May 2021 05:44 AM IST
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Delhi High Court said contempt case also be slapped who commit black marketing
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : ANI

उच्च न्यायालय ने रविवार को स्पष्ट कर दिया कि कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए जरूरी दवाओं और ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ आपराधिक के अलावा अवमानना की कार्रवाई भी की जाएगी। अदालत ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक पर दवाएं व अन्य सामान की ब्रिकी न हो।

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि कोविड-19 से संबंधित दवाओं और उपकरणों की जमाखोरी व कालाबाजारी में शामिल पाए गए लोगों के खिलाफ मामले दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। ऐसे लोगों को अवमानना कार्रवाई के अलग मामले का सामना करने के लिए अदालत के समक्ष पेश किया जाए। 
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कुछ वकीलों ने अदालत को बताया था कि दवाओं और उपकरणों के लिए अधिक रकम वसूली जा रही है। इसके बाद अदालत ने ये निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली सरकार की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस ने एंबुलेंस के लिए ज्यादा किराया वसूलने, दवाओं, उपकरणों की कालाबाजारी जैसे मामलों के बारे में शिकायत दर्ज कराने के लिये एक हेल्पलाइन नंबर-33469900 जारी किया है।
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उन्होंने अदालत से इस नंबर के प्रचार का निर्देश देने का अनुरोध किया। अदालत ने इस पर दिल्ली सरकार और पुलिस को निर्देश दिया कि इस हेल्पलाइन का व्यापक प्रचार करें। ज्यादा किराया वसूले जाने, कोविड-19 के उपचार से जुड़ी दवाओं और उपकरणों की जमाखोरी व कालाबाजारी का मुद्दा पीठ के संज्ञान में केंद्र द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान लाया गया।

केंद्र ने कहा- टैंकरों का राष्ट्रीयकरण नहीं किया जा सकता

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि टैंकरों का राष्ट्रीयकरण नहीं किया जा सकता। राज्यों को टैंकर को प्राप्त करने की दिशा में स्वयं काम करना होगा। लक्षद्वीप भी टैंकर प्राप्त करने में कामयाब रहा हैं। केंद्र ने दिल्ली सरकार पर इस दिशा में ठोस कदम न उठाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के आग्रह पर थाईलैंड से क्रायोजेनिक टैंकरों के प्रस्तावित आयात के संबंध में वायुसेना के विमानों के माध्यम से मदद करने पर केंद्र ने सहमति प्रदान कर दी तो दिल्ली सरकार ने चुप्पी साध ली। 

रविवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने पूछा कि केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि दिल्ली में सरकार का मतलब राज्यपाल है। इस पर केंद्र के अधिवक्ता सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संवैधानिक तौर पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्ज नहीं मिला है और उसकी स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली सरकार यह कहती है कि जिम्मेदारी नहीं संभाल पा रही तो बता दे। हम उपराज्यपाल को जिम्मेदारी संभालने के लिए कह सकते हैं। उन्होंने दलील दी कि ऑक्सीजन परिवहन के लिए टैंकरों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी केंद्र पर नहीं डाली जा सकती। आवेदन में यह भी कहा गया है कि वर्तमान संकट के समय दिल्ली सरकार अपने संवैधानिक, सांविधिक और मानवीय कर्तव्यों व दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय अक्षमता को छिपाने के लिए इस तरह का प्रयास कर रही है।

केंद्र सरकार के स्थायी वकील अमित महाजन के माध्यम से दायर आवेदन में कहा गया है, ‘दिल्ली सरकार ने न तो कोई गंभीर प्रयास किया है और न ही कभी ऑक्सीजन के परिवहन के लिए अस्थायी मदद या सहायता के लिए भारतीय सड़क परिवहन मंत्रालय से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के प्रतिनिधि 29 अप्रैल को सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा निर्धारित उपलब्ध अतिरिक्त कंटेनरों के वितरण के लिए बुलाई गई विशेष बैठक में नहीं पहुंचे। 

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा थाईलैंड से क्रायोजेनिक टैंकरों के प्रस्तावित आयात के संबंध में वायुसेना के विमानों के माध्यम से टैंकरों को उठाने में मदद करने पर केंद्र ने सहमति दी थी। इसके बाद भी दिल्ली सरकार की ओर से एयरलिफ्टिंग की तारीख, लोडिंग के बिल जैसे विशिष्ट विवरणों के संबंध में कोई जवाब नहीं दिया गया। आज तक केंद्र सरकार को 26 अप्रैल के पत्र में दर्शाए गए कंटेनरों के आयात के संबंध में कोई पत्र नहीं मिला है।

केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के रवैये पर क्टाक्ष करते हुए कहा कि हर राज्य सरकार अपने प्रयासों को बंद कर उच्च न्यायालय से केंद्र को अपने दरवाजे पर ऑक्सीजन देने की मांग करेगी तो इसका परिणाम देशभर में अराजक स्थिति हो सकता है।

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