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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi: High Court's comment on the issue of illegal temple located in Defense Colony - the role of religious committee is not clear

दिल्ली: डिफेंस कॉलोनी स्थित अवैध मंदिर के मुद्दे पर हाईकोर्ट की टिप्पणी- धार्मिक कमेटी की भूमिका स्पष्ट नहीं

Tue, 07 Dec 2021 10:46 PM IST
अनुराग सक्सेना एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Tue, 07 Dec 2021 10:46 PM IST
सार

अदालत ने याची की उस दलील से सहमति जताई कि जब अधिकारियों ने उक्त ढांचे को गिराने का फैसला कर लिया था तो मामले को धार्मिक कमेटी को नहीं भेजा जा सकता था। ये स्पष्ट नहीं है कि क्या धार्मिक कमेटी इतने छोटे स्तर के मामलों को भी देखती है।

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Delhi: High Court's comment on the issue of illegal temple located in Defense Colony - the role of religious committee is not clear
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि ये स्पष्ट नहीं है कि उपराज्यपाल की अगुवाई वाली धार्मिक कमेटी जो धार्मिक अवैध निर्माणों के डिमोलिशन की सिफारिश करती है, उसे इतने छोटे स्तर के अतिक्रमण के मामलों को भी देखने की जरूरत है। अदालत ने ये टिप्पणी दक्षिण दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी में मंदिर के रूप में किए गए कथित अतिक्रमण को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की। ये मंदिर एक संपत्ति के सामने बनाया गया है। इसे हटाने के लिए संपत्ति मालिक ने याचिका दायर कर रखी है।

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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने संबंधित एसएचओ को उक्त स्थान पर चौबीसों घंटे एक पुलिसकर्मी तैनात करने के लिए कहा है। इसके अलावा मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या के बारे में भी जानकारी मांगी है। अदालत ने सुनवाई 16 दिसंबर तय की है।

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हाईकोर्ट ने गौर किया कि दिल्ली सरकार ने पहले बताया था कि प्राधिकारियों ने चार अक्तूबर को उक्त ढांचा ध्वस्त करने की योजना बनाई थी लेकिन अब मामले को धार्मिक कमेटी के समक्ष भेज दिया गया है। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि धार्मिक कमेटी ने अभी तक ध्वस्तीकरण की अनुमति नहीं दी है, इसलिए कुछ भी कहने की हालत में नहीं हैं।

अदालत ने याची की उस दलील से सहमति जताई कि जब अधिकारियों ने उक्त ढांचे को गिराने का फैसला कर लिया था तो मामले को धार्मिक कमेटी को नहीं भेजा जा सकता था। ये स्पष्ट नहीं है कि क्या धार्मिक कमेटी इतने छोटे स्तर के मामलों को भी देखती है। अदालत ने अधिकारियों को संबंधित रिकार्ड पेश करने का निर्देश दिया है।

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