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Order : दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश- ईसाई स्कूल प्रिंसिपल पर प्रकाशित लेख को वेबसाइट से हटाएं, वजह भी बताई

Sat, 19 Aug 2023 03:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 19 Aug 2023 03:22 AM IST
सार

जून 2023 में ऑर्गनाइजर और द कम्यून नामक एक अन्य समाचार मंच पर ‘भारतीय कैथोलिक चर्च सेक्स स्कैंडल : ननों और हिंदू महिलाओं का शोषण करने वाले पुजारी का पर्दाफाश’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित हुआ था। जस्टिस ज्योति सिंह ने दोनों प्रकाशनों को अपने प्लेटफार्म से मानहानिकारक लेख को हटाने का आदेश दिया। 

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Delhi High Court order- Remove the article published on the Christian School Principal from the website,
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

हाईकोर्ट ने ऑर्गनाइजर पत्रिका को अपनी वेबसाइट से उस लेख को हटाने का निर्देश दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि दिल्ली स्थित एक ईसाई अल्पसंख्यक स्कूल के प्रिंसिपल ननों और हिंदू महिलाओं का शोषण कर रहे हैं। इतना ही नहीं, छात्रों, स्टाफ सदस्यों और शेफ के साथ यौन गतिविधियों में शामिल हैं।

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जून 2023 में ऑर्गनाइजर और द कम्यून नामक एक अन्य समाचार मंच पर ‘भारतीय कैथोलिक चर्च सेक्स स्कैंडल : ननों और हिंदू महिलाओं का शोषण करने वाले पुजारी का पर्दाफाश’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित हुआ था। जस्टिस ज्योति सिंह ने दोनों प्रकाशनों को अपने प्लेटफार्म से मानहानिकारक लेख को हटाने का आदेश दिया। 
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अदालत ने कहा कि प्रथमदृष्टया ऑर्गनाइजर और द कम्यून ने बिना किसी तथ्यात्मक सत्यापन के लापरवाह तरीके से लेख प्रकाशित किया और यह रिपोर्ट स्कूल प्रिंसिपल की छवि और प्रतिष्ठा को धूमिल कर रही है जो इस देश के एक सम्मानित नागरिक हैं और कई शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े हुए हैं। अदालत ने पाया कि स्कूल प्रिंसिपल ने प्रथमदृष्टया मामला अपने पक्ष में बनाया है और जब तक ये लेख सार्वजनिक डोमेन में रहेंगे, इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की संभावना बनी रहेगी।
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स्कूल के प्रिंसिपल ने यह तर्क देते हुए अदालत का रुख किया था कि वह विभिन्न स्कूलों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं लेकिन कथित तौर पर किसी भी यौन गतिविधि या किसी भी तरह से वित्तीय गलत काम में कभी शामिल नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लेख केवल उनकी और मिशनरियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ एक पदानुक्रमित पद पर उनकी आसन्न पदोन्नति को पूर्वाग्रहित करने के लिए प्रकाशित किया गया। यह भी कहा गया कि दोनों प्लेटफार्मों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की गई है और जांच लंबित है।


जस्टिस सिंह ने संबंधित लेख के बारे में कहा कि इसकी सामग्री प्रथमदृष्टया मानहानिकारक है। प्रतिष्ठा बनाने में वर्षों लग जाते हैं और इसलिए प्रतिष्ठा के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता  दी गई है।

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